कुएं ने बदली जीवन की तस्वीर
रायपुर, 12 अप्रैल 2010

खेती-किसानी के लिए पानी की कमी, बारिश के लिए बादलों की ओर टक-टकी और फिर रोजी-रोटी की तलाश कुछ ऐसी ही समस्यों से धिरा था, सियाराम। 'रोजगार के लिए मजदूरी पर आश्रित परिवार' के अलावा गांव में उसकी अलग से कोई विशेष पहचान नहीं थी। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत छत्तीसगढ़ में कोरिया जिले के विकासखण्ड बैंकुठपुर से 11 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पंचायत आमापार निवासी पिछड़ा वर्ग गरीबी रेखा श्रेणी के श्री सियाराम यादव के खेत में कुआं निर्माण के लिए एक लाख दस हजार रूपए की स्वीकृति प्रदान की गई। इससे सियाराम के परिवार को जहां आठ हजार रूपए की मजदूरी मिली, वहीं खेत में सिंचाई के लिए पानी की सुविधा भी मिल गई। अब सियाराम खुश है, आखिरकार उसे कुआं जो मिल गया। इस कुंए से उसे एक पहचान मिल गई हैं। अब गांव वाले उसे 'कुंए वाला सियाराम' कहकर पुकारते हैं।
अपनी खुशी को व्यक्त करते हुए श्री सियाराम ने बताया कि कुआं निर्माण से मुझे तो लाभ मिला है, गांव के अन्य व्यक्तियों को भी रोजगार मिला है। कुएं से सिंचाई के लिए मिले पानी से पहली बार में सब्जी-भांजी लगाई। इसमें से आलू 50 किलो, प्याज 60 किलो और टमाटर, भाटे के अलावा बटरी एवं चने की फसल भी ली। इसके बाद बारिश और कुएं, दोनों से पानी की पर्याप्त उपलब्धता को देखते हुए जून'2010 में खरीफ की फसल बोवरा न लेकर रोपा पध्दति से लिया, जिससे फसल का अधिक उत्पादन हुआ। घर में दोनों बेटे अपने-अपने काम के अलावा, अब खेती में मेरी मदद करने के साथ-साथ गांव में योजना के तहत हाने वाले सामुदायिक कार्यों में भी सहयोग करते हैं।
एक एकड़ खेत का मालिक श्री सियाराम ने प्रत्येक साल बारिश के बाद काम की तलाश करने लगता था। गांव में महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना के तहत उसे सपरिवार 100 दिवस का रोजगार मिल जाता था। लेकिन सात सदस्यों का बड़ा परिवार होने के कारण यह पर्याप्त नहीं था। फिर भी कुछ दिनों के लिए ही सही .... बेरोजगारी से मुक्ति तो मिल ही जाती थी। एक दिन महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत अपने ही गांव में नहर निर्माण कार्य में मजदूरी करते समय उसे रोजगार सहायक को सरपंच से योजना के तहत निजी कृषि भूमि में सिंचाई के लिए नि:शुल्क कुंआ निर्माण के बारे में कहते सुना। कार्य समाप्त होने के बाद उसने रोजगार सहायक से पूछा तो उसने बताया कि योजना के तहत गरीबी रेखा श्रेणी के परिवार को सिंचाई सुविधा के लिए उनके खेतों में नि:शुल्क कुआं निर्माण का प्रावधान है। श्री सियाराम ने सभी औपचारिकताएं पूरी करते हुए गांव के सरपंच को अपने खेत में कुआं निर्माण के लिए आवेदन दिया। अब तो, सिंचाई सुविधा के अभाव में और वर्षा पर निर्भर रहकर सालभर में एक फसल लेने वाले श्री सियाराम की आंखों में कुएं के पानी से लह-लहाती फसलोें के दृश्य तैरने लग गए। उसका यह सपना मार्च 2009 से साकार होने लगा। कुआं निर्माण कार्य में उसके बेटों और अन्य ग्रामीणों ने मिलकर कार्य किया।
सियाराम के कुएं ने न केवल उसके चहरे पर मुस्कान लाई बल्कि वर्ष 2009-10 की गर्मी में आस-पास के ग्रामीणों को पीने का पानी भी मिला। इसके साथ ही गांव के सर्वश्री शिव प्रसाद, राम साय और छवीलाल के बेटों की शादी में भी पानी की दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ा। श्री सियाराम ने फैसला किया है कि इस साल वह अपने खेत से श्री धासीराम और श्री राम यादव को भी अपने कुएं से सिंचाई के लिए पानी देगा। श्री सियाराम की इस भावना से जहां उसे एक सामाजिक पहचान मिल रही है, वहीं इस योजना से सियाराम जैसे खेत को मालिकों में एक छोटी सी आशा जगी है।

