छत्तीसगढ़ के हर गांव में होगी ग्रामसभा : इस माह की 20 तारीख से शुरू होगा सिलसिला
आम जनता के बीच होगी सरकारी योजनाओं की समीक्षा
रायपुर, 09 अगस्त 2011
राज्य सरकार के पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग ने छत्तीसगढ़ की सभी ग्राम पंचायतों के प्रत्येक गांव में बीस अगस्त से ग्राम सभाओं के आयोजन के निर्देश जारी किए है। इन ग्रामसभाओं में ग्राम पंचायत स्तर पर संचालित विभिन्न सरकारी योजनाओं की समीक्षा आम जनता के बीच होगी और जनता भी इन योजनाओं के तहत अपनी-अपनी ग्राम पंचायतों में हुए कार्यों सहित प्राप्त राशि और खर्च का ब्यौरा लेगी।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में ग्राम पंचायतों की संख्या नौ हजार 734 है। इन ग्राम पंचायतों के अन्तर्गत गांवों की संख्या 19 हजार से अधिक है। इन गांवों में ग्रामसभाओं का सिलसिला इस महीने की बीस तारीख से शुरू हो जाएगा। इनमें महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन, सर्वशिक्षा अभियान, स्वास्थ्य सेवाएं, स्वच्छता, पेयजल आपूर्ति, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, स्कूली बच्चों की मध्यान्ह भोजन व्यवस्था सहित विभिन्न विभागों की योजनाओं के बारे में ग्रामीणों से खुलकर बातचीत होगी। इन विभागों के ग्राम स्तरीय कर्मचारियों और अधिकारियों को ग्रामसभाओं में अनिवार्य रूप से मौजूद रहना होगा, जो ग्रामीणों को अपनी विभागीय योजनाओं की भी जानकारी देंगे।
ग्रामसभाओं के आयोजन के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने यहां मंत्रालय से सभी जिला कलेक्टरों,जिला पंचायतों के मुख्यकार्यपालन अधिकारियों और पंचायत एवं समाज कल्याण विभाग के संयुक्त संचालकों और उप संचालकों को परिपत्र जारी किया है। परिपत्र में उन्हें ग्रामसभाओं की तैयारी और उनके आयोजन के लिए जरूरी निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों से यह भी कहा गया है कि वे ग्रामसभाओं का आयोजन पूर्ण होने के बाद अपने-अपने जिले का प्रतिवेदन पांच सितम्बर से पहले पंचायत और समाज सेवा संचालनालय रायपुर को अनिवार्य रूप से भेंजे। परिपत्र में कहा गया है कि ग्रामसभाओं आयोजन इस प्रकार किया जाए कि 20 अगस्त और आगे की तारीखों में संबंधित ग्राम पंचायत के आश्रित गांवों में एक दिन में एक ग्रामसभा सुव्यवस्थित रूप से सम्पन्न हो सके, ताकि प्रत्येक ग्रामसभा में ग्राम पंचायत के सरपंच और सचिव भी आसानी से उपस्थित रह सकें।
यह भी उल्लेखनीय है कि राज्य शासन द्वारा छत्तीसगढ़ पंचायत राज (संशोधन) अधिनियम 2004 लागू करके अब प्रत्येक ग्राम पंचायत के हर आश्रित गांव में ग्रामसभा के आयोजन का प्रावधान कर दिया है। इसके पहले तक ग्राम सभाओं का आयोजन सिर्फ ग्राम पंचायत मुख्यालयों में हुआ करता था। इससे ग्राम पंचायतों के आश्रित गांवों के लोग दूरी और अन्य कारणों से ग्राम सभा में शामिल नहीं हो पाते थे। ग्रामीणों की इस कठिनाई को राज्य सरकार ने गंभीरता से महसूस कर छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम की धारा 06 में संशोधन किया है। इसके फलस्वरूप अब प्रत्येक गांव में ग्राम सभा हो रही है। वर्ष में कम से कम छह ग्राम सभाओं का आयोजन क्रमश: 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर, 14 अप्रैल को संविधान शिल्पी डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जयंती के अवसर पर, 20 अगस्त को पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री राजीव गांधी की जयंती पर और 02 अक्टूबर को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर और इसके अलावा दो और ग्रामसभा महामहिम राज्यपाल के प्रस्ताव पर जून एवं नवम्बर माह में सुविधाजनक तिथियों में अनिवार्य रूप से करने के निर्देश हैं।
ग्राम सभाओं के आयोजन के लिए जिला कलेक्टरों को जरूरत के अनुसार स्थानीय स्तर पर अधिकारियों और कर्मचारियों को जिम्मेदारी सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। परिपत्र में ग्राम सभाओं में स्थानीय ग्रामीणों की उपस्थिति में विचार-विमर्श के लिए शासन स्तर पर विभिन्न बिन्दुओं पर मुद्दे निर्धारित कर दिए गए हैं। इनमें सबसे पहले ग्राम सभा की पिछली बैठकों में पारित संकल्पों के क्रियान्वयन का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जाएगा। ग्राम पंचायत की 'वार्षिक विकास प्रतिवेदन' का अनुमोदन किया जाएगा। ग्रामों में स्वच्छता, सफाई रखने और घरों में स्वच्छ शौचालय निर्माण करने पर विचार होगा। पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि योजना के तहत स्वीकृत कार्यो, उसकी लागत और निर्माण कार्यो पर किए गए व्यय का अनुमोदन के साथ ही इसके उपयोगिता प्रमाण पत्र जारी करने का प्रस्ताव पारित किया जाएगा। इसके अलावा चालू वित्तीय वर्ष 2011-12 में ग्राम पंचायतों को उपलब्ध शासकीय राशि के आय-व्यय का ब्यौरा स्थानीय जनता के बीच पेश करने के बाद ग्रामीणों की सहमति से उसका अनुमोदन भी किया जाएगा। सार्वजनिक स्वच्छता और सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान के तहत घरों में निर्मित और निर्माणाधीन पक्के शौचालयों और उनके स्वीकृत प्रकरणों की प्रगति की समीक्षा भी ग्राम सभाओं में की जाएगी। वित्तीय वर्ष 2010-11 में ग्राम पंचायतों को उपलब्ध करायी गई राशि की आय-व्यय की मदवार जानकारी प्रस्तुत कर ग्राम सभा से अनुमोदन कराया जाएगा। ग्राम सभाओं में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत चल रहे कार्यों की समीक्षा होगी और इस योजना के तहत समय-समय पर जारी शासकीय दिशा निर्देशों का ब्यौरा भी ग्रामीणों को पढ़ कर सुनाया जाएगा। ग्राम पंचायतों द्वारा लगाए गए करों की वसूली और बकाया करों की ताजा स्थिति की भी समीक्षा होगी और नए कर लगाने के लिए संभावित विषय वस्तु को भी ग्राम सभा में सूची बध्द किया जाएगा। विभिन्न प्रकार के मेलों के आयोजन, बाजार और कांजी हाउस स्थापना, वृक्षारोपण, समाज कल्याण विभाग की विभिन्न पेंशन योजनाओं पर भी ग्राम सभा में समीक्षात्मक चर्चा की जाएगी।
परिपत्र में कहा गया है कि ग्राम सभा की बैठक में सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की जानकारी भी ग्रामीणों को दी जाए और इस अधिनियम के तहत प्राप्त आवेदनों पर की गई कार्रवाई तथा लंबित तथा अपीलीय प्रकरणों का ब्यौरा भी वहां रखा जाए। पंचायतों के जिन पूर्व और वर्तमान पदाधिकारियों सहित अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों से पंचायतों का हिसाब लेना है अथवा इनमें से जिन पर ग्राम पंचायतों की राशि बकाया है, उनके नाम भी ग्राम सभाओं में पढ़ कर सुनाए जाएंगे। ग्राम पंचायतों में संचालित स्वामी आत्मानंद वाचनालयों की पुस्तकें ग्रामीणों को पढ़ने के लिए उपलब्ध कराने के बारे में भी ग्राम सभा में चर्चा होगी। केन्द्र के सामाजिक आर्थिक कार्यक्रमों की योजना, निर्माण और क्रियान्वयन से संबंधित मुद्दों में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गांरटी योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन, सर्व शिक्षा अभियान, एकीकृत बाल विकास योजना, एकीकृत जल ग्रहण प्रबंधन कार्यक्रम, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, सूखा राहत, सामाजिक अंकेक्षण आदि पर विचार किया जाए। इसके अलावा कलेक्टर, जिला पंचायत, जनपद पंचायत और ग्राम पंचायत द्वारा स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रख कर अन्य विषय वस्तु भी ग्राम सभा की कार्य सूची में शामिल की जा सकेगी। परिपत्र में यह भी कहा गया है कि ग्राम सभा में इन बिन्दुओं के अलावा पंचायती राज मंत्रालय के निर्देशानुसार प्रत्येक ग्राम सभा में पोषण आहार से संबंधित मुद्दों, ए.डब्ल्यू.सी., स्वास्थ्य, स्वच्छता, पेयजल, सार्वजनिक वितरण प्राणाली के सुव्यवस्थित करने, मध्यान्ह भोजन, कृषि, उद्यानिकी, दुग्ध उत्पादन (डेयरी) एवं मछली पालन के संबंध में विशेष रूप से चर्चा की जाए। आयोजित ग्राम सभाओं में इन विभागों के विकास खण्ड स्तर के मैदानी कर्मचारी अनिवार्य रूप से उपस्थित होकर लोगों को जानकारी उपलब्ध कराए। जिला कलेक्टरों को ग्राम सभाओं के आयोजन के बारे में ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न माध्यमों से व्यापक प्रचार-प्रसार करवाने के भी निर्देश दिए गए हैं।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में ग्राम पंचायतों की संख्या नौ हजार 734 है। इन ग्राम पंचायतों के अन्तर्गत गांवों की संख्या 19 हजार से अधिक है। इन गांवों में ग्रामसभाओं का सिलसिला इस महीने की बीस तारीख से शुरू हो जाएगा। इनमें महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन, सर्वशिक्षा अभियान, स्वास्थ्य सेवाएं, स्वच्छता, पेयजल आपूर्ति, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, स्कूली बच्चों की मध्यान्ह भोजन व्यवस्था सहित विभिन्न विभागों की योजनाओं के बारे में ग्रामीणों से खुलकर बातचीत होगी। इन विभागों के ग्राम स्तरीय कर्मचारियों और अधिकारियों को ग्रामसभाओं में अनिवार्य रूप से मौजूद रहना होगा, जो ग्रामीणों को अपनी विभागीय योजनाओं की भी जानकारी देंगे।
ग्रामसभाओं के आयोजन के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने यहां मंत्रालय से सभी जिला कलेक्टरों,जिला पंचायतों के मुख्यकार्यपालन अधिकारियों और पंचायत एवं समाज कल्याण विभाग के संयुक्त संचालकों और उप संचालकों को परिपत्र जारी किया है। परिपत्र में उन्हें ग्रामसभाओं की तैयारी और उनके आयोजन के लिए जरूरी निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों से यह भी कहा गया है कि वे ग्रामसभाओं का आयोजन पूर्ण होने के बाद अपने-अपने जिले का प्रतिवेदन पांच सितम्बर से पहले पंचायत और समाज सेवा संचालनालय रायपुर को अनिवार्य रूप से भेंजे। परिपत्र में कहा गया है कि ग्रामसभाओं आयोजन इस प्रकार किया जाए कि 20 अगस्त और आगे की तारीखों में संबंधित ग्राम पंचायत के आश्रित गांवों में एक दिन में एक ग्रामसभा सुव्यवस्थित रूप से सम्पन्न हो सके, ताकि प्रत्येक ग्रामसभा में ग्राम पंचायत के सरपंच और सचिव भी आसानी से उपस्थित रह सकें।
यह भी उल्लेखनीय है कि राज्य शासन द्वारा छत्तीसगढ़ पंचायत राज (संशोधन) अधिनियम 2004 लागू करके अब प्रत्येक ग्राम पंचायत के हर आश्रित गांव में ग्रामसभा के आयोजन का प्रावधान कर दिया है। इसके पहले तक ग्राम सभाओं का आयोजन सिर्फ ग्राम पंचायत मुख्यालयों में हुआ करता था। इससे ग्राम पंचायतों के आश्रित गांवों के लोग दूरी और अन्य कारणों से ग्राम सभा में शामिल नहीं हो पाते थे। ग्रामीणों की इस कठिनाई को राज्य सरकार ने गंभीरता से महसूस कर छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम की धारा 06 में संशोधन किया है। इसके फलस्वरूप अब प्रत्येक गांव में ग्राम सभा हो रही है। वर्ष में कम से कम छह ग्राम सभाओं का आयोजन क्रमश: 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर, 14 अप्रैल को संविधान शिल्पी डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जयंती के अवसर पर, 20 अगस्त को पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री राजीव गांधी की जयंती पर और 02 अक्टूबर को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर और इसके अलावा दो और ग्रामसभा महामहिम राज्यपाल के प्रस्ताव पर जून एवं नवम्बर माह में सुविधाजनक तिथियों में अनिवार्य रूप से करने के निर्देश हैं।
ग्राम सभाओं के आयोजन के लिए जिला कलेक्टरों को जरूरत के अनुसार स्थानीय स्तर पर अधिकारियों और कर्मचारियों को जिम्मेदारी सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। परिपत्र में ग्राम सभाओं में स्थानीय ग्रामीणों की उपस्थिति में विचार-विमर्श के लिए शासन स्तर पर विभिन्न बिन्दुओं पर मुद्दे निर्धारित कर दिए गए हैं। इनमें सबसे पहले ग्राम सभा की पिछली बैठकों में पारित संकल्पों के क्रियान्वयन का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जाएगा। ग्राम पंचायत की 'वार्षिक विकास प्रतिवेदन' का अनुमोदन किया जाएगा। ग्रामों में स्वच्छता, सफाई रखने और घरों में स्वच्छ शौचालय निर्माण करने पर विचार होगा। पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि योजना के तहत स्वीकृत कार्यो, उसकी लागत और निर्माण कार्यो पर किए गए व्यय का अनुमोदन के साथ ही इसके उपयोगिता प्रमाण पत्र जारी करने का प्रस्ताव पारित किया जाएगा। इसके अलावा चालू वित्तीय वर्ष 2011-12 में ग्राम पंचायतों को उपलब्ध शासकीय राशि के आय-व्यय का ब्यौरा स्थानीय जनता के बीच पेश करने के बाद ग्रामीणों की सहमति से उसका अनुमोदन भी किया जाएगा। सार्वजनिक स्वच्छता और सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान के तहत घरों में निर्मित और निर्माणाधीन पक्के शौचालयों और उनके स्वीकृत प्रकरणों की प्रगति की समीक्षा भी ग्राम सभाओं में की जाएगी। वित्तीय वर्ष 2010-11 में ग्राम पंचायतों को उपलब्ध करायी गई राशि की आय-व्यय की मदवार जानकारी प्रस्तुत कर ग्राम सभा से अनुमोदन कराया जाएगा। ग्राम सभाओं में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत चल रहे कार्यों की समीक्षा होगी और इस योजना के तहत समय-समय पर जारी शासकीय दिशा निर्देशों का ब्यौरा भी ग्रामीणों को पढ़ कर सुनाया जाएगा। ग्राम पंचायतों द्वारा लगाए गए करों की वसूली और बकाया करों की ताजा स्थिति की भी समीक्षा होगी और नए कर लगाने के लिए संभावित विषय वस्तु को भी ग्राम सभा में सूची बध्द किया जाएगा। विभिन्न प्रकार के मेलों के आयोजन, बाजार और कांजी हाउस स्थापना, वृक्षारोपण, समाज कल्याण विभाग की विभिन्न पेंशन योजनाओं पर भी ग्राम सभा में समीक्षात्मक चर्चा की जाएगी।
परिपत्र में कहा गया है कि ग्राम सभा की बैठक में सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की जानकारी भी ग्रामीणों को दी जाए और इस अधिनियम के तहत प्राप्त आवेदनों पर की गई कार्रवाई तथा लंबित तथा अपीलीय प्रकरणों का ब्यौरा भी वहां रखा जाए। पंचायतों के जिन पूर्व और वर्तमान पदाधिकारियों सहित अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों से पंचायतों का हिसाब लेना है अथवा इनमें से जिन पर ग्राम पंचायतों की राशि बकाया है, उनके नाम भी ग्राम सभाओं में पढ़ कर सुनाए जाएंगे। ग्राम पंचायतों में संचालित स्वामी आत्मानंद वाचनालयों की पुस्तकें ग्रामीणों को पढ़ने के लिए उपलब्ध कराने के बारे में भी ग्राम सभा में चर्चा होगी। केन्द्र के सामाजिक आर्थिक कार्यक्रमों की योजना, निर्माण और क्रियान्वयन से संबंधित मुद्दों में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गांरटी योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन, सर्व शिक्षा अभियान, एकीकृत बाल विकास योजना, एकीकृत जल ग्रहण प्रबंधन कार्यक्रम, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, सूखा राहत, सामाजिक अंकेक्षण आदि पर विचार किया जाए। इसके अलावा कलेक्टर, जिला पंचायत, जनपद पंचायत और ग्राम पंचायत द्वारा स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रख कर अन्य विषय वस्तु भी ग्राम सभा की कार्य सूची में शामिल की जा सकेगी। परिपत्र में यह भी कहा गया है कि ग्राम सभा में इन बिन्दुओं के अलावा पंचायती राज मंत्रालय के निर्देशानुसार प्रत्येक ग्राम सभा में पोषण आहार से संबंधित मुद्दों, ए.डब्ल्यू.सी., स्वास्थ्य, स्वच्छता, पेयजल, सार्वजनिक वितरण प्राणाली के सुव्यवस्थित करने, मध्यान्ह भोजन, कृषि, उद्यानिकी, दुग्ध उत्पादन (डेयरी) एवं मछली पालन के संबंध में विशेष रूप से चर्चा की जाए। आयोजित ग्राम सभाओं में इन विभागों के विकास खण्ड स्तर के मैदानी कर्मचारी अनिवार्य रूप से उपस्थित होकर लोगों को जानकारी उपलब्ध कराए। जिला कलेक्टरों को ग्राम सभाओं के आयोजन के बारे में ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न माध्यमों से व्यापक प्रचार-प्रसार करवाने के भी निर्देश दिए गए हैं।
क्रमांक-2197/चतुर्वेदी

