नागरिकों को विशेष पहचान संख्या देने में राष्ट्रीय परियोजना 'आधार' की मुख्य भूमिका होगी : श्री मिंज
राष्ट्रीय परियोजना आधार पर कार्यशाला सम्पन्न
रायपुर, 30 नवम्बर 2010

छत्तीसगढ़ सरकार के अपर मुख्य सचिव श्री सरजियस मिंज ने कहा है कि राज्य के नागरिकों को विशेष पहचान संख्या देने में राष्ट्रीय परियोजना 'आधार' की मुख्य भूमिका होगी। पहचान संख्या में प्रत्येक व्यक्ति का नाम, जन्म-दिनांक, लिंग, भवन, ग्राम, नगर, जिला, राज्य, पिन कोड और देश का नाम उल्लेख रहेगा, जो उनकी पहचान को साबित करेगा। श्री मिंज आज यहां नए विश्राम गृह के सभाकक्ष में विशिष्ट पहचान परियोजना 'आधार' के क्रियान्वयन के लिए आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग के प्रमुख सचिव और 'आधार' परियोजना के रजिस्टार श्री विवेक ढांड ने भी परियोजना के विभिन्न पहुओं के बारे में जानकारी दी। यू.आई.डी.ए.आई. के उप-महानिदेशक श्रीमती ए. पदमजा द्वारा 'आधार' परियोजना के संबंध में कम्प्यूटर आधारित प्रस्तुतिकरण दिया गया।
इस अवसर पर नगरीय प्रशासन विभाग के आयुक्त श्री संजय शुक्ला, पोस्ट मास्टर जनरल श्री विनोद वर्मा, संचालक जनसम्पर्क श्री उमेश द्विवेदी और विशिष्ट पहचान परियोजना 'आधार' के प्रथम चरण के चयनित छह जिलों रायपुर, कोरिया (बैकुण्ठपुर), जांजगीर-चांपा, बस्तर (जगदलपुर), धमतरी और महासमुंद जिलों के जिला कलेक्टर, अपर कलेक्टर, जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, नगर पालिका अधिकारी और खाद्य विभाग एवं चिप्स के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
श्री मिंज ने कहा कि देश में आज भी बड़ी संख्या में ऐसे लोग खास तौर पर गरीब तबके के लोग है, जो स्पष्ट परिचय प्रमाण नहीं होने के कारण विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं और कार्यक्रमाें का लाभ नहीं उठा पाते। इसके अभाव में उन्हें अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के क्रियान्वयन से शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों का लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि विज्ञान और टेक्नॉलाजी ने मानव जीवन के हर क्षेत्र को सरल और रूचिकर बना दिया है। श्री मिंज ने कहा कि नागरिकों को विशेष पहचान संख्या देने के लिए यह कार्यशाला सार्थक साबित होगी और यह खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग की एक अच्छी पहल है। कार्यशाला में जो भी बातें आएगी राज्य शासन द्वारा इस पर अमल के लिए सकारात्मक प्रयास किया जाएगा।
कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए श्री ढांड ने कहा कि राष्ट्रीय परियोजना आधार एक विशिष्ट पहचान संख्या है और इसका डुप्लीकेशन नहीं हो सकता। क्योंकि यह जानकारी व्यक्ति की बायो-मेट्रिक्स से संबंधित होगी और इससे झूठी पहचान का पता लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आधार आधारित पहचान के जरिए डुप्लीकेट और झूठी पहचान पर रोक लगेगी। इससे अन्य पात्रता रखने वाले व्यक्तियों को लाभकारी योजनाओं का लाभ मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि प्रथम चरण में चयनित छह जिलों के लगभग 91 लाख नागरिकों को विशिष्ट पहचान संख्या दी जाएगी। यह संख्या बारह अंकों की एक अनोखी पहचान संख्या होगी। जिसमें प्रत्येक नागरिक के बारे में जनसंख्या आधारित विवरण सहित बायो-मेट्रिक्स जानकारी कम्प्यूटर में दर्ज होगी। श्री ढांड ने कहा कि राष्ट्रीय परियोजना आधार के तहत विशिष्ट पहचान नम्बर का उपयोग बैंकों में खाता खोलने, ड्रायविंग लायसेंस, पासपोर्ट बनाने, ए.पी.एल., बी.पी.एल. का राशन कार्ड बनाने और घरेलू रसोई गैस का कनेक्शन लेने सहित विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाने के लिए किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यू.आई.डी.ए.आई. द्वारा नागरिकों का पंजीयन करते समय उनके सभी प्रकार के जनसंख्या आधारित विवरण और बायो-मेट्रिक्स फोटो सहित दोनों हाथों की सभी ऊंगलियों की निशान और दोनों आंखों के फोटो लिए जाएंगे। श्री ढांड ने कहा कि आधार परियोजना का अधिकाधिक प्रचार-प्रसार किया जाएगा, ताकि इस परियोजना से अधिक से अधिक लोगों को लाभान्वित किया जा सके। श्री ढांड ने कार्यशाला में अधिकारियों से आधार परियोजना के क्रियान्वयन के विभिन्न पहलुओं की जानकारी प्राप्त की।
इस अवसर पर नगरीय प्रशासन विभाग के आयुक्त श्री संजय शुक्ला, पोस्ट मास्टर जनरल श्री विनोद वर्मा, संचालक जनसम्पर्क श्री उमेश द्विवेदी और विशिष्ट पहचान परियोजना 'आधार' के प्रथम चरण के चयनित छह जिलों रायपुर, कोरिया (बैकुण्ठपुर), जांजगीर-चांपा, बस्तर (जगदलपुर), धमतरी और महासमुंद जिलों के जिला कलेक्टर, अपर कलेक्टर, जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, नगर पालिका अधिकारी और खाद्य विभाग एवं चिप्स के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
श्री मिंज ने कहा कि देश में आज भी बड़ी संख्या में ऐसे लोग खास तौर पर गरीब तबके के लोग है, जो स्पष्ट परिचय प्रमाण नहीं होने के कारण विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं और कार्यक्रमाें का लाभ नहीं उठा पाते। इसके अभाव में उन्हें अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के क्रियान्वयन से शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों का लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि विज्ञान और टेक्नॉलाजी ने मानव जीवन के हर क्षेत्र को सरल और रूचिकर बना दिया है। श्री मिंज ने कहा कि नागरिकों को विशेष पहचान संख्या देने के लिए यह कार्यशाला सार्थक साबित होगी और यह खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग की एक अच्छी पहल है। कार्यशाला में जो भी बातें आएगी राज्य शासन द्वारा इस पर अमल के लिए सकारात्मक प्रयास किया जाएगा।
कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए श्री ढांड ने कहा कि राष्ट्रीय परियोजना आधार एक विशिष्ट पहचान संख्या है और इसका डुप्लीकेशन नहीं हो सकता। क्योंकि यह जानकारी व्यक्ति की बायो-मेट्रिक्स से संबंधित होगी और इससे झूठी पहचान का पता लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आधार आधारित पहचान के जरिए डुप्लीकेट और झूठी पहचान पर रोक लगेगी। इससे अन्य पात्रता रखने वाले व्यक्तियों को लाभकारी योजनाओं का लाभ मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि प्रथम चरण में चयनित छह जिलों के लगभग 91 लाख नागरिकों को विशिष्ट पहचान संख्या दी जाएगी। यह संख्या बारह अंकों की एक अनोखी पहचान संख्या होगी। जिसमें प्रत्येक नागरिक के बारे में जनसंख्या आधारित विवरण सहित बायो-मेट्रिक्स जानकारी कम्प्यूटर में दर्ज होगी। श्री ढांड ने कहा कि राष्ट्रीय परियोजना आधार के तहत विशिष्ट पहचान नम्बर का उपयोग बैंकों में खाता खोलने, ड्रायविंग लायसेंस, पासपोर्ट बनाने, ए.पी.एल., बी.पी.एल. का राशन कार्ड बनाने और घरेलू रसोई गैस का कनेक्शन लेने सहित विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाने के लिए किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यू.आई.डी.ए.आई. द्वारा नागरिकों का पंजीयन करते समय उनके सभी प्रकार के जनसंख्या आधारित विवरण और बायो-मेट्रिक्स फोटो सहित दोनों हाथों की सभी ऊंगलियों की निशान और दोनों आंखों के फोटो लिए जाएंगे। श्री ढांड ने कहा कि आधार परियोजना का अधिकाधिक प्रचार-प्रसार किया जाएगा, ताकि इस परियोजना से अधिक से अधिक लोगों को लाभान्वित किया जा सके। श्री ढांड ने कार्यशाला में अधिकारियों से आधार परियोजना के क्रियान्वयन के विभिन्न पहलुओं की जानकारी प्राप्त की।
क्रमांक-3986/लहरे

