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देश का पांचवा अल्ट्रा मेगा बिजली संयंत्र छत्तीसगढ़ में बनेगा

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When Jun 01, 2010
from 03:30 PM to 03:30 PM
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राज्य के सरगुजा जिले में तैयारी शुरू

प्रभारी मंत्री की अध्यक्षता में जिला स्तरीय पुनर्वास समिति की बैठक

परियोजना के लिए ग्यारह गांवों के सिर्फ तीस घरों का विस्थापन होगा

संबंधित गांव की कुछ ही जमीन ली जाएगी : पूरा गांव विस्थापित नहीं होगा

   रायपुर एक जून 2010

1047-010610

देश के पांचवे अल्ट्रा मेगा बिजली संयंत्र की स्थापना छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में की जाएगी। इसकी उत्पादन क्षमता चार हजार मेगावॉट होगी। केन्द्र सरकार द्वारा वर्ष 2012 तक देश की जनता को पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने के लिए अब तक इस प्रकार की चार अल्ट्रा मेगा बिजली परियोजनाएं मध्यप्रदेश, गुजरात, आन्ध्रप्रदेश और झारखण्ड के लिए मंजूर की जा चुकी है। इसी कड़ी में पांचवा अल्ट्रा मेगा संयंत्र सरगुजा जिले के विकासखण्ड उदयपुर और प्रेमनगर में प्रस्तावित किया गया है। इसकी स्थापना के लिए तैयारियां शुरू हो गयी है। इस सिलसिले में पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री तथा सरगुजा जिले के प्रभारी श्री रामविचार नेताम की अध्यक्षता में जिला स्तरीय पुनर्वास समिति की बैठक अम्बिकापुर कलेक्टोरेट के सभा कक्ष में आयोजित की गई।
श्री नेताम ने बैठक में इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण के बारे में अधिकारियों से विचार-विमर्श किया। कलेक्टर डॉ. कमलप्रीत सिंह ने बैठक में बताया कि इस परियोजना के लिए ग्यारह गांवों के सिर्फ तीस घरों का विस्थापन होगा। इन गांवों की कुछ ही जमीन ली जाएगी। पूरा गांव विस्थापित नहीं होगा। प्रभारी मंत्री ने अधिकारियों को परियोजना की स्थापना में राज्य शासन की आदर्श पुनर्वास नीति का गंभीरता से पालन करने के निर्देश दिए। श्री नेताम ने कहा कि राज्य सरकार ने औद्योगिक परियोजनाओं के लिए ली जाने वाली भूमि की अलग-अलग किस्मों के आधार पर मुआवजे की दरें घोषित की जा चुकी है। उन्हीं दरों के आधार पर इस परियोजना के लिए भी मुआवजा तय किया जाए। श्री नेताम ने कहा कि मुआवजा राशि संबंधित पति-पत्नी के संयुक्त खाते में ही जमा की जाए। परियोजना का निर्माण करने वाली कम्पनी को उन्होंने परियोजना क्षेत्र के संभावित भू-विस्थापितों के लिए आस-पास जमीन तलाश कर एक आदर्श आवासीय कॉलोनी बनाने के भी निर्देश दिए जहां कम्पनी द्वारा प्रत्येक भू-विस्थापित परिवार को बेहतर मकान के साथ हर प्रकार की बुनियादी सुविधा उपलब्ध करायी जानी चाहिए। सरगुजा क्षेत्र के लोक सभा सांसद श्री मुरारीलाल सिंह भी बैठक में उपस्थित थे।
     पावर फाईनेन्स कार्पोरेशन लिमिटेड की सहायक कंपनी छत्तीसगढ़ सरगुजा पावर लिमिटेड के अधिकारियों ने बैठक में बताया कि सरगुजा जिले के उदयपुर एवं प्रेमनगर में 4 हजार मेगावाट यह बिजली परियोजना प्रस्तावित है। इसमें से राज्य को 2 हजार मेगावाट विद्युत ऊर्जा वितरित की जायेगी। इसके लिए लगभग 2500 एकड़ जमीन अधिग्रहित किया जाना प्रस्तावित है। जिसमें से पावर प्लांट के लिए 1200 एकड़, राखड़बाध के लिए एक हजार, जल संग्रहण के लिए 200 एवं आवसीय परिसर के लिए 100 एकड़ जमीन शामिल है। ऊर्जा उत्पादन के लिए एक हजार 120 मिलियन टन कोयले, 135 मिलियन घन मीटर पानी की प्रति घन मीटर आवश्यकता होगी। विद्युत उत्पादन परियोजना आबंटन के 69 माह बाद किया जायेगा। इस परियोजना से 11 गांवों की कुल लगभग 9439 एकड़ जमीन में से केवल तकरीबन 2614 एकड़ जमीन अधिग्रहित किया जाना प्रस्तावित है।
    बैठक में परियोजना से जुडे अधिकारियों ने बताया कि उनके द्वारा अर्जित की जाने वाली भूमि के बदले में सभी प्रभावितों को मुआवजा राशि सहित रोजगार देने का प्रावधान रखा गया है। राज्य शासन द्वारा घोषित दरों के अनुसार पड़त भूमि के लिए 6 लाख रूपये प्रति एकड़, असिंचित भूमि एक फसली के लिए 8 लाख रूपये प्रति एकड़ और सिंचित भूमि दो फसली के लिए 10 लाख रूपये प्रति एकड़ का मुआवजा प्रावधान रखा गया है। अधिकारियों ने प्रोजेक्टर के द्वारा मकान एवं संपत्ति का मुआवजा, रोजगार एवं अन्य सुविधाआें के बारे में प्रभावित क्षेत्रों के सरपंच, सचिवों को अवगत कराया। श्री नेताम ने जिला प्रशासन के अधिकारियों को शासकीय और वन भूमि पर वर्षो से जीवन यापन कर रहे लोगों के कब्जे को चिन्हांकित करने के निर्देश दिए। प्रभारी मंत्री ने प्रभावित किसानों से आग्रह किया कि जिले और राज्य सहित देश के विकास के लिए इस विशाल विद्युत परियोजना के महत्व को देखते हुए कुछ त्याग करें। उन्होंने कहा कि परियोजना से  प्रभावित किसान से कहा गया है कि वे आसपास के क्षेत्रों में मुआवजा राशि से अधिक जमीन खरीद सकते हैं, अत: ऐसी जमीनों का चिन्हाकंन करके रखें। कलेक्टर ने सरपंचों से कहा कि जानकारी के अभाव में लोग भ्रमित होते हैं। 11 गांवों में केवल 30 घरों का ही विस्थापन होगा। गांव की कुछ जमीन ही जायेगी। पूरा गांव विस्थापित नहीं होगा। कलेक्टर ने बताया कि पुनर्वास पैकेज प्रभावित गांवों के सरपंचों को उपलब्ध कराया जायेगा, जिससे वे ग्रामीणों को सही जानकारी दे सकें। बैठक में राज्य सहकारी विपणन संघ (मार्कफेड) अघ्यक्ष श्री राधाकृष्ण गुप्ता और विभिन्न पंचायतों के पदाधिकारियों सहित जिला प्रशासन के संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

क्रमांक -1047/चतुर्वेदी

 

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