सौर ऊर्जा से हुआ पेयजल की समस्या का समाधान
रायपुर, 23 जून 2011
सौर ऊर्जा प्रणाली में छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के विकासखंड सोनहत स्थित ग्राम पंचायत रामगढ के वनग्राम तुर्रीपानी में पेयजल की गम्भीर समस्या थी। ग्राम पंचायत रामगढ़ के इस गांव में लोक स्वास्थ यांत्रिकी विभाग द्वारा कई नलकूप खनन किए गए थे, लेकिन किए गए नलकूप से पानी नही निकला।
समस्त ग्राम वासी ग्राम से लगभग 1.50 कि.मी. की दूरी पर उपलब्ध प्राकृतिक जल स्त्रोत (तुर्रा) पर आश्रित है। इस स्त्रोत तक जाने हेतु ग्राम वासियों को पथरीले रास्ते पर पैदल जाना पडता था तथा स्त्रोत से पानी भरकर लगभग 100 मी. की चढाई भी चढनी पडती थी। उक्त ग्राम में परम्परागत विद्युत न होने के कारण लोक स्वास्थ यंत्रिकी विभाग द्वारा पेयजल ग्राम तक पहुंचाने हेतु ग्रीष्मकाल में डीजल जनरेटर के माध्यम से तुर्रा के समीप बनाये गये टैंक में पम्प लगाया जाता था, किन्तु यह व्यवस्था केवल ग्रीष्म काल में की जाती थी।
छत्तीसगढ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा) एंव लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के संयुक्त प्रयासो से उक्त ग्राम में पेयजल एवं दैनिक उपयोग हेतु जल व्यवस्था के लिए 02 सोलर पंप स्थापित किये गए हैं। चूंकि जल स्त्रोत की ग्राम से दूरी अधिक है। अत: पम्प की स्थापना दो स्टेज में की गई है, पहला पम्प जल स्त्रोत के समीप स्थित टैंक में लगाया गया है तथा यहां से 200 मी. की दूरी एवं लगभग 40 मी. की उंचाई पर दूसरा टैंक बनाया गया, जिसमें दूसरा पम्प स्थापित किया गया है। पहले पम्प के
माध्यम से पानी दूसरे टैंक मे ले जाया जाता है तथा इस टैंक से दूसरे पम्प के माध्यम से पानी ग्राम तक पहुँचाया जाता है। यह संयंत्र सौर ऊर्जा से चलता है अत: इसके संचालन हेतु किसी भी अन्य प्रकार के ईधन की आवष्यकता नही है और इस संयंत्र को वर्ष में लगभग 10 माह तक सफलता पूर्वक चलाया जा सकता है।
उल्लेखनीय है कि पेयजल व्यवस्था हेतु दो चरणों में सोलर पंप लगाकर लगभग 1800 मी. की पाईप लाईन से ग्राम तक जल पहुचाने का प्रयास छत्तीसगढ में प्रथम बार किया गया है। ऐसा क्रेडा एवं लोक स्वास्थ यांत्रिकी विभाग के संयुक्त प्रयासों से किया जा सका है। ग्राम में पेयजल हेतु इस प्रकार की व्यवस्था से ग्रामवासी अत्यंत प्रसन्न हैं। इस प्रकार की जल प्रदाय की व्यवस्था से ग्रामीण अत्यन्त प्रभावित है, क्योकि इस ग्राम में क्रेडा द्वारा सौर ऊर्जा से विद्युत व्यवस्था पूर्व में ही की जा चुकी है।
क्रमांक-1772/तिग्गा

