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छत्तीसगढ़ में 14 अप्रैल से शुरू होगा ग्राम सभाओं का सिलसिला

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When Apr 06, 2011
from 08:40 PM to 08:40 PM
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बकायादारों की सूची भी पढ़ी जाएगी जनता के बीच

ग्राम पंचायतों के आय-व्यय का ब्यौरा भी पेश किया जाएगा

रायपुर, 06 अप्रैल 2011

    भारतीय संविधान के महान शिल्पी डॉ.भीमराव अम्बेडकर की जयंती के अवसर पर आगामी 14 अप्रैल से छत्तीसगढ़ की ग्राम पंचायतों में ग्राम सभाओं के आयोजन का सिलसिला शुरू हो जाएगा। प्रत्येक ग्राम पंचायत के हर आश्रित गांव में ग्राम सभा होगी। इसके लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत को अपने आश्रित गांवों के लिए 14 अप्रैल और आगे की अलग-अलग तिथि निर्धारित करने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य सरकार ने सभी जिला पंचायतों से कहा है कि ग्राम सभाओं के आयोजन की रिपोर्ट संकलित कर 30 अप्रैल तक पंचायत और समाज सेवा संचालनालय को भिजवा दी जाए।  बस्तर लोकसभा उप चुनाव के लिए लागू आचार संहिता को ध्यान रख कर बस्तर, दक्षिण बस्तर (दंतेवाड़ा), नारायणपुर और बीजापुर जिलों में फिलहाल ये ग्राम सभाएं नहीं होंगी। इसके लिए वहां अलग से कार्यक्रम बनाया जाएगा। 
    पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग ने इस संबंध में यहां मंत्रालय से सभी जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को परिपत्र भेजकर ग्राम सभाओं की तैयारी करने के निर्देश दिए हैं। इनमें ग्राम पंचायतों के बकायादार, पूर्व और वर्तमान पदाधिकारियों सहित बकायादार अधिकारियों और कर्मचारियों की सूची भी जनता को पढ़ कर सुनाई जाएगी। इसके अलावा वित्तीय वर्ष 2010-11 में ग्राम पंचायतों को उपलब्ध कराई गई शासकीय राशि तथा आय और व्यय का ब्यौरा भी पेश करते हुए जनता से उसका अनुमोदन कराया जाएगा। परिपत्र में कहा गया है कि प्रदेष में ग्राम सुराज अभियान का आयोजन प्रथम चरण 19 अप्रैल से 23 अप्रैल तक और द्वितीय चरण 25 अप्रैल से 29 अप्रैल तक किया जा रहा है। ग्राम सुराज आयोजन की तिथियों को दृष्टिगत रखते हुए सुविधानुसार तिथियों में ग्राम सभा का आयोजन किया जाए।
    उल्लेखनीय है कि राज्य शासन द्वारा छत्तीसगढ़ पंचायत राज (संशोधन) अधिनियम 2004 लागू करके अब प्रत्येक ग्राम पंचायत के हर आश्रित गांव में ग्रामसभा के आयोजन का प्रावधान कर दिया है। इसके पहले तक ग्राम सभाओं का आयोजन सिर्फ ग्राम पंचायत मुख्यालयों में हुआ करता था। इससे ग्राम पंचायतों के आश्रित गांवों के लोग दूरी और अन्य कारणों से ग्राम सभा में शामिल नहीं हो पाते थे। ग्रामीणों की इस कठिनाई को राज्य सरकार ने गंभीरता से महसूस कर छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम की धारा 06 में संशोधन किया है। इसके फलस्वरूप अब प्रत्येक गांव में ग्राम सभा हो रही है। वर्ष में कम से कम छह ग्राम सभाओं का आयोजन क्रमश: 20 अगस्त, 02 अक्टूबर, 26 जनवरी और 14 अप्रैल को और इसके अलावा दो और ग्राम सभा महामहिम राज्यपाल के प्रस्ताव पर जून एवं नवम्बर माह में सुविधा जनक तिथियों में अनिवार्य रूप से करने के निर्देश हैं।
    परिपत्र के अनुसार ग्राम सभाओं के आयोजन के लिए जनपद पंचायतों के स्तर पर एक समय सारिणी इस प्रकार तैयार की जाएगी, जिससे किसी एक निर्धारित दिवस पर किसी ग्राम पंचायत के एक ही गांव में उसका आयोजन हो सके। अर्थात प्रत्येक ग्राम पंचायत के हर आश्रित गांव में ग्राम सभा का आयोजन किया जाएगा। इस प्रकार की व्यवस्था करने से ग्राम पंचायतों के सरपंच और सचिव प्रत्येक ग्राम सभा में आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे। ग्राम सभाओं के आयोजन के लिए जिला कलेक्टरों को जरूरत के अनुसार स्थानीय स्तर पर अधिकारियों और कर्मचारियों को जिम्मेदारी सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। परिपत्र में ग्राम सभाओं में स्थानीय ग्रामीणों की उपस्थिति में विचार-विमर्श के लिए शासन स्तर पर सोलह विभिन्न बिन्दुओं पर मुद्दे निर्धारित कर दिए गए हैं। इनमें सबसे पहले ग्राम सभा की पिछली बैठकों में पारित संकल्पों के क्रियान्वयन का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जाएगा। सार्वजनिक स्वच्छता और सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान के तहत घरों में निर्मित और निर्माणाधीन पक्के शौचालयों और उनके स्वीकृत प्रकरणों की प्रगति की समीक्षा भी ग्राम सभाओं में की जाएगी। इसके अलावा वित्तीय वर्ष 2010-11 में ग्राम पंचायतों को उपलब्ध शासकीय राशि के आय-व्यय का ब्यौरा स्थानीय जनता के बीच पेश करने के बाद ग्रामीणों की सहमति से उसका अनुमोदन भी किया जाएगा। ग्राम सभाओं में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत चल रहे कार्यों की समीक्षा होगी और इस योजना के तहत समय-समय पर जारी शासकीय दिशा निर्देशों का ब्यौरा भी ग्रामीणों को पढ़ कर सुनाया जाएगा। केन्द्र के सामाजिक आर्थिक कार्यक्रमों की योजना, निर्माण और क्रियान्वयन से संबंधित मुद्दों में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन, सर्व शिक्षा अभियान, एकीकृत बाल विकास योजना, एकीकृत जल ग्रहण प्रबंधन कार्यक्रम, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, सूखा राहत, सामाजिक अंकेक्षण आदि पर विचार किया जाए। ग्राम पंचायतों द्वारा लगाए गए करों की वसूली और बकाया करों की ताजा स्थिति की भी समीक्षा होगी और नए कर लगाने के लिए संभावित विषय वस्तु को भी ग्राम सभा में सूची बध्द किया जाएगा। विभिन्न प्रकार के मेलों के आयोजन, बाजार और कांजी हाउस स्थापना, सार्वजनिक पेयजल व्यवस्था, वृक्षारोपण, समाज कल्याण विभाग की विभिन्न पेंशन योजनाओं पर भी ग्राम सभा में चर्चा की जाएगी।
    परिपत्र में कहा गया है कि ग्राम सभा की बैठक में सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की जानकारी भी ग्रामीणों को दी जाए और इस अधिनियम के तहत प्राप्त आवेदनों पर की गई कार्रवाई तथा लंबित तथा अपीलीय प्रकरणों का ब्यौरा भी वहां रखा जाए। पंचायतों के जिन पूर्व और वर्तमान पदाधिकारियों सहित अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों से पंचायतों का हिसाब लेना है अथवा इनमें से जिन पर ग्राम पंचायतों की राशि बकाया है, उनके नाम भी ग्राम सभाओं में पढ़ कर सुनाए जाएंगे। ग्राम पंचायतों में संचालित स्वामी आत्मानंद वाचनालयों की पुस्तकें ग्रामीणों को पढ़ने के लिए उपलब्ध कराने के बारे में भी ग्राम सभा में चर्चा होगी। इसके अलावा कलेक्टर, जिला पंचायत, जनपद पंचायत और ग्राम पंचायत द्वारा स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रख कर अन्य विषय वस्तु भी ग्राम सभा की कार्य सूची में शामिल की जा सकेगी। परिपत्र में जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों से कहा गया है कि ग्राम सभाओं के आयोजन के बाद उसका जिला स्तरीय प्रतिवेदन पांच सितम्बर तक संचालक पंचायत और समाज सेवा संचालनालय को पांच सितम्बर तक भेज दिया जाए। ग्राम सभाओं के आयोजन के बारे में ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न माध्यमों से व्यापक प्रचार-प्रसार करवाने के भी निर्देश दिए गए हैं।

क्रमांक-105/चतुर्वेदी
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