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छत्तीसगढ़ में हर गांव की बनेंगी विभागवार कार्य योजना

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When Apr 19, 2011
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कार्य योजना तैयार करने ग्राम सभा में होगी चर्चा

        रायपुर 19 अप्रैल, 2011

छत्तीसगढ़ में हर गांव की विभागवार कार्य योजना तैयार की जाएंगी। ग्राम और ग्राम पंचायत स्तर पर वर्ष 2011-12 की विभागवार कार्य योजना बनाने के लिए ग्राम सभा में चर्चा की जाएगी। कार्य योजना तैयार करने के लिए संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारी नियुक्त किए जाएंगे। जिला स्तर पर एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा जो वार्षिक कार्य योजना की तैयार कराने की निगरानी करेंगा। विभागवार कार्य योजना में शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन, उद्यानिकी, महिला एवं बाल विकास, समाज कल्याण एवं अन्य ग्रामीण विकास की योजनाएं शामिल की जाएगी। पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग द्वारा इस संबंध में यहां मंत्रालय से सभी जिला कलेक्टरों और जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को परिपत्र जारी कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करते हुए प्रगति से विभाग को अवगत कराने कहा गया है।
        परिपत्र में कहा गया है कि ग्राम सभा के सदस्यों द्वारा योजना के निर्धारण एवं क्रियान्वयन में ग्रामीणों/ग्राम सभा के सदस्यो की सहभागिता महत्वपूर्ण है। वार्षिक कार्य योजना तैयार करने का उद्देश्य ग्रामीणों को योजनाओं से परिचित कराना है, तथा व्यक्ति के सर्वागीण विकास के लिए उन्हें प्रेरित और प्रोत्साहित कर लक्षित परिणाम प्राप्त करना है। परिपत्र में कहा गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के मुख्य कार्यक्रम जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन, उद्यानिकी, महिला एवं बाल विकास, समाज कल्याण एवं अन्य ग्रामीण विकास की योजनाएं ग्राम सभा/ग्राम पंचायत द्वारा बनाई जाती है तो निश्चित अपेक्षित परिणाम प्राप्त होगा। इसे क्रियान्वित करने के लिए विभागवार वार्षिक कार्य योजना वर्ष 2011-12 के लिए पत्रक का प्रारूप भी भेजा गया है। परिपत्र में बताया गया है कि कार्यक्रमों की वार्षिक कार्य योजना ग्राम सभा में चर्चा के बाद तैयार किया जाना है। तैयार की गई वार्षिक कार्य योजना वर्ष 2011-12 के वार्षिक भौतिक लक्ष्य एवं उपलब्धि की प्रत्येक ग्राम सभा में नियमित समीक्षा की जाएगी।
        परिपत्र में कहा गया है कि चिन्हांकित विभागों की वार्षिक योजना तैयार करने के लिए ग्राम, ग्राम पंचायत और ग्राम सभा स्तर पर ग्राम कलस्टर, संकुल या खण्ड स्तर पर कलेक्टर, जिले के विभागीय अधिकारियों से चर्चा कर जिम्मेदारी सौंपी जाए। शिक्षा विभाग के लिए प्रधान पाठक (प्राथमिक माध्यमिक विद्यालय), स्वास्थ्य विभाग के लिए मितानित और स्वास्थ्य कार्यकर्ता, कृषि विभाग के लिए ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, पशुपालन विभाग के लिए सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी, मत्स्य विभाग के लिए मत्स्य निरीक्षक, महिला एवं बाल विकास के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और पर्यवेक्षक, समाज कल्याण विभाग के लिए ग्राम पंचायत सचिव, सहायक आंतरिक लेखा परीक्षण्ा एवं करारोपण अधिकारी, वरिष्ठ सहायक आंतरिक लेखा परीक्षण एवं करारोपण अधिकारी और पंचायत एवं समाज शिक्षा संगठक, ग्रामीण विकास विभाग के लिए ग्राम पंचायत सचिव, सहायक आंतरिक लेखा परीक्षण एवं करारोपण अधिकारी, वरिष्ठ सहायक आंतरिक लेखा परीक्षण एवं करारोपण अधिकारी तथा पंचायत एवं समाज शिक्षा संगठक को जिम्मेदारी सौंपी जाए।
        परिपत्र में बताया गया है कि छत्तीसगढ़ पंचायती राज अधिनियम 1993 की धारा 6 में ग्राम सभा सम्मिलन का प्रावधान है। इसके पालन में शासन स्तर से वर्ष में कम से कम छह ग्राम सभा आयोजित करने के निर्देश दिए है। ग्राम सभा के सदस्यों की कुल संख्या के एक तिहाई से अधिक सदस्यों द्वारा लिखित में अपेक्षा किए जाने पर या जनपद पंचायत, जिला पंचायत या कलेक्टर द्वारा अपेक्षा की जाने पर ही ग्राम सभा का सम्मिलन अपेक्षा की जाने या ऐसी अपेक्षा की जाने से 30 दिन के भीतर किया जाना है। अधिनियम की धारा 6 उपधारा 2 के खण्ड के द्वितीय परन्तुक में वार्षिक कार्य योजना हितग्राहियों के चयन, वार्षिक बजट, लेखा संपरीक्षा, प्रतिवेदन एवं वार्षिक लेखा तथा प्रशासनिक रिपोर्ट के बारे में गणपूर्ति होन पर ही संकल्प पारित किए जाने का प्रावधान है। अधिनियम की धारा 7 के तहत ग्राम सभा की शक्तियां और कृत्य तथा उसका वार्षिक सम्मिलन किए जाने के संबंध में उपबंध है। परिपत्र में इस उपबंध में किए गए प्रमुख प्रावधानों की ध्यान देने कहा गया हैं। इनमें ग्राम के आर्थिक विकास तथा ऐसी नियमों की पहचान एवं उनकी प्राथमिकता के लिए सिंध्दातों को अधिकथत करना। सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए ऐसी योजनाएं जिसमें समस्त वार्षिक योजना, सम्मिलित कार्यक्रमों तथा परियोजनाओं का ग्राम पंचायत द्वारा ऐसी योजनाओं, कार्यक्रमों तथा परियोजनाओं का क्रियान्वयन आरंभ करने पूर्व अनुमोदित करना। गरीबी उन्मूलन तथा अन्य कार्यक्रमों के अधीन हितग्राहियों के रूप में व्यक्तियों की पहचान और चयन करना शामिल है। परिपत्र में इन प्रावधानों का उदाहरण देते हुए अधिनियम की धारा में अन्य विभिन्न मुद्दों का भी उल्लेख किया गया है। इस संबंध में परिपत्र में बताया गया है कि विकास निरन्तर चलने वाली प्रक्रिया एवं गतिविधि हैं और उसका अन्तिम परिणाम व्यक्ति अथवा समाज के स्वयं के बारे में निर्णय ले सकने की क्षमता का विकास है। ऐसी स्थिति में जिनका विकास होना है, उनकी सक्रिय पहल, प्रयास एवं सहभागिता के बिना संभव नहीं है। वर्तमान में यह अवधारणा है कि, विभागीय शासकीय सेवक ही शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि आदि का विकास कर लेंगे, यह सही नहीं है। ये इन कार्यो में सहयोग एवं सहायता दे सकते है परन्तु विकास तो स्वयं की पहल एवं इच्छा पर निर्भर रहेगा।
        परिपत्र में कहा गया है कि ग्राम पंचायत/ग्राम सभावार कार्य योजना बनाने का कार्य वृहद स्वरूप का है। इसके लिए जिला स्तर पर एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जाए, जो इस संबंध में वार्षिक कार्ययोजना तैयार कराने के लिए निगरानी रखेंगे। कार्य योजना बनाने के लिए समय-सारणी तैयार कर ली जाए ताकि पूरे जिले की कार्य योजना आवश्यकतानुसार समयावधि में पूर्ण हो जाएं इस कार्य के लिए वेशष ग्राम सभा का आयोजन किया जा सकता है। योजना की अवधि वित्तीय वर्ष के लिए तैयार की जाए, अर्थात मार्च-अप्रैल का तैयार/अनुमोदन पूर्ण हो जाए। कार्य योजना तैयार करते समय नामांकित अधिकारी-कर्मचारी द्वारा ग्राम सभा में चर्चा कर तैयार करायी जाए।

क्रमांक-314/चतुर्वेदी



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