महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना : केन्द्रीय राशि के निर्गमन में रोक के संबंध में निर्देश
रायपुर, 11 अप्रैल 2011
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम 2005 की धारा-27 के तहत केन्द्रीय राशि के निर्गमन में रोक के संबंध में राज्य शासन के पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग ने यहां मंत्रालय से सभी जिला कलेक्टरों को परिपत्र जारी किया है। परिपत्र में उन्हें योजना के अधिनियम का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए है और यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रतिकूल परिस्थिति निर्मित होने पर केन्द्र सरकार के निर्देश अनुसार कार्रवाई की जाएगी, जिसके लिए कलेक्टर स्वयं जिम्मेदार होंगे। परिपत्र में कहा गया है कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम की धारा-27(1) के अनुसार 'केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के उपबंधों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार को ऐसे निर्देश दे सकेगी जो वह आवश्यक समझे।'
परिपत्र में बताया गया है कि योजना के अधिनियम की धारा-27(2) के अनुसार-उपधारा (1) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना केन्द्रीय सरकार, किसी योजना (स्कीम) के संबंध में इस अधिनियम के अनुदत्त निधियों को जारी करने या अनुचित उपयोग के संबंध में किसी शिकायत की प्राप्ति पर, यदि प्रथम दृष्टया यह समाधान हो जाता है कि कोई मामला बनता है तो उसके द्वारा पदाभिहित किसी अभिकरण द्वारा की गई शिकायत की जांच करा सकेगी। यदि आवश्यक हो तो योजना की धनराशि के आबंटन को रोकने का आदेश कर सकेगी और निश्चित समय अवधि में इसके उचित क्रियान्वयन के लिए समुचित उपचारी उपाय कर सकेगी।
परिपत्र में कहा गया है कि क्षेत्रीय स्तर पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के क्रियान्वयन की समीक्षा किए जाने के लिए विभिन्न स्त्रोतों जैसे- केन्द्रीय मंत्रालय के अधिकारियों के क्षेत्र भ्रमण, केन्द्रीय रोजगार गारंटी परिषद, राष्ट्रीय स्तर पर निगरानी सदस्य, अंकेक्षण दल, मीडिया रिपोर्ट्स द्वारा क्रियान्वयन की प्रक्रियाओं में पाई गई विसंगतियों पर कार्रवाई की जाए। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के अनुसार राज्य सरकार द्वारा योजनाओं को लागू किया जाएगा। राज्य सरकार ही उपचारी उपाय संस्थान होंगे। यदि केन्द्र सरकार द्वारा दिए गए निर्देश के अनुरूप राज्य सरकार अधिनियम के प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए शीघ्र सुधारात्मक कार्रवाई की जाएगी। कलेक्टरों से कहा गया है कि अधिनियम के उल्लंघन तथा चूक के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों के विरूध्द धारा-25 के तहत कर्रावाई की जानी चाहिए। इस परिस्थिति में केन्द्र सरकार द्वारा यदि आवश्यक हो तो अधिनियम की धारा 27 (2) में दी गई शक्तियों का प्रयोग करते हए राज्य सरकार को योजना के तहत प्रदाय की जाने वाली राशि रोक दी जाएगी। इस अवधि के दौरान योजना तथा बेरोजगारी भत्ते के भुगतान के लिए राशि का वहन राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा।
इन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए केन्द्र सरकार द्वारा निम्न प्रक्रियाओं का निर्धारण किया गया है। 1- भारत सरकार द्वारा स्वतंत्र सूत्रों से प्राप्त शिकायतों की पूछताछ की जाएगी।
2-प्रथम दृष्टि में प्रकरण की जांच पड़ताल और आरोपों का उचित विवरण तैयार कर, राज्य सरकार को दो सप्ताह की अवधि के भीतर पूछताछ और जवाबी कार्रवाई के लिए भेजी जाएंगी।
3-राज्य से प्रतिवेदन प्राप्त होने पर केन्द्र स्तर पर गठित स्क्रीनिंग समिति द्वारा प्रतिवेदन की जांच की जाएंगी। प्रतिवेदन संतोषजनक नहीं पाए जाने पर प्रकरण की (जहां प्रथम दृष्टया अपराधिक मंशा है) सी.बी.आई से अथवा गैर अपराधिक व प्रणाली की विफलता की चूक हो तो केन्द्रीय मंत्रालय के अधिकारियों की टीम के द्वारा जांच की जाएंगी।
4-सी.बी.आई. जांच के मामले में राज्य सरकार द्वारा संबंधित अधिकारियों को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के संचालन क्षेत्र से अन्यत्र स्थानांतरित करना होगा। यदि राज्य सरकार द्वारा इन प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया जाता है तो धनराशि का निर्गमन रोक दिया जाएगा। 5-केन्द्रीय मंत्रालय के अधिकारियों द्वारा जांच के मामले में जांच प्रतिवेदन प्राप्त होने पर धनराशि का निर्गमन रोक दिया जाएगा और राज्य सरकार को इस व्यवस्था में एक निश्चित अवधि के भीतर सुधार करना होगा।
6- राज्य सरकार द्वारा किए गए सुधार के उपायों से संतुष्ट होने पर केन्द्र सरकार द्वारा धनराशि का पुन: निर्गमन जारी किया जा सकेगा।

