सौर ऊर्जा से रौशन हुआ रिसगांव
रायपुर, 08 अप्रैल 2010

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के नगरी विकासखण्ड के आदिवासी बहुल और वनों से आच्छादित ग्राम रिसगांव निवासी भी अब अपने घरों में प्रकाश के लिए ढिबरी अथवा लालटेन पर निर्भर नहीं रहते। उनका घर भी प्रदेश के हजारों गांवों-घरों भांति रात्रि में लट्टू अथवा टयूबरॉड से उजाला होता है। फर्क सिर्फ इतना है कि इसके लिए वे परम्परागत ताप बिजली पर नहीं बल्कि सीधे सूर्यदेवता पर निर्भर होते हैं।
छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा) द्वारा उनके गांव में सूर्य ऊर्जा पर आधारित एक छोटा पावर प्लाण्ट स्थापित किया गया है। दरअसल, ग्राम वासियों ने पिछले वर्ष 2010 में ग्राम सुराज अभियान के दौरान भ्रमण पर आए सुराज दलों को आवेदन सौंपकर गांव में बिजली मुहैया कराने की मांग रखी थी। जिला प्रशासन ने क्रेडा के माध्यम से इस पर तत्काल अमल सुनिश्चित किया और रिसगांव वासियों की वर्षों पुरानी बिजली की मांग पूरी होर् गई। क्रेडा द्वारा रिसगांव में लगभग 37 लाख रुपए की लागत से दस किलोवाट क्षमता का एक सौर पावर प्लाण्ट लगाया गया है।
उल्लेखनीय है कि वनों के बीच स्थित ग्राम रिसगांव नगरी विकासखण्ड के अंतिम छोर पर स्थित है और 146 आदिवासी परिवार यहां रहते हैं। सौर उर्जा से गांव के प्रत्येक घर और गलियां रोशनमय हुई हैं । गांव की गलियों में पन्द्रह स्ट्रीट लाईट की व्यवस्था होने से शाम के समय अंधकार नहीं रहता। इसके पहले शाम होते ही गांव में सन्नाटा पसर जाता था और जंगली जानवरों का भय भी बना रहता था। स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थियों का एकमात्र सहारा लालटेन था किन्तु अब विद्युत प्रकाश की सुविधा मिल जाने से बच्चे काफी खुश होकर ज्यादा देर तक पढाई-लिखाई में ध्यान लगा रहे हैं।

