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महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना : कोई भी व्यक्ति कर सकता है लोकपाल से शिकायत

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When Apr 04, 2011
from 07:05 PM to 07:05 PM
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शिकायतों का निराकरण 45 दिनों में

रायपुर, 04 अप्रैल 2011

    महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के क्रियान्वयन में खामियों की शिकायतों की सुनवाई लोकपाल द्वारा की जाएगी। छत्तीसगढ़ में इस योजना के संबंध में शिकायतों की सुनवाई के लिए छह जिलों रायपुर, कोरबा, कोरिया, धमतरी, जशपुर और जांजगीर-चांपा में लोकपाल पदस्थ किए जा चुके हैं तथा अन्य जिलों में लोकपाल नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है। जिलों में लोकपाल को जिला पंचायत परिसर या कलेक्टोरेट परिसर में शिकायतों की सुनवाई के लिए कक्ष भी उपलब्ध कराए गए है। कोई भी व्यक्ति या उसके अधिकृत प्रतिनिधि कार्यालय दिवस और समय में इस योजना के संबंध में अपनी लिखित शिकायत लोकपाल के समक्ष नि:शुल्क दर्ज करा सकते हैं। लोकपाल शिकायत प्राप्त होने के बाद 45 दिनों में इसका निराकरण करेंगे। लोकपाल को प्राप्त शिकायत का प्रत्यक्ष निराकरण, अनुशासनात्मक और दंडात्मक कार्रवाई, दोषी पक्ष के खिलाफ पुलिस में प्राथमिकी रिर्पोट दर्ज कराने के अधिकार हैं। लोकपाल दोषी व्यक्तियों के विरूध्द उचित कानूनी कार्रवाई के लिए अपने निष्कर्षों का प्रतिवेदन राज्य के मुख्य सचिव और सचिव, राज्य नोडल विभाग को भेजेंगे। 
    पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून के अंतर्गत लोकपाल के समक्ष शिकायतों के निवारण के लिए प्रक्रिया निर्धारित की गई है, जिसके आधार पर शिकायत दर्ज की जाएगी। लोकपाल से एक या एक से अधिक विषयों में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के क्रियान्वयन में खामियों की शिकायत की जा सकती है। शिकायत के लिए 21 बिन्दु निर्धारित किए गए हैं।  इनमें ग्राम सभा, परिवारों का पंजीकरण और जॉब कार्ड जारी करना, जॉब कार्ड की अभिरक्षा, रोजगार के लिए कार्य की मांग, कार्य की मांग का आवेदन प्रस्तुत करने के संबंध में उसके दिनांक की पावती रसीद जारी करना, मजदूरी भुगतान, बेरोजगारी भत्ता का भुगतान, लिंग के आधार पर भेदभाव, कार्यस्थल पर सुविधाएं, कार्य की माप, कार्य की गुणवत्ता, मशीनों का उपयोग, ठेकेदारों को निर्माण कार्य में लगाना, बैंक या डाकघरों में खातों का संचालन, शिकायतों का पंजीकरण और निपटारा, मस्टर रोल का सत्यापन, दस्तावेजों का सत्यापन, धनराशि का उपयोग, धनराशि का आबंटन, सामाजिक अंकेक्षण, रिकॉर्ड के रख-रखाव के सबंध में संबंधित अधिकारी-कर्मचारी के विरूध्द शिकायत दर्ज कराई जा सकेगी। इसके अलावा राज्य नोडल विभाग किसी अन्य आधार को शामिल कर सकता है, जिसकी बुनियाद पर लोकपाल के यहां शिकायत दर्ज की जा सकती है।
    महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून के अंतर्गत लोकपाल के पास शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया भी निर्धारित की गई है। जिसके अनुसार कोई भी व्यक्ति जिसे महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना से संबंधित अधिकारी-कर्मचारी के विरूध्द शिकायत है, स्वयं या अपने अधिकृत प्रतिनिधि द्वारा लोकापाल को अथवा उसके उच्चाधिकारियों को लिखित शिकायत कर सकता है। शिकायत विधिवत शिकायतकर्ता अथवा उसके अधिकृत प्रतिनिधि, यदि को हो, द्वारा हस्ताक्षरित होनी चाहिए और उसमें शिकायतकर्ता का पूरा नाम, पता (पत्र व्यवहार के लिए), टेलीफोन या मोबाईल नंबर व ई-मेल पते का स्पष्ट रूप से उल्लेख होना चाहिए। जिसके विरूध्द शिकायत की जाए उसके कार्यालय अथवा विभाग के अधिकारी का नाम, पता का भी उल्लेख किया जाए। शिकायत के तथ्य और उनसे संबंधित दस्तावेज भी दिए जा सकते है। शिकायतकर्ता आवेदन में उसे हुई परेशानी या हानि की प्रकृति व सीमा और लोकपाल से मांगी गई राहत का उल्लेख भी कर सकता है। इलेक्ट्रॉनिक्स माध्यम से की गई शिकायत भी लोकपाल द्वारा स्वीकार की जाएगी। ऐसी शिकायत के प्रिंट-आउट लेकर रिकॉर्ड में रखा जाएगा। लोकपाल द्वारा शिकायत पर कार्रवाई के लिए कदम उठाने से पूर्व, इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से की गई शिकायत के प्रिंट-आउट पर शिकायतकर्ता को जल्द से जल्द हस्ताक्षर करने होंगे। हस्ताक्षर किए गए प्रिंट-आउट को शिकायत माना जाएगा उसके पंजीयन की तिथि वही मानी जाएगी, जिस तिथि को इलेक्ट्रानिक माध्यम से शिकायत की गई थी। लोकपाल के स्तर पर ऐसी शिकायत नहीं रहनी चाहिए, जिसके विषय में पूर्व में लोकपाल कार्यालय द्वारा निराकरण की कार्रवाई की जा चुकी है। चाहे वह शिकायत उसी शिकायतकर्ता से प्राप्त हुई हो या नहीं अथवा किसी एक या अधिक शिकायतकर्ता या किसी एक या अधिक पक्षों (पार्टियों) द्वारा उसी विषय-वस्तु पर की गई हो। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में लोकपाल को ऐसे किसी भी मुद्दे में शिकायत नहीं की जा सकेगी जिसके संबंध में अपील, संशोधन, संदर्भ अथवा रिट याचिका किसी ट्रिब्यूनल या न्यायालय में विचाराधीन हो।

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