छत्तीसगढ़ की बिजली उत्पादन क्षमता अगले साल हो जाएगी 3424 मेगावाट
साढ़े नौ हजार करोड़ की लागत से दो विशाल ताप बिजली संयंत्रों का निर्माण वर्ष 2012 तक पूर्ण करने का लक्ष्य
तेजी से चल रहा है निर्माण कार्य
रायपुर, 18 नवम्बर 2011
राज्य सरकार के सार्वजनिक उपक्रम छत्तीसगढ़ विद्युत उत्पादन कम्पनी द्वारा लगभग साढ़े नौ हजार करोड़ रूपए की लागत से बनवाए जा रहे दो विशाल ताप विद्युत संयंत्रों का निर्माण अगले वर्ष 2012 तक पूर्ण करने का लक्ष्य है। इनके क्रियाशील होने पर कम्पनी की उत्पादन क्षमता आगामी वर्ष 2012 में एक हजार 924 मेगावाट से बढ़कर तीन हजार 424 मेगावाट हो जाएगी।
विद्युत उत्पादन कम्पनी के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के दिशा-निर्देशों के अनुरूप जांजगीर-चाम्पा जिले के मड़वा-तेन्दूभाठा में कम्पनी द्वारा छह हजार 318 करोड़
रूपए की लागत से एक हजार मेगावाट क्षमता के विशाल ताप विद्युत संयंत्र का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। इसके अलावा उद्योग नगरी कोरबा में पांच सौ मेगावाट क्षमता की कोरबा पश्चिम ताप बिजली परियोजना का निर्माण भी युध्द स्तर पर चल रहा है। इस पर तीन हजार 156 करोड़ रूपए की लागत आएगी। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कम्पनी के अधिकारियों को इन दोनों परियोजनाओं का निर्माण वर्ष 2012 तक पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। कम्पनी में मड़वा-तेन्दूभाठा ताप बिजली परियोजना की पांच सौ मेगावाट की प्रथम इकाई सहित पांच सौ मेगावाट की कोरबा (पश्चिम) परियोजना में बॉयलर का हाइड्रोलिक परीक्षण पिछले माह सफलतापूर्वक सम्पन कर लिया गया है। इस महत्वपूर्ण तकनीकी परीक्षण के सुव्यवस्थित रूप से हुए सफल परीक्षण के बाद अब इनमें बॉयलर लाईट-अप करने की भी तैयारी तेजी से चल रही है।
अधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के समय प्रदेश के विद्युत मंडल की बिजली उत्पादन क्षमता एक हजार 360 मेगावाट थी। इस बीच वर्ष 2007 में दो हजार 452 करोड़ रूपए की लागत से कोरबा में पांच सौ मेगावाट क्षमता के डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ताप बिजली संयंत्र (कोरबा पूर्व) का निर्माण पूर्ण कर लिया गया और उसमें उत्पादन भी शुरू हो गया। इसके साथ ही कम्पनी के लगभग 25 वर्ष पुराने बिजली संयंत्रों का बेहतर रख-रखाव कर उनकी क्षमता बढ़ाई गयी। अधिकारियों के अनुसार इन सब उपायों के फलस्वरूप राज्य के इस सार्वजनिक उपक्रम की बिजली उत्पादन क्षमता चालू वर्ष 2011 तक बढ़कर एक हजार 924 मेगावाट हो गयी है। वर्तमान में निर्माणाधीन दोनों परियोजनाओं के पूर्ण होने पर आगामी वर्ष 2012 में कम्पनी की उत्पादन क्षमता लगभग तीन हजार 424 मेगावाट हो जाएगी। इस प्रकार राज्य को एक हजार 500 मेगावाट अतिरिक्त बिजली मिलेगी। अधिकारियों ने बताया कि कोरबा (पूर्व) स्थित और वर्ष 2007 में निर्मित डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी ताप बिजली संयंत्र के क्रियाशील होने के बाद छत्तीसगढ़ को जनवरी 2008 से देश के प्रथम और इकलौते विद्युत कटौती मुक्त राज्य के रूप में चिन्हांकित होने का गौरव मिल रहा है।

