निजी नर्सिग महाविद्यालयों द्वारा संचालित बी.एस.सी.नर्सिग बेसिक, पोस्ट बेसिक और मास्टर ऑफ नर्सिग पाठयक्रमों में प्रवेश के लिए अंतरिम शुल्क निर्धारित
रायपुर 14 जनवरी 2011
राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ में निजी नर्सिग महाविद्यालयों द्वारा संचालित बैचलर ऑफ साइंस इन नर्सिग (बेसिक), बैचलर ऑफ साइंस इन नर्सिग (पोस्ट बेसिक) और मास्टर ऑफ साइंस इन नर्सिग के पाठयक्रमों में सत्र 2010-11 में दाखिले के लिए अंतरिम शुल्क की घोषणा कर दी है। यह शुल्क उच्च न्यायालय के सेवा निवृत्त न्यायाधीश श्री व्ही. के. श्रीवास्तव की अध्यक्षता में गठित फीस विनयामक समिति द्वारा निर्धारित की गयी है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार ने छत्तीसगढ़ निजी व्यावसायिक शिक्षण संस्थान (प्रवेश का विनियमन एवं शुल्क निर्धारण) अधिनियम 2008 के तहत इस समिति का गठन किया है। तकनीकी शिक्षा, जनशक्ति नियोजन और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा यहां मंत्रालय से 27 दिसम्बर 2010 को जारी आदेश में कहा गया है कि समिति की ओर से निर्धारित यह शुल्क तत्काल प्रभाव से लागू होगा और तब तक लागू रहेगा, जब तक कि फीस विनियामक समिति द्वारा कोई अन्य शुल्क निर्धारित नहीं कर दिया जाता।
फीस विनियामक समिति द्वारा निर्धारित अंतरिम फीस (शिक्षण शुल्क एवं अन्य शुल्क) बैचलर ऑफ साइंस इन नर्सिग (बेसिक) के लिए 43 हजार रूपए, बैचलर ऑफ साइंस इन नर्सिग (पोस्ट बेसिक) के लिए साढ़े पैतीस हजार रूपए और मास्टर ऑफ साइंस इन नर्सिग के लिए 75 हजार रूपए प्रति वर्ष प्रति छात्र निर्धारित किया गया है। यह फीस छत्तीसगढ़ एवं अन्य राज्य के छात्रों के लिए एक समान लागू रहेगी। इसके अतिरिक्त संस्थाएं तीन हजार रूपए विकास शुल्क प्रतिवर्ष प्रति छात्र और डेढ़ हजार रूपए प्रति छात्र एक मुश्त प्रवेश के समय कॉशन मनी के रूप अवधान राशि ले सकती है, जो वापसी योग्य है। आदेश में कहा गया है कि समिति द्वारा निर्धारित फीस से अधिक फीस लेना अथवा समिति द्वारा निर्धारित मद से अन्य मद में फीस लेना केपीटेशन फीस कहलायेगा एवं दोषी संस्था पर अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार वैधानिक कार्रवाई की जावेगी। यह फीस सत्र 2010-11 में प्रवेशित छात्रों के लिए है और यही फीस पूरे पाठयक्रम अवधि के लिए लागू रहेगी। कॉशन मनी डेढ़ हजार रूपये केवल एक बार प्रवेश के समय लिया जाएगा, जो वापसी योग्य है। सत्र 2010-11 में प्रवेशित छात्रों से यदि किसी संस्था ने निर्धारित फीस से अधिक फीस ले ली है तो उसे छात्र को वापस करने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश में कहा गया है कि आधे वर्ष के लिए वार्षिक फीस की आधी राशि ही लिया जाना है। यदि कोई सेमेस्टर डेढ़ वर्ष का है तो छात्र से आनुपातिक डेढ़ वर्ष का ही फीस लिया जाना है, न की दो वर्ष का। निर्धारित समय पर फीस जमा नहीं करने पर छात्र-छात्रा से अधिकतम 25 रूपये प्रतिदिन के हिसाब से विलंब शुल्क भी लिया जा सकेगा। संस्था द्वारा परिवहन शुल्क, छात्रावास शुल्क और मेस शुल्क ''न लाभ-न हानि'' के आधार पर उपयोगकर्ता से लिया जाना है। विश्वविद्यालयीन शुल्क और काउंसिलिंग शुल्क क्रमश: विश्वविद्यालय और संचालनालय/शासन द्वारा जो निर्धारित किया गया है, वही लिया जाना चाहिए। निर्धारित की गयी फीस अधिकतम है। कोई संस्था अगर चाहे तो इससे कम फीस भी ले सकती है। विकास शुल्क की सम्पूर्ण राशि तथा अनिवार्य व्यय के बाद शेष रह गई राशि का उपयोग केवल उसी संस्था के विकास के लिए ही व्यय किया जा सकेगा।
इस राशि का अन्य संस्था या अन्य कार्य के लिए उपयोग नहीं किया जा सकेगा। अंतिम फीस का निर्धारण यदि अंतरिम फीस से अधिक होता है, तो अंतर की राशि छात्र-छात्रा को संस्था में जमा करनी होगी और यदि कम होता है, तो अंतर की राशि संस्था द्वारा छात्र-छात्रा को वापस देय होगी। यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह आदेश उच्च न्यायालय में लंबित प्रकरण क्रमांक डब्ल्यू. पी. (सी.) नम्बर 2112/2010 और 2388/2010 के अध्यधीन रहेगी और इन प्रकरणों में उच्च न्यायालय द्वारा दिये जाने वाले आदेश सह निर्देश के अनुसार इस आदेश में बदलाव किया जा सकेगा।

