जलग्रहण क्षेत्र विकास कार्यक्रम : अब तक 4.42 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र उपचारित
नए सिंचित क्षेत्र में 44 हजार 275 हेक्टेयर की वृध्दि
छत्तीसगढ़ में इस साल दो लाख 42 हजार हेक्टेयर क्षेत्र उपचारित होगा
रायपुर, 03 अप्रैल 2011
जलग्रहण क्षेत्र विकास कार्यक्रम के तहत छत्तीसगढ़ में अब तक चार लाख 42 हजार 253 हेक्टेयर परियोजना क्षेत्र की जमीन को उपचारित किया जा चुका है और 44 हजार 275 हेक्टेयर नए सिंचित क्षेत्र की वृध्दि हुई है। एकीकृत जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन कार्यक्रम के तहत वित्तीय वर्ष 2011-12 के दौरान दो लाख 42 हजार हेक्टेयर क्षेत्र उपचारित करने का लक्ष्य है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए 290 करोड़ 40 लाख रूपए खर्च किए जाएंगे।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में जलग्रहण क्षेत्र विकास की परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए वर्ष 2009-10 में दो लाख 11 हजार 295 हेक्टेयर क्षेत्र को उपचारित करने 253 करोड़ 55 लाख रूपए की 41 नवीन परियोजनाएं एकीकृत जलग्रहण प्रबंधन कार्यक्रम के तहत स्वीकृति की गई थी। वर्ष 2010-11 में दो लाख 99 हजार 227 हेक्टेयर क्षेत्र के उपचार के लिए 359 करोड़ रूपए की लागत की नई परियोजनाओं को स्वीकृत प्रदान की गई। छत्तीसगढ़ में वर्ष 2011-12 के दौरान दो लाख 42 हजार हेक्टेयर क्षेत्र के उपचार के लिए 290 करोड़ 40 लाख रूपए की परियोजनाओं की स्वीकृति का लक्ष्य कार्य योजना अनुसार निर्धारित किया गया है।
जलग्रहण क्षेत्र वास्तव में जमीन सतह पर इस तरह का क्षेत्र होता है, जिसमें ढाल की विशिष्टता के कारण सम्पूर्ण क्षेत्र का वर्षा जल छोटे-छोटे नालियों, नालों एवं नदियों से प्रवाहित होता हुआ अंत में एक उभयनिष्ठ बिन्दु से बाहर निकलता है। इसकी सबसे छोटी इकाई माईक्रोवाटरशेड कहलाती है, जो लगभग 500 हेक्टेयर की होती है। मिली वाटरशेड में लगभग दस माइक्रोवाटरशेड होते है और उसका क्षेत्रफल औसतन पांच हजार हेक्टेयर होता है। जलग्रहण क्षेत्र विकास परियोजनाओं में सूखा उन्मूलन क्षेत्र कार्यक्रम एवं एकीकृत पड़त भूमि विकास कार्यक्रम के तहत छह हजार रूपए प्रति हेक्टेयर की दर से और एकीकृत जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन कार्यक्रम में 12 हजार रूपए प्रति हेक्टेयर की दर से धनराशि खर्च की जाती है।
राज्य में सूखा उन्मूलन क्षेत्र कार्यक्रम वर्ष 2000-01 से संचालित किया जा रहा है। राज्य के चयनित आठ जिलों के 29 विकासखण्डों में चार लाख 61 हजार 490 हेक्टेयर क्षेत्र के उपचार के लिए 227.70 करोड़ रूपए की लागत की 962 माइक्रोवाटरशेड परियोजनाएं संचालित की जा रही है। दिसम्बर 2010 तक इन परियोजनाओं के माध्यम से दो लाख 34 हजार 636 हेक्टयर भूमि उपचारित की गई है और नए सिंचित क्षेत्र में 22 हजार 538 हेक्टेयर की वृध्दि हुई है। एकीकृत पड़त भूमि विकास कार्यक्रम वर्ष 1995-96 से संचालित किया जा रहा है। राज्य के 14 जिलों में तीन लाख 84 हजार 333 हेक्टेयर क्षेत्र को उपचारित करने के लिए 228 करोड़ 38 लाख रूपए की लागत की 70 मिलीवाटरशेड परियोजनाएं संचालित की जा रही है। दिसम्बर 2010 तक इन परियोजनाओं के माध्यम से दो लाख सात हजार 617 हेक्टेयर भूमि उपचारित की जा चुकी है और 21 हजार 737 हेक्टेयर नए सिंचित क्षेत्र में वृध्दि हुई है। जलग्रहण प्रबंधन कार्यक्रम के तहत प्रथम चरण में विस्तृत कार्य योजना तैयार करने और आस्थामूलक के कार्य किए जा रहे है। दिसम्बर 2010 तक 13 करोड़ 48 लाख रूपए खर्च किए जा चुके है।

