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सहस्त्राब्दी विकास लक्ष्य:जिला अधिकारियों की कार्यशाला सम्पन्न

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When Apr 05, 2011
from 08:45 PM to 08:45 PM
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  रायपुर 05 अप्रैल 2011

       छत्तीसगढ़ में सहस्त्राब्दी विकास के आठ लक्ष्यों को वर्ष 2015 तक  प्राप्त करने के लिए पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत संयुक्त राष्ट्र संघ (यूनिसेफ) के सहयोग से मिलेनियम डेव्हलपमेंट गोल्स हब की स्थापना की गई है। राज्य में शासन के विभिन्न स्तरों के अधिकारियों और कार्यकर्ताओं के मध्य सहस्त्राब्दी विकास लक्ष्यों के विषय में जानकारी एवं जागरूकता लाने के लिए संभाग और जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में कबीरधाम जिले के मुख्यालय कवर्धा में भी जिला अधिकारियों की कार्याशाला आयोजित की गई। इन लक्ष्यों की प्राप्ति को प्रशासकीय गति और मार्गदर्शन देने के लिए मुख्य सचिव की अघ्यक्षता में राज्य स्तरीय स्टेयरिंग कमेटी गठित की गई है।
      कबीरधाम जिले के कलेक्टर श्री मुकेश बंसल ने कार्यशाला में कहा कि सहस्त्राब्दी विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सभी विभाग तत्परता से कार्य करें। उन्होंने सहस्त्राब्दी विकास के प्रथम लक्ष्य गरीबी को दूर करने के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत प्रत्येक ग्रामीण को रोजगार उपलब्ध कराने कहा। कलेक्टर ने प्राथमिक शिक्षा के लोकव्यापीकरण के लिए सभी बच्चों को स्कूल प्रवेश कराने और शाला त्यागी बच्चों को स्कूल वापस लाने, जिला शिक्षा अधिकारी को स्कूलों में बच्चों को गुणवत्तायुक्त भध्यान्ह भोजन, गणवेश और नि:शुल्क पुस्तक वितरण का लाभ दिलाने कहा। उन्होंने कहा कि वनाचंल के आश्रम-छात्रावासों में आदिवासी बच्चों को बेहतर शिक्षा देकर सहस्त्राब्दी विकास के प्राथमिक शिक्षा के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। लैंगिक समानता के लक्ष्य तक पहुंचने महिलाओं को स्व-सहायता समूह बनाने और रोजगारमूलक योजनाओं से जोड़ा जाए। लैंगिक समानता के लिए महिला और बाल विकास विभाग को सजग होकर कार्य करने कहा गया। शिशु और मातृ मृत्यु दर में कमी लाने के लिए प्राथमिक और स्वास्थ्य केन्द्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के निर्देश मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी को दिए गए। संस्थागत प्रसव, कुपोषण मुक्ति और बच्चों के टीकाकरण के कार्य प्राथमिकता से पूर्ण करने कहा गया।
     जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा सहस्त्राब्दी विकास लक्ष्यों की जानकारी देते हुए कहा कि वर्ष 2000 में संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा विकसित और अवकसित देशों के बीच असमानता को दूर करने के सहस्त्राब्दी विकास के लक्ष्य निर्धारित किए गए। निर्धारित लक्ष्यों में पहला लक्ष्य अति गरीबी तथा भूखमरी का उन्मूलन, द्वितीय लक्ष्य वैश्विक प्राथमिक शिक्षा का सुनिश्चितकरण, तीसरा लक्ष्य लैंगिक समतुल्यता (जेंडर) एवं महिला सशक्तिकरण, चौथा लक्ष्य शिशु मृत्यु दर में कमी लाना और पांचवा लक्ष्य मातृ मृत्यु दर में कमी लाना है। छठवां लक्ष्य एड्स, मलेरिया, और क्षय जैसी घातक बिमारियों से मुक्ति, सातवां लक्ष्य पर्यावरण सुरक्षा एवं संवहनीयता और आठवां लक्ष्य विकास हेतु वैश्विक सहभागिता का विकास  शामिल है। भारत सहित छत्तीसगढ़ में वर्ष 2015 तक सहस्त्राब्दी विकास लक्ष्य को हासिल करने की सीमा है। उन्होंने एड्स की रोकथाम के लिए जागरूकता पर बल दिया। इस मौके पर सहस्त्राब्दी विकास केन्द्र (हब) की राज्य समन्वयक सुश्री एलिस लकड़ा ने कार्यशाला में सहस्त्राब्दी विकास लक्ष्यों को गांवों और घर-घर तक पहुंचाने कहा। इस दौरान समूह चर्चा में ग्राम और जनपद पंचायत स्तर पर सहस्त्राब्दी विकास लक्ष्यों को हासिल करने पर चर्चा की गई। उन्होंने सहस्त्राब्दी विकास लक्ष्यों के संबंध में जागरूकता बढ़ाने व प्रगति की समीक्षा पर बल दिया।

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