महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना : लेबर बजट वर्ष 2011-12 और वार्षिक कार्य योजना निर्माण पर संभाग स्तरीय कार्यशाला संपन्न
रायपुर 21 सितम्बर 2010
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत वर्ष 2011-12 के लिए लेबर बजट और वार्षिक कार्य योजना निर्माण के संबंध मे सभी संभागों की संभागवार एक-एक दिवसीय कार्यशाला रायपुर के नजदीक निमोरा स्थित राज्य ग्रामीण विकास संस्थान में सम्पन्न हुई। कार्यशाला का आयोजन महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना राज्य प्रकोष्ठ और राज्य ग्रामीण विकास संस्थान द्वारा किया गया। प्रशिक्षण्ा में जिला और जनपद पंचायतों में ग्रामीण विकास विभाग, वन, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, जल संसाधन, कृषि विभाग के अधिकारियों सहित महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के परियोजना अधिकारी और तकनीक सहायक शामिल हुए। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना की अपर आयुक्त सुश्री शहला निगार, राज्य ग्रामीण विकास संस्थान के संचालक डॉ.आर.के.सिंह, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के मुख्य अभियंता श्री एम.एल.हल्दकार, वन विभाग के मुख्य वन संरक्षक श्री के.सी. बेवर्ता, अतिरिक्त वन मंडलाधिकारी श्री आलोक तिवारी ने योजना के लेबर बजट और वार्षिक कार्ययोजना तैयार करने के तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी।
कार्यशाला में प्रशिक्षणार्थियों को बताया गया कि यह योजना मांग आधारित है। योजना में लेबर बजट के आधार पर ही धनराशि आबंटित की जाती है। तकनीकी प्राक्कलन और मांग के आधार पर जिलों का लेबर बजट तैयार किया जाता है। लेबर बजट ग्रामवार बनाया जाता है और इसका अनुमोदन ग्राम सभा से कराया जाना जरूरी है। योजना में लक्ष्य निर्धारित नहीं है, लेकिन जिलों द्वारा स्वंय वार्षिक लक्ष्य निर्धारित किया जाता है। बेहतर लेबर बजट वही होगा जिसमें माहवार कार्य की मांग करने वाले परिवारों और उनके द्वारा अर्जित होने वाले मानव दिवस का आंकलन हो सके। इसके आधार पर अनुमानित होने वाले वित्तीय व्यय का लेखा-जोखा तैयार किया जाता है। अधिकारियों से कहा गया कि कार्ययोजना तैयारी में समय-सीमा का ध्यान रखा जाए। लेबर बजट तैयार करते समय 60 प्रतिशत मजदूरी और 40 प्रतिशत सामग्री व्यय के अनुपात का ध्यान रखे। कोशिश की जाए कि कार्यो की प्रकृति और समय पर ध्यान देते हुए योजना के तहत पंजीकृत परिवारों को मांग के आधार पर वर्ष में 100 दिवस का रोजगार उपलब्ध कराया जा सके। ऐसे गांवों पर विशेष ध्यान दिया जाए जहां स्वीकृत कार्यो की संख्या और लोगों को कम रोजगार मिला है। कार्ययोजना बनाते समय पूर्व की खामियों को दूर किया जाए तथा योजना के तहत सामाजिक अंकेक्षण में ग्रामीणों द्वारा ध्यान में लाए गए बिन्दुओं को शामिल किया जाए।
कार्यशाला में प्रशिक्षणार्थियों को बताया गया कि यह योजना मांग आधारित है। योजना में लेबर बजट के आधार पर ही धनराशि आबंटित की जाती है। तकनीकी प्राक्कलन और मांग के आधार पर जिलों का लेबर बजट तैयार किया जाता है। लेबर बजट ग्रामवार बनाया जाता है और इसका अनुमोदन ग्राम सभा से कराया जाना जरूरी है। योजना में लक्ष्य निर्धारित नहीं है, लेकिन जिलों द्वारा स्वंय वार्षिक लक्ष्य निर्धारित किया जाता है। बेहतर लेबर बजट वही होगा जिसमें माहवार कार्य की मांग करने वाले परिवारों और उनके द्वारा अर्जित होने वाले मानव दिवस का आंकलन हो सके। इसके आधार पर अनुमानित होने वाले वित्तीय व्यय का लेखा-जोखा तैयार किया जाता है। अधिकारियों से कहा गया कि कार्ययोजना तैयारी में समय-सीमा का ध्यान रखा जाए। लेबर बजट तैयार करते समय 60 प्रतिशत मजदूरी और 40 प्रतिशत सामग्री व्यय के अनुपात का ध्यान रखे। कोशिश की जाए कि कार्यो की प्रकृति और समय पर ध्यान देते हुए योजना के तहत पंजीकृत परिवारों को मांग के आधार पर वर्ष में 100 दिवस का रोजगार उपलब्ध कराया जा सके। ऐसे गांवों पर विशेष ध्यान दिया जाए जहां स्वीकृत कार्यो की संख्या और लोगों को कम रोजगार मिला है। कार्ययोजना बनाते समय पूर्व की खामियों को दूर किया जाए तथा योजना के तहत सामाजिक अंकेक्षण में ग्रामीणों द्वारा ध्यान में लाए गए बिन्दुओं को शामिल किया जाए।
क्रमांक-2954/चतुर्वेदी

