छत्तीसगढ़ में ई-पंचायत के लिए 314 करोड़ रूपए की कार्य-योजना प्रस्तावित
ग्राम पंचायत से राज्य स्तर तक मॉडल अंकेक्षण प्रणाली से जुड़ेगी पंचायतें
रायपुर 19 नवम्बर 2010
छत्तीसगढ़ की नौ हजार 734 ग्राम पंचायतों, 146 जनपद पंचायतों और 16 जिला पंचायतों को ई-पंचायत योजना के तहत अंकेक्षण व्यवस्था को सुदृढ़ और पारदर्शी बनाने के लिए कम्प्यूटरीकृत किया जाएगा। प्रदेश की सभी पंचायतों को चरणबध्द तरीके से आधुनिक सूचना संचार प्रणाली से जोड़ा जाएगा। इससे ग्राम पंचायत स्तर से लेकर राज्य स्तर तक पंचायतों में संचालित योजनाओं की जानकारी ऑन लाईन हो जाएगी। पंचायतों में मॉडल अंकेक्षण प्रणाली शुरू होने से विभन्न योजनाओं के आय-व्यय के सभी व्यौरे आसानी से दर्ज हो सकेंगे। केन्द्रीय पंचायत राज मंत्रालय के सचिव श्री ए.एन.पी. सिन्हा, छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव श्री पी.जॉय. उम्मेन की उपस्थित में यहां मंत्रालय में आयोजित बैठक में केन्द्रीय पंचायत राज मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री डी.के. जैन ने ऑन लाइन प्रिया साफ्टवेयर के माध्यम से इसकी विस्तार से जानकारी दी।
संयुक्त सचिव श्री डी.के. जैन ने बताया कि पंचायतों की अंकेक्षण व्यवस्था को सरल बनाने के लिए पंचायत राज मंत्रालय ने पंचायती राज इस्टीटयूशन एकाउटिंग (प्रिया) साफ्टवेयर तैयार किया है। भारत सरकार द्वारा कराए गए अध्ययन के बाद छत्तीसगढ़ में पंचायतों की कम्प्यूटीकृत अंकेक्षण व्यवस्था के लिए 314 करोड़ 23 लाख रूपए की कार्य-योजना प्रस्तावित की गयी है। इस राशि में 90 प्रतिशत केन्द्र और 10 प्रतिशत राज्य द्वारा वहन किया जाएगा। उन्होंने पंचायतों की ई-गवर्नेंस योजना की जानकारी देते हुए बताया कि आगामी तीन वर्षो में पंचायती राज संस्थाओं को कम्प्यूटरीकृत करने की योजना है। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिकों को विभिन्न प्रकार के आवश्यक प्रमाण-पत्र के साथ कृषि, उद्यानिकी, विभिन्न पेंशन योजनाओं, जॉब कार्ड, सूचना के अधिकार आदि की सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी है। उन्होंने बताया कि पंचायतों की अंकेक्षण व्यवस्था को सरल बनाने के लिए पंचायत राज मंत्रालय ने पंचायती राज इस्टीटयूशन एकाउटिंग साफ्टवेयर तैयार किया है। इसका उपयोग देश के अन्य राज्यों में किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ई-पंचायत योजना के तहत केन्द्र द्वारा पंचायतों के कम्प्यूटरीकण और इंटरनेट सेवा के लिए उपकरणों की व्यवस्था के लिए आर्थिक सहायता और प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर उपलब्ध कराए जाएंगे। तीन साल तक इन उपकरणों के संधारण और सेवाओं की जवाबदारी संबंधित कार्य एजेंसी की होगी। श्री जैन ने बताया कि प्रिया साफ्टवेयर को तैयार करने में नियंत्रक महालेखा परीक्षक के सुझावों को भी शामिल किया गया है। इसके उपयोग से पंचायतों में अंकेक्षण व्यवस्था में विभिन्न प्रकार की योजनाओं के लिए एक ही पंजी बनाई गई है। किसी भी योजना के आय-व्यय का ब्यौरा योजनावार एक ही पंजी में दर्ज करने के बाद यह पंचायतों में संधारित करने वाली विभिन्न पंजियों में भी प्रदर्शित होगा। पंचायतों के लेखा अधिकारियों को आय-व्यय का ब्यौरा अलग-अलग पंजियों में बार-बार दर्ज करने की जरूरत नहीं होगी, जिससे समय की बचत होगी। साफ्टवेयर में आय-व्यय के ब्यौरे को सुधारने की भी गुजांइश है। इसका प्रिंट भी लिया जा सकता है। इसके उपयोग से पंचायतों को आडिट में भी सुविधा होगी।
राज्य सरकार के अपर मुख्य सचिव श्री सरजियस मिंज ने बैठक में बताया कि छत्तीसगढ़ में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, पिछड़ा क्षेत्र अनुदान कोष आदि योजनाओं की जानकारी प्रशिक्षित कर्मचारियों द्वारा दर्ज की जा रही है। उन्होंने कहा कि पंचायतों की कम्प्यूटरीकृत अंकेक्षण व्यवस्था के लिए नव-नियुक्त पंचायत सचिवों को प्रशिक्षित किया जाएगा। बैठक में प्रमुख सचिव राजस्व श्री सुनील कुजूर, सचिव जल संसाधन श्री सी.के. खेतान, सचिव खनिज श्री एस.के. बेहार, संयुक्त सचिव केन्द्रीय पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्रालय श्री डी.के. जैन, सुश्री रश्मि शुक्ला, आई.जी. श्री संजय पिल्ले, प्रबंध संचालक राज्य लघु वनोपज संघ श्री ए.के. सिंह तथा विभिन्न जिलों के कलेक्टरों सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।

