इंदिरा आवास योजना : छत्तीसगढ़ में अब तक तेरह हजार गरीब परिवारों के लिए हुआ मकानों का निर्माण
लगभग 82.63 करोड़ रूपए खर्च किए गए
रायपुर, 07 दिसम्बर 2011
इंदिरा आवास योजना के तहत छत्तीसगढ़ में चालू वित्तीय वर्ष 2011-12 में अक्टूबर माह तक ग्रामीण क्षेत्रों में तेरह हजार से अधिक आवास विहीन गरीबों के लिए मकानों का निर्माण पूर्ण कर लिया गया है, जिन पर लगभग 82 करोड़ 63 लाख रूपए खर्च किए गए हैं। राज्य शासन के पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग द्वारा ग्राम पंचायतों के माध्यम से संचालित इस योजना के तहत पूर्ण हो चुके मकानों में अनुसूचित जनजाति के हितग्राहियों के लिए पांच हजार 790 आवास, अनुसूचित जाति के हितग्राहियों के लिए दो हजार 693 मकान और अन्य वर्गों के लिए चार हजार 740 मकान शामिल हैं। इंदिरा आवास केन्द्र प्रवर्तित योजना है, इसमें भारत सरकार द्वारा 75 प्रतिशत और राज्य सरकार द्वारा 25 प्रतिशत राशि उपलब्ध करायी जाती है।
राज्य शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि इस योजना के तहत चालू वित्तीय वर्ष में उपलब्ध 131 करोड़ 26 लाख रूपए के विरूध्द माह अक्टूबर तक 82 करोड़ 63 लाख रूपए की लागत से प्रदेश में 13 हजार 223 इंदिरा आवासों का निर्माण पूर्ण किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि सरगुजा जिले में 12 करोड़ 40 लाख 33 लाख रूपए की लागत से दो हजार 356 आवास और बिलासपुर जिले में आठ करोड़ 64 लाख 56 हजार रूपए की लागत से 873 आवासों का निर्माण पूर्ण किया जा चुका है। रायपुर जिले में दो करोड़ 58 लाख रूपए की लागत से एक हजार 150 आवास, राजनांदगांव जिले में पांच करोड़ 20 लाख 78 हजार रूपए की लागत से एक हजार 104 आवास, जांजगीर-चांपा जिले में पांच करोड़ 49 लाख 60 हजार रूपए की लागत से एक हजार 217 आवास और बस्तर जिले में पांच करोड़ 88 लाख 86 हजार रूपए की लागत से एक हजार 128 आवासों का निर्माण पूरा किया जा चुका है। इस योजना के तहत दुर्ग जिले में चार करोड़ 68 लाख रूपए की लागत से 197 आवास, दक्षिण बस्तर (दंतेवाड़ा) जिले में सात करोड़ 46 लाख 74 हजार रूपए की लागत से 716 आवास, धमतरी जिले में एक करोड़ 47 लाख 34 हजार रूपए की लागत से 121 आवास, जशपुर जिले में तीन करोड़ 70 लाख रूपए की लागत से 159 आवास, उत्तर बस्तर (कांकेर) जिले में दो करोड़ 83 लाख 68 हजार रूपए की लागत से 509 आवास, कबीरधाम जिले में एक करोड़ 87 लाख रूपए की लागत से 95 आवास, कोरबा जिले में दो करोड़ 85 लाख 25 हजार रूपए की लागत से 191 आवास, कोरिया जिले में तीन करोड़ 29 लाख 56 हजार रूपए की लागत से 241 आवास, महासमुंद जिले में चार करोड़ आठ लाख रूपए की लागत से 734 आवास, रायगढ़ जिले में छह करोड़ 39 लाख रूपए की लागत से दो हजार बीस आवास, बीजापरु जिले में तीन करोड़ 58 लाख 65 हजार रूपए की लागत से 333 आवासों और नारायणपुर जिले में 17 लाख 77 हजार रूपए की लागत से 79 आवासों का निर्माण पूर्ण किया जा चुका है।
राज्य शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि इस योजना के तहत चालू वित्तीय वर्ष में उपलब्ध 131 करोड़ 26 लाख रूपए के विरूध्द माह अक्टूबर तक 82 करोड़ 63 लाख रूपए की लागत से प्रदेश में 13 हजार 223 इंदिरा आवासों का निर्माण पूर्ण किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि सरगुजा जिले में 12 करोड़ 40 लाख 33 लाख रूपए की लागत से दो हजार 356 आवास और बिलासपुर जिले में आठ करोड़ 64 लाख 56 हजार रूपए की लागत से 873 आवासों का निर्माण पूर्ण किया जा चुका है। रायपुर जिले में दो करोड़ 58 लाख रूपए की लागत से एक हजार 150 आवास, राजनांदगांव जिले में पांच करोड़ 20 लाख 78 हजार रूपए की लागत से एक हजार 104 आवास, जांजगीर-चांपा जिले में पांच करोड़ 49 लाख 60 हजार रूपए की लागत से एक हजार 217 आवास और बस्तर जिले में पांच करोड़ 88 लाख 86 हजार रूपए की लागत से एक हजार 128 आवासों का निर्माण पूरा किया जा चुका है। इस योजना के तहत दुर्ग जिले में चार करोड़ 68 लाख रूपए की लागत से 197 आवास, दक्षिण बस्तर (दंतेवाड़ा) जिले में सात करोड़ 46 लाख 74 हजार रूपए की लागत से 716 आवास, धमतरी जिले में एक करोड़ 47 लाख 34 हजार रूपए की लागत से 121 आवास, जशपुर जिले में तीन करोड़ 70 लाख रूपए की लागत से 159 आवास, उत्तर बस्तर (कांकेर) जिले में दो करोड़ 83 लाख 68 हजार रूपए की लागत से 509 आवास, कबीरधाम जिले में एक करोड़ 87 लाख रूपए की लागत से 95 आवास, कोरबा जिले में दो करोड़ 85 लाख 25 हजार रूपए की लागत से 191 आवास, कोरिया जिले में तीन करोड़ 29 लाख 56 हजार रूपए की लागत से 241 आवास, महासमुंद जिले में चार करोड़ आठ लाख रूपए की लागत से 734 आवास, रायगढ़ जिले में छह करोड़ 39 लाख रूपए की लागत से दो हजार बीस आवास, बीजापरु जिले में तीन करोड़ 58 लाख 65 हजार रूपए की लागत से 333 आवासों और नारायणपुर जिले में 17 लाख 77 हजार रूपए की लागत से 79 आवासों का निर्माण पूर्ण किया जा चुका है।
क्रमांक-4015/काशी

