तेरहवें वित्त आयोग से प्राप्त राशि के उपयोग के संबंध में दिशा-निर्देश
अनुसूचित क्षेत्रों की ग्राम पंचायतों को मिलेगा विशेष क्षेत्र आधार अनुदान
रायपुर, 06 मार्च 2011
तेरहवें वित्त आयोग की अनुशंसा के अनुरूप छत्तीसगढ़ में त्रिस्तरीय पंचायतों को बुनियादी सेवाओं, अधोसंरचना की व्यवस्था करने तथा अन्य नागरिक (सिविक) आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अनुदान प्राप्त होता है। प्राप्त अनुदान का स्थानीय निकायों द्वारा स्वयं के स्त्रोतों को मिलाकर इस निधि का सर्वोत्तम लाभकारी उपयोग करने के लिए राज्य शासन ने यहां मंत्रालय से सभी जिला कलेक्टरों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करते हुए पंचायतों में अनुदान का वितरण, योजना तैयार करने, लिए जाने वाले कार्य, अभिलेखों के रख-रखाव, अंकेक्षण पर समुचित कार्रवाई सुनिश्चित कराने कहा है।
पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग द्वारा जारी परिपत्र में कहा गया है कि तेरहवें वित्त आयोग की अनुदान राशि का वितरण वर्ष में दो किश्तों में किया जाएगा। प्रथम किश्त की राशि का उपयोग होने के बाद उसका उपयोगिता प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किये जाने के बाद ही उस वित्तीय वर्ष में द्वितीय किश्त की राशि प्रदाय की जाएगी। पंचायतों के दिए जाने वाले अनुदान के दो घटक होंगे। एक बुनियादी घटक और दूसरा कार्य निष्पादन आधारित घटक। इसके साथ ही विशेष क्षेत्र आधार अनुदान भी दिया जाएगा, जो जिले के अनुसूचित क्षेत्रों की ग्राम पंचायतों में ही व्यय किया जाएगा। राज्य सरकार को अनुदान प्राप्त होने पर उस निधि का वितरण जिलों की जनसंख्या के आधार पर किया जाएगा। जिलों के द्वारा इसी प्रकार कुल प्राप्त राशि का 70 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को जनसंख्या के अनुपात में वितरित किया जाएगा। शेष 30 प्रतिशत निधि जिला पंचायत और जनपद पंचायत को दी जाएगी। वितरण में प्राप्त राशि संबंधित पंचायतों द्वारा इस आशय के लिए खोले गए पृथक बैंक खाते में रखी जाएगी। जमा निधि से अर्जित ब्याज की रकम को तेरहवें वित्त आयोग की अनुदान निधि के अंतर्गत अतिरिक्त संसाधन माना जायेगा। अनुदान प्राप्त करने वाली एजेंसी जिला पंचायत, जनपद पंचायत, ग्राम पंचायत का यह दायित्व होगा कि वे प्राप्त अनुदान के लिए एक पृथक से कैशबुक भी संधारित करें, जिसमें प्राप्त अनुदान के आय-व्यय व उपयोग का विवरण दर्ज होगा। जिला पंचायत और जनपद पंचायत को प्राप्त निधि का विवरण जिला पंचायत और जनपद पंचायत की सामान्य सभा में प्रस्तुत किया जाएगा। ग्राम पंचायत को प्राप्त निधि का विवरण ग्राम पंचायत की सामान्य सभा के साथ ही ग्राम सभा में भी दिया जाएगा।
परिपत्र में यह भी कहा गया है कि तेरहवें वित्त आयोग के अंतर्गत स्थानीय संस्थाओं को अपनी आधारभूत संरचना जिसमें कार्यालयीन इमारतें, लेखा विवरण और डाटाबेस की व्यवस्था को बढ़ाने के लिए सहायता राशि का उपयोग करने की अनुशंसा की जाती है। अनुदान का उद्देश्य पंचायतों को सौंपे गए महत्वपूर्ण कार्यो के निष्पादन में सुधार करना है। जिससे इनका फायदा जनसामान्य को मिले और वर्तमान कमियों को दूर किया जा सके। निधि के उपयोग और क्रियान्वयन के लिए जिन कार्यक्रमों की पहचान की जाए उनका चयन जनता की भागीदारी, जैसे ग्रामीण इलाकों में ग्राम सभाओं के जरिए किया जाए।
पंचायतों में बनेगी कार्य योजना
परिपत्र में कहा गया है कि प्रति वर्ष जिला पंचायत, जनपद पंचायत और ग्राम पंचायत उन्हें प्राप्त होने वाली राशि से कराए जाने वाले कार्यो की योजना बनायेंगे और उसे ग्राम सभा, जनपद पंचायत, जिला पंचायत की सामान्य सभा से अनुमोदित कराया जाएगा। कार्ययोजना की एक प्रति जिला योजना समिति को भी प्रेषित की जाएगी। पंचायत द्वारा तैयार योजनाओं को जिला योजना में समन्वित किया जाएगा। कार्य योजना बनाते समय शौचालय सुविधा, पेयजल एवं स्वच्छता सुविधा, उपलब्ध कराने के साथ ही आवश्यक अधोसंरचना निर्माण, लेखा विवरण रखने तथा डाटाबेस रखने संबंधी कार्यो को प्राथमिकता दी जाएगी।
ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग देगा प्रत्येक कार्य का तकनीकी मार्गदर्शन
पंचायत द्वारा ग्राम सभा के अनुमोदन के बाद ग्राम पंचायत की बैठक में पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग द्वारा जारी मानक लागत के अनुसार कार्यो की प्रशासकीय स्वीकृति जारी की जाएगी। कार्य के अनुसार उसका व्यय, विकास एवं निर्माण समिति के द्वारा किया जाएगा। प्रत्येक कार्य की तकनीकी स्वीकृति ली जाएगी और प्रत्येक कार्य के लिए तकनीकी मार्गदर्शन ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग द्वारा दिया जाएगा। प्रत्येक कार्य की प्रशासकीय स्वीकृति की प्रतिलिपि मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत और संचालक, पंचायत एवं समाज सेवा को भी दी जाएगी। जिला पंचायत और जनपद पंचायत द्वारा अनुमोदित कार्य योजना अनुसार स्वीकृति सामान्य सभा के द्वारा दी जाएगी। कार्य की तकनीकी स्वीकृति के बाद मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा प्रशासकीय स्वीकृति आदेश जारी किए जाएंगे। प्रशासकीय स्वीकृति की प्रतिलिपि संचालक, पंचायत एवं समाज सेवा को भी भेजी जाएगी। तीनो स्तर की पंचायतों द्वारा कराए जाने वाले सभी कार्यो में तकनीकी मार्गदर्शन ग्रामीण यांत्रिकी सेवा का होगा। इस निधि से अन्य विभागों को आबंटित कार्य उस विभाग द्वारा प्रचलित नियमों के अनुसार कराए जाएंगे। कार्य चाहे किसी भी विभाग द्वारा या एजेंसी द्वारा किया जाए, उस कार्य से संबंधित सम्पूर्ण विवरण उस क्षेत्र की ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत को ग्राम सभा में प्रस्तुत करने के लिए दिया जाएगा। कार्य योजना में प्रस्तावित कार्य के लिए पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग द्वारा जिन भवनों की निर्धारित डिजाईन एवं स्टैंडर्ड एस्टीमेट जैसे आंगनबाड़ी भवन, पंचायत भवन, राजीव गांधी सेवा केन्द्र आदि स्वीकृत है उन्हें निर्धारित लागत डिजाईन अनुसार स्वीकृति दी जाए। कार्य की निर्धारित डिजाईन न होने पर स्थल निरीक्षण के बाद दिए गए एस्टीमेट के अनुसार, तकनीकी स्वीकृति के बाद कार्यो की लागत निर्धारित की जाएगी। जिलों को आबंटित राशि से निर्धारत कार्य जिले में जिला पंचायत की सामान्य सभा द्वारा, जनपद पंचायत में जनपद पंचायत की सामान्य सभा द्वारा और ग्राम पंचायत के कार्य ग्राम सभा के अनुमोदन के बाद पंचायत की समान्य सभा द्वारा स्वीकृत किए जाएंगे। जिला पंचायत, जनपद पंचायत द्वारा स्वीकृत कार्यो की प्रशासकीय स्वीकृतियां मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा ग्राम पंचायत स्तर के कार्यो की प्रशासकीय स्वीकृतियां सरपंच और सचिव के संयुक्त हस्ताक्षर से जारी की जाएंगी। कार्य ठेकदारी से कराने पर पूर्णत: प्रतिबंध रहेगा।
परिपत्र में बताया गया है कि तेरहवें वित्त आयोग के प्राप्त अनुदान से तीनों स्तर की पंचायतें ग्यारहवीं अनुसूची में दर्शाये गए कार्यो में से योजना के अनुसार कार्य करा सकेंगी। पंचायतों द्वारा लिए जाने वाले कार्यो का वरीयता क्रम भी निर्धारित किया गया है। सबसे पहले गरीब परिवारों के लिए सार्वजनिक शौचालय सुविधा, उसके बाद नाली से पानी निकासी के कार्य, ग्रामीणों के लिए पेयजल, शालाओं में पेयजल सुविधा और पंचायतों में लेखा संधारण व्यवस्था के लिए व्यय को प्राथमिकता क्रम में रखा गया है। परिपत्र में कहा गया है कि स्वीकृत योजना का क्रियान्वयन ग्राम पंचायत द्वारा छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम 1993 की धारा 46 के अनुसार गठित निर्माण् तथा विकास समिति द्वारा कराए जाएंगे। जनपद पंचायत और जिला पंचायत द्वारा स्वीकृत निर्माण कार्य विभागों द्वारा, ग्राम पंचायतों द्वारा कराये जा सकेंगे। इस निधि का उपयोग धार्मिक स्थलों के निर्माण, स्वागत द्वार बनाने या किसी व्यक्ति या परिवार को सहायता और अनुदान देने में नहीं किया जाएगा। अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के व्यक्तियों को आजीविका के अवसर बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण देने में इस राशि का उपयोग किया जा सकेगा।
अभिलेखों की लेखा परीक्षा और सभी कार्यो का होगा सामाजिक अंकेक्षण
परिपत्र में कहा गया है कि ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत और जिला पंचायत उसे आबंटित धनराशि के खातों के रख-रखाव के लिए उत्तरदायी होगी। प्रत्येक वित्त वर्ष के अंत में कराए गए कार्यो को भौतिक रूप से सत्यापन और अभिलेखों की लेखा परीक्षा कराई जाएगी। लेखा परीक्षा स्थानीय निधि लेखा संपरीक्षा विभाग, छत्तीसगढ़ महालेखाकार और चाटर्ेड एकाउन्टेंट द्वारा ही किया जा सकेगा। तैयार किए गए नये लेखा विवरणों को पंचायत एकाउन्टिंग सिस्टम (प्रिया साफ्ट) में भी अपलोड किया जाएगा। लेखा परीक्षा की रिपोर्ट पर, की गई कार्रवाई संबंधी रिपोर्ट ग्राम सभा को दिए जाने के साथ ही जिला पंचायत को भी दी जाएगी।
तेरहवें वित्त आयोग के अंतर्गत प्राप्त आबंटन के उपयोग के संबंध में ग्राम पंचायत स्तर पर प्रतिवर्ष वित्तीय वर्ष के प्रारंभ में आयोजित होने वाली ग्राम सभा में सामाजिक अंकेक्षण कराया जायेगा। तीनों स्तर की पंचायतों में कराए गए अंकेक्षण में उठाई गई आपत्तियों का निराकरण जिला पंचायत के माध्यम से स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग को भेजा जाएगा। तेरहवें वित्त आयोग की अनुशंसा के अनुरूप त्रिस्तरीय पंचायतों में निर्धारित 08 प्रपत्रों की जानकारी भी तीनों स्तर के पंचायतों द्वारा तैयार की जाएगी। इसे आडिट के समय सत्यापन के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। लेखाओं का विवरण निर्देशानुसार मॉडल पंचायत एकाउन्टिंग सिस्टम में किया जाएगा। प्रतिवर्ष पंचायत को तेरहवें वित्त आयोग से प्राप्त होने वाली निधि के व्यय का सामाजिक अंकेक्षण कराया जाएगा और उपयोगिता प्रमाण-पत्र जिला पंचायत के द्वारा संकलित कर संचालक, पंचायत और समाज सेवा विभाग को भेजा जाएगा।
तेरहवें वित्त आयोग के आबंटन से कराए जा रहे कार्यो के संबंध में पंचायत पदाधिकारियों, कर्मचारियों के संबंध में यदि कोई शिकायत प्राप्त होती है तो ग्राम पंचायत के संबंध में उसे संबंधित ग्राम सभा के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। यदि ग्राम सभा में चर्चा के बाद शिकायत प्रारंभिक रूप से सही पाई जाती है तो ग्राम सभा के पारित प्रस्ताव सहित प्रकरण अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा प्रेषित किया जाएगा। उसकी एक प्रति जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को भी दी जाएगी। जनपद पंचायत और जिला पंचायत स्तर पर शिकायत के संदर्भ में जिला कलेक्टर समुचित निर्णय लेकर शिकायत का निराकरण करेंगे।
परिपत्र में यह भी कहा गया है कि कुल उपलब्ध आबंटन का पांच प्रतिशत प्रोजेक्ट मैनेजमेंट पर व्यय किया जा सकेगा। इस निधि में से कार्यालयीन व्यय, उपकरण खरीदी, स्टेशनरी, कम्प्यूटर एवं उसमें उपयोग की जाने वाली सामग्री, सुधार कार्य, डाटाबेस सूचना केन्द्र, वेबसाईट तैयार करने पर व्यय किया जा सकेगा।

