नक्सल प्रभावित प्रत्येक जिले को शीघ्र मिलेंगे पच्चीस करोड़ रूपए
अपर मुख्य सचिव द्वारा वीडियो कान्फ्रेंसिंग से तात्कालिक स्थानीय आवश्यकता के कार्यो की तैयारी की समीक्षा
रायपुर 04 दिसम्बर 2010
छत्तीसगढ़ में नक्सल प्रभावित प्रत्येक जिले को एकीकृत कार्ययोजना के तहत वर्ष 2010-11 के लिए 25 करोड़ रुपए तथा आगामी वित्तीय वर्ष में 30 करोड़ रुपए की राषि आवंटित की जाएगी। यह राषि तात्कालिक स्थानीय आवष्यकताओं और जनसुविधाओं के छोटे-छोटे कार्यों पर खर्च की जाएगी। अपर मुख्य सचिव श्री सरजियस मिंज ने यह जानकारी आज यहां मंत्रालय स्थित राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र से वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए नक्सल प्रभावित और पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि योजना में शामिल जिलों के कलेक्टरों को दी। विडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से तात्कालिक स्थानीय आवश्यकता और जन-सुविधा के लिए किए जाने वाले कार्यो की तैयारी की समीक्षा की गयी।
श्री मिंज ने जिला कलेक्टरों से कहा कि नक्सल प्रभावित जिलों में एकीकृत कार्ययोजना के तहत जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और वन मण्डलाधिकारी की समिति के अनुमोदन और स्वीकृति के बाद निर्धारित प्रक्रिया अनुसार निर्माण कार्यों पर धनराशि खर्च की जाएगी। इस समिति को तय करना है कि तात्कालिक आवश्यकता क्या है ? एवं इसके क्रियान्वयन से जनता को तत्काल राहत अथवा लाभ महसूस हो। उन्होंने बताया कि इस संबंध में शासन द्वारा शीघ्र ही दिशा-निर्देश जारी कर दिए जाएंगे। श्री मिंज ने कलेक्टरों से कहा कि एकीकृत कार्ययोजना के तहत जनसुविधा के ऐसे छोटे कार्य जिन्हें तत्काल पूर्ण किया जाना जरूरी हो, उनमें पेयजल समस्या, हेण्डपम्प का रख-रखाव, अस्पतालों में मरीजों के साथ आने वाले परिजनों के लिए शेड निर्माण, स्कलों में आवश्यकतानुसार अतिरिक्त कमरें के कार्यों को शामिल किया जा सकता है। तैयारी ऐसी की जाए कि कार्य तत्काल प्रारंभ हो सके एवं धनराशि का पूर्ण उपयोग कर जनता को लाभ पहुंचाया जा सके। जिला प्रशासन के लिए एक अवसर भी है एवं चुनौती भी।
अपर मुख्य सचिव ने पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि योजना के कार्यों की समीक्षा के दौरान कार्यों में और अधिक गति लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस माह की पन्द्रह तारीख तक राशि का उपयोग कर द्वितीय किश्त के प्रस्ताव केन्द्र को शीघ्र भेजना सुनिश्चित करें। श्री मिंज ने आगामी वर्ष 2011-12 की वार्षिक कार्य योजना जिला योजना समिति से अनुमोदन कराकर 15 दिसम्बर 2010 तक शासन को भेजने के निर्देश भी दिए। उन्होंने जिलों की वार्षिक कार्य योजना की जानकारी योजना के साफ्टवेयर 'प्लान-प्लस' में दर्ज करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारी भी उपस्थित थे।

