बंजर जमीन में फैली हरियाली : नाला-बंधान से पांच गांवों के सात सौ एकड़ खेतों में हो रही सिंचाई
एकीकृत पड़त भूमि विकास कार्यक्रम
रायपुर, 31 जनवरी 2011
छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले के विकासखण्ड सिमगा के तेरह गांवों की बंजर भूमि ग्रामीणों की मेहनत से लहलहाने लगी है। राज्य सरकार द्वारा जलग्रहण क्षेत्र विकास प्रबंधन कार्यक्रम के तहत यहां
बारिश के जल को संग्रहित करने के लिए कराए गए विभिन्न कार्यो से तीन हजार 800 हेक्टेयर बंजर भूमि पर अब हरियाली छा गई है और वहां का भूमिगत जल स्तर भी बढ़ा है।
युगों-युगों से कहावत है कि यदि पानी अच्छा बरसेगा तो फसल भी अच्छी होगी जिससे बाजार में पैसा आएगा और चारों ओर खुशहाली होगी, किन्तु पानी का बरसना मानव के हाथ में नहीं है, लेकिन जब पानी बरसता है तब उसे भविष्य के लिए संग्रहित कर इस्तेमाल करना हमारे हाथ में है। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा बारिश के पानी को संग्रहित कर उसका ज्यादा से ज्यादा उपयोग भूमि को उपजाऊ बनाने के उद्देश्य से रायपुर जिले के वृष्टि छाया वाले सिमगा विकास खण्ड के 13 गावों में एकीकृत पड़त भूमि विकास कार्यक्रम वर्ष 2007 में शुरू किया गया। चार वर्षो में यहां 225 लाख रूपए खर्च कर 25 नए तालाबों का निर्माण, 11 पुराने तालाबों की मरम्मत, 26 स्लुजगेट का सिस्टम, 31 नाला-बंधान और 20 टार नाली का निर्माण कर बरसात में व्यर्थ बहने वाले पानी को रोकने के प्रयास किए गए है।
सिमगा में 45 किलोमीटर लम्बाई के खल्लारी नाले को जो जलग्रहण क्षेत्र में लगभग 15 किलोमीटर लम्बाई में बहता है वहां एकीकृत पड़त भूमि विकास कार्यक्रम के तहत पांच गांवों में श्रृंखलाबध्द नाला-बंधान का कार्य किया गया और रूके पानी को पम्प द्वारा लिफ्ट कर लगभग 700 एकड़ कृषि भूमि में सिंचाई की जा रही है। ग्राम पड़कीडीह के ग्रामीणों ने बताया कि पहले गांव में एक भी तालाब नहीं था। ग्रामवासियों और पशुओं की निस्तारी, पेयजल का एकमात्र स्त्रोत गांव के पास से बहने वाला नाला था। एकीकृत पड़त भूमि विकास कार्यक्रम के तहत यहां 45 मीटर लम्बा नाला बांधकर उसके उपरी स्थल का गहरीकरण किया गया। अब नाले का जल स्तर बढ़ा गया है, वहां पांच फीट तक पानी जमा होने लगा और ग्रामवासियों की निस्तारी और पशुओं की पेयजल समस्या दूर हो गई।
ग्रामीणों ने बताया कि पहले खेतों में फसलों की सिंचाई के लिए पानी तालाब का मेड़ काट कर ले जाया जाता था, जिससे पानी की बरबादी के साथ -साथ मेड़ भी कमजोर हो रही थी। इन तालाबों पर पक्का स्लुजगेट सिस्टम लगा कर वहां के किसानों का उपयोगकर्ता दल गठित किया गया। अब किसान आवश्यकता अनुसार सिंचाई के लिए पानी ले रहे है और पानी की बरबादी रूक रही है। परियोजना क्षेत्र के गांवों में जल और भूमि संरक्षण के साथ 40 ग्रामीणों को छोटे-छोटे व्यवसाय जैसे- किराना दुकान, सब्जी बेचने, पानी ठेला, सायकल मरम्मत दुकान इत्यादि कार्यो के लिए 04 लाख 20 हजार रूपए का ऋण दिया गया है। सभी अपना व्यवसाय स्थापित कर लिया है और उनकी आर्थिक स्थिति भी सुधर रही है। अब तक एक लाख 20 हजार रूपए वापस भी कर चुके है।

