छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण विकास संस्थान : डेढ़ लाख से अधिक पंचायत प्रतिनिधियों, अधिकारियों-कर्मचारियों को मिला प्रशिक्षण
रायपुर, 31 मार्च 2011
छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण विकास संस्थान द्वारा चालू वित्तीय वर्ष में दिसम्बर माह तक चार हजार 590 प्रशिक्षण सत्रों के माध्यम से एक लाख 61 हजार 622 पंचायत प्रतिनिधियों, अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया हैं। इसके अलावा राज्य के पांच क्षेत्रीय प्रशिक्षण केन्द्र सरगुजा, बिलासपुर, जगदलपुर, रायगढ़ और कुरूद में संचालित किए जा रहे है। इन प्रशिक्षण केन्द्रों में चालू वित्तीय वर्ष में दिसम्बर माह तक पंचायत सचिवों और जनपद सदस्यों के लिए तीन हजार 283 प्रशिक्षण सत्रों का आयोजन कर एक हजार 967 लोगों को प्रशिक्षण दिया गया। आगामी वित्तीय वर्ष में राज्य ग्रामीण विकास संस्थान के स्थापना व्यय के लिए एक करोड़ 92 लाख आठ हजार रूपए का प्रावधान बजट में किया गया है।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण विकास संस्थान की स्थापना शासन के सभी स्तरों के नव-निर्वाचित जन प्रतिनिधियों, लोक सेवकों एवं समाज संगठनों के प्रतिनिधियों की क्षमता विकास के उद्देश्य से किया गया हैं। राज्य शासन द्वारा 17 जनवरी 2011 को संस्थान को 'छत्तीसगढ़ सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1973' के तहत स्वायतशासी संस्था के रूप में पंजीकृत करने की स्वीकृति प्रदान की गई है। राज्य के शेष तीन जिलों रायपुर, दुर्ग और जांजगीर-चांपा के पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधियों को राष्ट्रीय ग्राम स्वराज योजना के तहत प्रशिक्षण के माध्यम से क्षमता विकास के लिए आठ करोड़ 89 लाख रूपए की त्रिवर्षीय योजना केन्द्रीय पंचायती राज मंत्रालय द्वारा स्वीकृत की गई है। इसमें केन्द्र द्वारा 75 प्रतिशत और राज्य द्वारा 25 प्रतिशत राशि खर्च की जाएगी।
संस्थान द्वारा चालू वित्तीय वर्ष में जन-प्रतिनिधियों के प्रशिक्षण के लिए सरल भाषा में 12 पुस्तकें और सात डाक्यूमेन्ट्री फिल्म का निर्माण किया गया है। इसमें विकास के आयाम, ग्राम पंचायत हेतु बजट लेखा एवं आडिट, नव-निर्वाचित ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों के लिए स्व-अध्ययन सामग्री, जनपद पंचायत के नव-निर्वाचित प्रतिनिधियों के लिए स्व-अध्ययन सामग्री, जिला पंचायत के नव-निर्वाचित प्रतिनिधियों के लिए स्व-अध्ययन सामग्री, छत्तीसगढ़ पंचायती राज अधिनियम, सरपंच और सचिव हेतु पठन सामग्री, नव-निर्वाचित ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों हेतु प्रश्न-उत्तर, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (सामाजिक अंकेक्षण), महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण्ा रोजगार गारंटी अधिनियम (प्रश्न-उत्तर), नगरीय निकायों में वित्तीय संसाधन और उसमें वृध्दि के उपाय, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत समेकित प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन परियोजना का कार्यान्वयन एवं संसाधन की पुस्तिका शामिल है। इसी प्रकार संस्थान द्वारा निर्मित डाक्यूमेन्ट्री फिल्मों में स्व-अधिकार (ग्राम पंचायत सरायपाली), नई सोच नया उद्यम (मत्स्य पालन पर आधारित), नवा-किरण (साक्षर भारत पर), लेखा बजट एवं आडिट (ग्राम पंचायत हेतु), जिला एवं जनपद पंचायत में आय के स्त्रोत और विकेन्द्रीकृत नियोजन के विषय शामिल है।
संस्थान के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश की ग्राम पंचायतों, जनपद पंचायतों और जिला पंचायतों में स्थापित किए गए स्वामी आत्मानंद वाचनालय में संस्थान द्वारा इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, नई दिल्ली द्वारा निर्मित 11 पुस्तिकाओं का स्व-अध्ययन सामग्री का सेट जनप्रतिनिधियों और ग्राम सभा के सदस्यों के अध्ययन के लिए रखा गया है। जिसमें भारत के संविधान की बुनियादी विशेषताएं, पंचायतीराज का उद्भव एवं संविधान का 73वां संशोधन अधिनियम 1992, स्थानीय स्व-शासन में पंचायती राज, विकेन्द्रीकृत नियोजन, क्षेत्रक नियोजन, विकास में पंचायतीराज संस्थाओं की भूमिका, केन्द्रीय प्रायोजित योजनाओं में पंचायतों की जिम्मेदारियां, विकास की संस्थाएं, विशेष श्रेणियों का विकास (अनुसूचित जातियां, अनुसूचित जनजातियां और महिलाएं), आपदा प्रबंधन में पंचायती राज संस्थाओं की भूमिका और पंचायत राज की नई पहल नामक पुस्तकें शामिल है। संस्थान द्वारा चालू वित्तीय वर्ष 2010-11 में पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि योजना के तहत आठ उप क्षेत्रों का अध्ययन बाहरी संस्थाओं के द्वारा कराया गया। जिसमें चार उप क्षेत्रों महुआ, लाख, बकरी और दुग्ध का अध्ययन लाईव्लीहुड स्कूल भोपाल और अन्य चार उप क्षेत्रों बांस, काजू, मत्स्य एवं सब्जी उत्पादन का अध्ययन हेल्थ विजन एंड रिसर्च कोलकता द्वारा किया गया। अनुसंधान की विस्तृत रिर्पोट संस्थान के वेब साइट डब्ल्यू डब्ल्यू डब्ल्यू डॉट सीजीएसआईआरडी डॉट जीओवी डॉट इन (ूण्बहेपतकण्हवअण्पद) पर उपलब्ध है।

