दोना निर्माण से हो रही है रोज एक हजार रूपए की कमाई : महिलाएं चला रही हैं कुटीर उद्योग
रायपुर, 04 दिसम्बर 2011

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के ग्राम अमलेश्वर में ज्योति महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं माहुल पत्ते से दोना बनाकर अपने घर परिवार के लिए प्रतिदिन लगभग एक सौ रूपए की अतिरिक्त आमदनी प्राप्त कर रही हैं। इस स्व-सहायता समूह में ग्यारह सदस्य हैं। समूह को दोना निर्माण से रोज लगभग एक हजार रूपए की अतिरिक्त कमाई हो रही है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री विवेक ढांड ने कल ग्राम अमलेश्वर में इस महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं से मुलाकात की और उनके दोना निर्माण उद्योग का अवलोकन किया। उन्होंने महिलाओं की मेहनत, लगन और उनके कार्य की गुणवत्ता की प्रशंसा की। महिला समूह के अध्यक्ष श्रीमती सुभद्रा पठारी ने उन्हें बताया कि इस कुटीर उद्योग के लिए उनके समूह को स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना के तहत राज्य शासन द्वारा तीन लाख रूपए की सहायता दी गयी है। जनपद पंचायत पाटन के सलाह पर इस राशि से दोना बनाने की मशीन खरीदकर छह महीने पहले कार्य शुरू किया गया है। दोना निर्माण के लिए कच्चा माल रायपुर से लाया जाता है और निर्मित दोने की बिक्री शासन द्वारा अनुबंधित कम्पनी में की जा रही है। इससे उनके समूह को प्रतिदिन लगभग एक हजार रूपए की अतिरिक्त आमदनी हो रही है। महिलाओं ने प्रमुख सचिव को दोना निर्माण उद्योग सुव्यवस्थित रूप से चलाने के लिए एक भवन की जरूरत बतायी। श्री ढांड ने जनपद पंचायत पाटन के मुख्य कार्यपालन के अधिकारी को इसके लिए प्रस्ताव बनाने के निर्देश दिए। इसके बाद श्री ढांड ने सांकरा धान खरीदी केन्द्र का निरीक्षण किया। वहां की सरपंच श्रीमती कुसुम सिंगार ने उनके पंचायत में हो रहे निर्माण कार्यो की जानकारी दी। श्री ढांड ने भ्रमण के दौरान ग्राम जामगांव में स्थापित धान खरीदी केन्द्र का निरीक्षण किया और इससे जुड़े अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।

