सेटकॉम नेटवर्क के 120 केन्द्रों पर दो हजार से अधिक पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण
तीन दिवसीय प्रशिक्षण सम्पन्न
रायपुर 06 मई 2010

छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण विकास प्रशिक्षण संस्थान में जिला पंचायतों और जनपद पंचायतों के नव-निर्वाचित प्रतिनिधियों के तीन दिवसीय प्रशिक्षण कल शाम सम्पन्न हुआ। प्रशिक्षण का आयोजन पंचायत प्रतिनिधियों को काम-काज के सुचारू संचालन के लिए क्षमता विकास के उद्देश्य से किया गया। प्रशिक्षण राज्य ग्रामीण विकास संस्थान के सेटकॉम नेटवर्क के माध्यम से जुड़े राज्य के 120 केन्द्रों पर एक साथ दिया गया, जिसमें जिला और जनपद पंचायतों के दो हजार से अधिक प्रतिनिधि शामिल हुए। प्रशिक्षण का समापन अपर मुख्य सचिव श्री सरजियस मिंज ने किया।
अपर मुख्य सचिव ने समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि प्रशिक्षण के माध्यम से पंचायत राज्य संस्थानों के प्रतिनिधियों में विकास की सोच विकसित होने के साथ ही क्षमता विकास होने से उन्हें काम-काज संचालन में सुविधा होगी। उन्होंने कहा कि राज्य में सेटकॉम नेटवर्क के माध्यम से पहली बार पंचायत पदाधिकारियों की क्षमता विकास का काम शुरू हुआ है। पंचायत प्रतिनिधि अपने क्षेत्रों की पंचायतों को आर्थिक रूप से कैसे सक्षम करें, यह सब क्षमता विकास से होगा। शिक्षित और प्रशिक्षित होने से पंचायत प्रतिनिधि योजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेंगे। श्री मिंज ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधि पंचायत राज अधिनियम को समझते हुए सामाजिक न्याय और आर्थिक विकास के उद्देश्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।
प्रशिक्षण में पंचायत राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों को फिल्मों, समूह चर्चा और विशेषज्ञों से चर्चा के माध्यम से अधिकार, कर्तव्य, संविधान की विशेषताएं, पंचायतों पर नियंत्रण, बजट, लेखा, ऑडिट, विकेन्द्रीकरण्ा, योजनाओं, सूचना का अधिकार और सामाजिक अंकेक्षण की जानकारी दी गई। आयुक्त, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना श्री के. सुब्रमण्यम ने बताया कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत परि-सम्पत्तियों के निर्माण का सामाजिक अंकेक्षण होता है। इससे योजना के कार्यो में पारदर्शिता और आमजनों में जागरूकता आती है। उन्होंने बताया कि सामाजिक अंकेक्षण में प्राप्त शिकायतों पर कार्रवाई की जाती है। अपर आयुक्त, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना सुश्री शहला निगार ने बताया कि राज्य में इस योजना के तहत वर्ष में दो बार सामाजिक अंकेक्षण किया जाता है। पिछली बार की तुलना में इस बार ग्रामीणों में सामाजिक अंकेक्षण के प्रति अधिक जागरूकता देखी गयी।
प्रशिक्षण में पंचायत प्रतिनिधियों के सवाल के जवाब भी दिए गए। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में मजदूरी भुगतान की प्रक्रिया शासन द्वारा विभिन्न निर्माण कार्यो के लिए निर्धारित सामग्री की दरों और इकाई लागत के बारे में भी जानकारी दी गई। दंतेवाड़ा और बस्तर जैसे दूरस्थ क्षेत्र के पंचायत प्रतिनिधियों में स्थानीय भाषा में भी प्रशिक्षण देने का सुझाव दिया। अपर मुख्य सचिव ने इस संबंध में उन्हें आश्वस्त किया।

