एकीकृत कार्य योजना : अपर मुख्य सचिव श्री मिंज द्वारा वीडियो कान्फ्रेंसिंग से समीक्षा
जिला कलेक्टरों को अधिक से अधिक कार्य स्वीकृत करने के निर्देश
रायपुर 13 जनवरी 2011
अपर मुख्य सचिव पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग श्री सरजियस मिंज द्वारा मंत्रालय स्थित राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र में वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिला कलेक्टरों से चर्चा कर राज्य के दस जिलों - दक्षिण बस्तर (दंतेवाड़ा), उत्तर बस्तर (कांकेर), नारायणपुर, बीजापुर, बस्तर, राजनांदगांव, कबीरधाम, सरगुजा, कोरिया, जशपुर के लिए मंजूर एकीकृत कार्य योजना की प्रगति की समीक्षा की। प्रदेश के दस जिलों के लिए 250 करोड़ रूपए की यह कार्य योजना स्वीकृत की जा चुकी है। श्री मिंज ने जिला कलेक्टरों से कहा कि एकीकृत कार्य योजना के तहत प्रत्येक जिले को आबंटित 25 करोड़ रूपए की निधि से अधिक से अधिक कार्यो की प्रशासकीय स्वीकृति जारी की जाए, जिससे स्वीकृत कार्य पूर्ण हो इसका विशेष ध्यान रखा जाए। श्री मिंज ने कहा कि योजना के तहत ऐसे कार्य लिए जाए, जिससे ग्रामीणजनों को सीधे लाभ पहुंचता हो। जिले की उन ग्राम पंचायतों में प्राथमिकता से कार्य स्वीकृत किए जाए जो सुदूर सीमावर्ती क्षेत्र में है। उन्होंने माह मार्च 2011 तक प्राप्त आबंटन को व्यय किए जाने संबंधी कार्ययोजना अनुसार कार्यवाही करने के निर्देश भी दिए। वीडियो कान्फ्रेंसिग में संचालक पंचायत और समाज सेवा श्री आलोक अवस्थी भी उपस्थित थे।
श्री मिंज ने जिला कलेक्टरों से कहा कि जिन जिलों में कार्य स्वीकृत नहीं हुए हुए है वहां इसी माह की 14 तारीख तक कार्य स्वीकृत करें। सभी स्वीकृत कार्य तुरन्त ही शुरू किए जाएं। उन्होंने कहा कि योजना के तहत ऐसे कार्य लिए जाए, जिससे ग्रामीणजनों को सीधे लाभ पहुंचता हो। जिले की उन ग्राम पंचायतों में प्राथमिकता से कार्य स्वीकृत किए जाए जो सुदूर सीमावर्ती क्षेत्र में है। जिला कलेक्टरों द्वारा कार्य स्वीकृति के लिए पूछे गए प्रश्न के संबंध में अपर मुख्य सचिव द्वारा निर्देशित किया गया कि तात्कालिक महत्व के कार्यो की स्वीकृति के लिए योजना के तहत गठित समिति ही सक्षम है। उन्होंने जिला कलेक्टरों से कहा कि इस योजना में ऐसे कार्य ले जो जनता को सीधे लाभांवित कर सकें। योजना की मार्गदर्शिका अनुसार सुरक्षा को मजबूत करने की दृष्टि से कराए जाने वाले कार्यो को लिया जा सकता है। श्री मिंज ने कहा कि ऐसे कार्य स्वीकृत किए जाए, जिनमें विभागीय आबंटन की उपलब्धता नहीं है और जो विकास संबंधी अन्य आवश्यकताओं की नाजुक कडियों को जोड़ सकें। उन्होंने कहा कि गांवों को जोड़ने वाले मार्ग छोटे पुल-पुलियाओं का निर्माण प्राथमिकता से कराएं।
जिलों के कलेक्टरों द्वारा एकीकृत कार्य योजना के तहत उनके जिलों में स्वीकृत कार्यो और चल रहे कार्यो की प्रगति से अवगत कराया गया। समीक्षा में जानकारी दी गई कि उत्तर बस्तर (कांकेर), बीजापुर, सरगुजा, दक्षिण्ा बस्तर (दंतेवाड़ा), नारायणपुर, में योजना के तहत कार्यो की स्वीकृत आदेश जारी कर कार्य प्रारंभ करा दिए गए है। जिला कोरिया, जशपुर और बस्तर में कार्य स्वीकृत नहीं किए गए है। वहीं जिला सरगुजा, कबीरधाम में स्वीकृति के बाद कार्य प्रारंभ नहीं किए गए हैं। कलेक्टरों द्वारा जानकारी दी गई कि आबंटित राशि का आहरण जिलों में किया जा चुका है और आहरित राशि बैंक खाते में जमा करा दी गई है। जिला कलेक्टर दक्षिण्ा बस्तर (दंतेवाड़ा), जशपुर और सरगुजा को बैंक की शाखा का कोड नम्बर एवं सी.आई.एफ./आई.एफ.एस. नम्बर सूचित करने को कहा गया। श्री मिंज ने कलेक्टरों से चर्चा के दौरान कहा कि योजना के तहत कार्यो की स्वीकृतियां कम है उन्हें लक्ष्य के अनुरूप पूर्ण किया जाए। प्रभावित पिछड़े क्षेत्रों में कार्य स्वीकृति को प्राथमिकता दी जाए। श्री मिंज ने कहा कि योजना की प्रगति की जानकारी के लिए जिलों को प्रपत्र भेजे गए है। प्रपत्र में सेक्टरवार प्रगति की जानकारी 14 जनवरी 2011 तक संचालक पंचायत और समाज सेवा कार्यालय को भेजा जाए, जिससे आगामी 17 जनवरी को होने वाली वीडियो कान्फ्रेंसिंग में प्रगति से केन्द्र को अवगत कराया जा सके। सभी जिला कलेक्टरों को 17 जनवरी को आयोजित होने वाली वीडियो कान्फ्रेंसिंग के लिए अपने एन.आई.सी. केन्द्र में जिले की योजना की जानकारी सहित निर्धारित समय पर उपस्थित रहने को भी कहा गया।
श्री मिंज ने जिला कलेक्टरों से कहा कि जिन जिलों में कार्य स्वीकृत नहीं हुए हुए है वहां इसी माह की 14 तारीख तक कार्य स्वीकृत करें। सभी स्वीकृत कार्य तुरन्त ही शुरू किए जाएं। उन्होंने कहा कि योजना के तहत ऐसे कार्य लिए जाए, जिससे ग्रामीणजनों को सीधे लाभ पहुंचता हो। जिले की उन ग्राम पंचायतों में प्राथमिकता से कार्य स्वीकृत किए जाए जो सुदूर सीमावर्ती क्षेत्र में है। जिला कलेक्टरों द्वारा कार्य स्वीकृति के लिए पूछे गए प्रश्न के संबंध में अपर मुख्य सचिव द्वारा निर्देशित किया गया कि तात्कालिक महत्व के कार्यो की स्वीकृति के लिए योजना के तहत गठित समिति ही सक्षम है। उन्होंने जिला कलेक्टरों से कहा कि इस योजना में ऐसे कार्य ले जो जनता को सीधे लाभांवित कर सकें। योजना की मार्गदर्शिका अनुसार सुरक्षा को मजबूत करने की दृष्टि से कराए जाने वाले कार्यो को लिया जा सकता है। श्री मिंज ने कहा कि ऐसे कार्य स्वीकृत किए जाए, जिनमें विभागीय आबंटन की उपलब्धता नहीं है और जो विकास संबंधी अन्य आवश्यकताओं की नाजुक कडियों को जोड़ सकें। उन्होंने कहा कि गांवों को जोड़ने वाले मार्ग छोटे पुल-पुलियाओं का निर्माण प्राथमिकता से कराएं।
जिलों के कलेक्टरों द्वारा एकीकृत कार्य योजना के तहत उनके जिलों में स्वीकृत कार्यो और चल रहे कार्यो की प्रगति से अवगत कराया गया। समीक्षा में जानकारी दी गई कि उत्तर बस्तर (कांकेर), बीजापुर, सरगुजा, दक्षिण्ा बस्तर (दंतेवाड़ा), नारायणपुर, में योजना के तहत कार्यो की स्वीकृत आदेश जारी कर कार्य प्रारंभ करा दिए गए है। जिला कोरिया, जशपुर और बस्तर में कार्य स्वीकृत नहीं किए गए है। वहीं जिला सरगुजा, कबीरधाम में स्वीकृति के बाद कार्य प्रारंभ नहीं किए गए हैं। कलेक्टरों द्वारा जानकारी दी गई कि आबंटित राशि का आहरण जिलों में किया जा चुका है और आहरित राशि बैंक खाते में जमा करा दी गई है। जिला कलेक्टर दक्षिण्ा बस्तर (दंतेवाड़ा), जशपुर और सरगुजा को बैंक की शाखा का कोड नम्बर एवं सी.आई.एफ./आई.एफ.एस. नम्बर सूचित करने को कहा गया। श्री मिंज ने कलेक्टरों से चर्चा के दौरान कहा कि योजना के तहत कार्यो की स्वीकृतियां कम है उन्हें लक्ष्य के अनुरूप पूर्ण किया जाए। प्रभावित पिछड़े क्षेत्रों में कार्य स्वीकृति को प्राथमिकता दी जाए। श्री मिंज ने कहा कि योजना की प्रगति की जानकारी के लिए जिलों को प्रपत्र भेजे गए है। प्रपत्र में सेक्टरवार प्रगति की जानकारी 14 जनवरी 2011 तक संचालक पंचायत और समाज सेवा कार्यालय को भेजा जाए, जिससे आगामी 17 जनवरी को होने वाली वीडियो कान्फ्रेंसिंग में प्रगति से केन्द्र को अवगत कराया जा सके। सभी जिला कलेक्टरों को 17 जनवरी को आयोजित होने वाली वीडियो कान्फ्रेंसिंग के लिए अपने एन.आई.सी. केन्द्र में जिले की योजना की जानकारी सहित निर्धारित समय पर उपस्थित रहने को भी कहा गया।
क्रमांक-5693/चतुर्वेदी

