बीजापुर-नारायणपुर जिलों में मजदूरी भुगतान शिविरों के जरिए होगा
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना
बैंको-डाकघरों से मजदूरी भुगतान की अनिवार्यता छह माह के लिए शिथिल
दंतेवाड़ा की 115 ग्राम पंचायतों में भी भुगतान शिविरों के माध्यम से होगा
पारदर्शिता के लिए होगी वीडियोग्राफी
रायपुर, 03 मार्च 2011
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत छत्तीसगढ़ के बीजापुर और नारायणपुर जिलों में मजदूरी भुगतान बैंकों और डाकघरों से किए जाने की अनिवार्यता केन्द्र सरकार द्वारा छह महीने के लिए शिथिल कर दी गयी है। दक्षिण बस्तर (दंतेवाड़ा) जिले की 115 ग्राम पंचायतों में भी इसकी अनिवार्यता को केन्द्र सरकार ने छह महीने के लिए शिथिल कर दिया है। अब इन जिलों और ग्राम पंचायतों में अगले छह महीने तक मजदूरी भुगतान विकल्प तौर पर शिविरों के माध्यम से होगा और पारदर्शिता की दृष्टि से इसकी वीडियोग्राफी भी करायी जाएगी। भुगतान शिविर तहसीलदार अथवा उससे ऊपर की श्रेणी के राजस्व अधिकारी की देख-रेख में आम जनता को सूचित करने के बाद सरपंच और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में किया जाएगा।
यह जानकारी यहां पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग के विकास आयुक्त कार्यालय से संबंधित जिला कलेक्टरों को भेजे गए परिपत्र में दी गयी है। परिपत्र में केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के निदेशक, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना से प्राप्त पत्रों का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि इन जिलों और ग्राम पंचायतों में संस्थागत भुगतान में आ रही समस्याओं और कठिनाईयों को ध्यान में रखकर बैंकों और डाकघरों से मजदूरी भुगतान की बाध्यता को अस्थायी तौर पर केवल छह महीने के लिए अपवाद स्वरूप शिथिल किया गया है। यह छूट महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के प्रावधानों के तहत दी गयी है। परिपत्र में कहा गया है कि मजदूरी भुगतान बैंक अथवा डाकघर के खातों के माध्यम से करने के समुचित प्रयास किए जाएं और संस्थागत भुगतान की संभावनाओं से भी विभाग को नियमित रूप से अवगत कराया जाए। बैंकों अथवा डाकघरों के माध्यम से मजदूरी भुगतान न किए जाने की स्थिति में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए भुगतान प्रक्रिया की वीडियाग्राफी अनिवार्य रूप से करायी जाए और इस वीडियोग्राफी की सी.डी. राज्य कार्यालय को उपलब्ध करायी जाए। भुगतान के लिए शिविरों का आयोजन राजस्व अधिकारी (जो तहसीलदार श्रेणी से कम का न हो) की देख-रेख में और सरपंच तथा अन्य प्रतिनिधियों के सामने आम सूचना के बाद किया जाए।

