छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल अंतरण योजना (ट्रांसफर स्कीम) नियम 2010 प्रभावशील
राज्य शासन ने जारी की अधिसूचना
अभ्यावेदन के निवारण के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित
रायपुर 31 मार्च 2010
राज्य शासन द्वारा 31 मार्च 2010 को अधिसूचना जारी कर छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत अंतरण योजना (ट्रांसफर स्कीम) नियम 2010 प्रभावशील की गयी है। विद्युत कम्पनियों की कार्य प्रणाली में पारदर्शिता लाने, विद्युत की आपूर्ति में सुधार लाने, उपभोक्ता सेवाओं को प्रभावी बनाने और कर्मियों के मध्य विद्युत मंडल के पुर्नगठन के संबंध में प्रचलित शंकाओं के निराकरण के लिए यह नियम लागू किया गया है। इस नियम के लागू होने से पूर्व मे जारी ट्रांसफर स्कीम रद्द की गयी है।
नये नियम के अनुसार होल्डिंग के कम्पनी के कारोबार में स्पष्टता लाने के लिए राज्य में एम.ओ.यू. के द्वारा प्रस्तावित विद्युत उत्पादन परियोजनाओं, संयुक्त क्षेत्र में प्रस्तावित विद्युत उत्पादन परियोजनाओं के कार्यों की निगरानी प्रगति की समीक्षा के लिए होल्डिंग कम्पनी को उत्तरदायी बनाया गया है। पूर्व में जारी ट्रांसफर स्कीम के प्रावधानो के पालन में होल्डिंग कम्पनी को अपने अधीन पृथक से समन्वय के कार्यों के लिए अन्य कम्पनियों पर निर्भर रहना पड़ रहा था। संशोधित नियमों के तहत होल्डिंग कम्पनी को समन्वय और परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा तथा संयुक्त क्षेत्र की परियोजनओं से संबंधित विभिन्न दायित्वों के पालन के लिए अलग से कार्यालय की स्थापना की अनुमति है। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल के समय विभिन्न सेवाओं का सम्पादन केन्द्रीय स्तर पर हो रहा था। विभिन्न कम्पनियों के गठन के बाद प्राथमिक सेवाओं का वर्गीकरण करते हुए आवश्यकतानुसार उन्हें संबंधित विद्युत कम्पनियों में बांटा गया है। वर्ष 2008 में जारी ट्रांसफर स्कीम में सहभागित सेवाएं जैसे चिकित्सा सेवाएं, सचिवालयीन कार्य, वितरण एवं पारेषण निकाय के भंडार आदि कार्यों को होल्डिंग कम्पनी के तहत रखा गया था। कम्पनियों के कारोबार को व्यवस्थित करने के लिए नई ट्रांसफर स्कीम में सहभागित सेवाओं को कम्पनी की आवश्कता के अनुसार वर्गीकृत कर दिया गया है।
नई ट्रांसफर स्कीम में एक जनवरी 2008 से 31 मार्च 2010 की अवधि को ट्रांजिशन पिरियड माना गया है। इस अवधि में ट्रेडिंग कम्पनी द्वारा विद्युत के क्रय-विक्रय से प्राप्त आय होल्डिंग कम्पनी में इक्वीटी के रूप में निवेश की जाएगी और होल्डिंग कम्पनी द्वारा इस राशि पुर्ननिवेश विभिन्न विद्युत कम्पनियों में किया जाएगा। इससे राज्य में गठित विभिन्न विद्युत कम्पनियों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। नई ट्रांसफर स्कीम में 01 अप्रैल 2010 के बाद विद्युत ट्रेडिंग कम्पनी को राज्य शासन का प्रतिनिधि के रूप में मान्य कर ट्रेडिंग कम्पनी द्वारा राज्य के आई.पी.पी. एवं सी.पी.पी. के विद्युत के कारोबार को राज्य की प्रतिनिधि संस्था के रूप में किया गया करोबार के रूप में परिभाषित किया गया है। इस प्रकार विद्युत के कारोबार से हुई आय में से आवश्यक व्यय, कमीशन, स्थापना व्यय आदि के समायोजन के बाद उपलब्ध विशुध्द आय का 60 प्रतिशत हिस्सा होल्डिंग कम्पनी में अंशपूंजी के रूप में निवेश किया जाएगा। इस निर्णय से भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विद्युत क्षेत्र के विकास के लिए विभिन्न कम्पनियों को पर्याप्त आर्थिक सहायता मिलेगी। ट्रेडिंग कम्पनी को प्राप्त हुई शेष विशुध्द आय का 40 प्रतिशत अंश वित्त विभाग द्वारा निर्धारित मांग शेष में प्रत्येक वित्तीय वर्ष की समाप्ति के तीस दिन के अंदर राज्य के कोष में जमा किया जाएगा। इस राशि का उपयोग राज्य शासन द्वारा जनकल्याणकारी योजनाओं में किया जाना प्रस्तावित है।
छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल की संरचना में उत्पादन संकाय और टी.एण्ड डी. संकाय के तहत ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन के कार्यालयों और सम्पत्तियों को अलग-अलग रूप से रखा गया है। केवल ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन संकाय में वरिष्ठ स्तर पर कर्मचारियों का स्थानांतरण विभिन्न कार्यालयों में होता रहा है। उत्पादन संकाय के तहत कार्यरत कर्मी एवं संस्थान पूर्व से ही अलग पहचान के रूप में कार्यरत थे। संशोधित नियम में यह प्रयास किया गया है कि विद्युत मंडल के वर्तमान स्वरूप में आंशिक संशोधन करते हुए विभिन्न विद्युत कम्पनियों की कार्यशैली को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। इस व्यवस्था से इनकी कार्य प्रणाली में स्थायित्व आएगा। कर्मियों के बंटवारे संबंधी प्राप्त अभ्यावेदनों को निराकरण के लिए उच्च स्तरीय शिकायत निवारण समिति बनाई गयी है और इस समिति द्वारा पारित निर्णय पर अपील का निराकरण राज्य शासन स्तर पर किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि 19 दिसम्बर 2008 को अधिसूचित छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल अंतरण योजना (ट्रांसफर स्कीम) नियम 2008 के तहत एक जनवरी 2008 से राज्य में विभिन्न पांच कम्पनियां कार्यरत थी। वर्ष 2008 में अधिसूचित अंतरण योजना में कर्मियों का बंटवारा जो जहां हैं, जैसी स्थिति में रखा गया था।
नये नियम के अनुसार होल्डिंग के कम्पनी के कारोबार में स्पष्टता लाने के लिए राज्य में एम.ओ.यू. के द्वारा प्रस्तावित विद्युत उत्पादन परियोजनाओं, संयुक्त क्षेत्र में प्रस्तावित विद्युत उत्पादन परियोजनाओं के कार्यों की निगरानी प्रगति की समीक्षा के लिए होल्डिंग कम्पनी को उत्तरदायी बनाया गया है। पूर्व में जारी ट्रांसफर स्कीम के प्रावधानो के पालन में होल्डिंग कम्पनी को अपने अधीन पृथक से समन्वय के कार्यों के लिए अन्य कम्पनियों पर निर्भर रहना पड़ रहा था। संशोधित नियमों के तहत होल्डिंग कम्पनी को समन्वय और परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा तथा संयुक्त क्षेत्र की परियोजनओं से संबंधित विभिन्न दायित्वों के पालन के लिए अलग से कार्यालय की स्थापना की अनुमति है। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल के समय विभिन्न सेवाओं का सम्पादन केन्द्रीय स्तर पर हो रहा था। विभिन्न कम्पनियों के गठन के बाद प्राथमिक सेवाओं का वर्गीकरण करते हुए आवश्यकतानुसार उन्हें संबंधित विद्युत कम्पनियों में बांटा गया है। वर्ष 2008 में जारी ट्रांसफर स्कीम में सहभागित सेवाएं जैसे चिकित्सा सेवाएं, सचिवालयीन कार्य, वितरण एवं पारेषण निकाय के भंडार आदि कार्यों को होल्डिंग कम्पनी के तहत रखा गया था। कम्पनियों के कारोबार को व्यवस्थित करने के लिए नई ट्रांसफर स्कीम में सहभागित सेवाओं को कम्पनी की आवश्कता के अनुसार वर्गीकृत कर दिया गया है।
नई ट्रांसफर स्कीम में एक जनवरी 2008 से 31 मार्च 2010 की अवधि को ट्रांजिशन पिरियड माना गया है। इस अवधि में ट्रेडिंग कम्पनी द्वारा विद्युत के क्रय-विक्रय से प्राप्त आय होल्डिंग कम्पनी में इक्वीटी के रूप में निवेश की जाएगी और होल्डिंग कम्पनी द्वारा इस राशि पुर्ननिवेश विभिन्न विद्युत कम्पनियों में किया जाएगा। इससे राज्य में गठित विभिन्न विद्युत कम्पनियों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। नई ट्रांसफर स्कीम में 01 अप्रैल 2010 के बाद विद्युत ट्रेडिंग कम्पनी को राज्य शासन का प्रतिनिधि के रूप में मान्य कर ट्रेडिंग कम्पनी द्वारा राज्य के आई.पी.पी. एवं सी.पी.पी. के विद्युत के कारोबार को राज्य की प्रतिनिधि संस्था के रूप में किया गया करोबार के रूप में परिभाषित किया गया है। इस प्रकार विद्युत के कारोबार से हुई आय में से आवश्यक व्यय, कमीशन, स्थापना व्यय आदि के समायोजन के बाद उपलब्ध विशुध्द आय का 60 प्रतिशत हिस्सा होल्डिंग कम्पनी में अंशपूंजी के रूप में निवेश किया जाएगा। इस निर्णय से भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विद्युत क्षेत्र के विकास के लिए विभिन्न कम्पनियों को पर्याप्त आर्थिक सहायता मिलेगी। ट्रेडिंग कम्पनी को प्राप्त हुई शेष विशुध्द आय का 40 प्रतिशत अंश वित्त विभाग द्वारा निर्धारित मांग शेष में प्रत्येक वित्तीय वर्ष की समाप्ति के तीस दिन के अंदर राज्य के कोष में जमा किया जाएगा। इस राशि का उपयोग राज्य शासन द्वारा जनकल्याणकारी योजनाओं में किया जाना प्रस्तावित है।
छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल की संरचना में उत्पादन संकाय और टी.एण्ड डी. संकाय के तहत ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन के कार्यालयों और सम्पत्तियों को अलग-अलग रूप से रखा गया है। केवल ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन संकाय में वरिष्ठ स्तर पर कर्मचारियों का स्थानांतरण विभिन्न कार्यालयों में होता रहा है। उत्पादन संकाय के तहत कार्यरत कर्मी एवं संस्थान पूर्व से ही अलग पहचान के रूप में कार्यरत थे। संशोधित नियम में यह प्रयास किया गया है कि विद्युत मंडल के वर्तमान स्वरूप में आंशिक संशोधन करते हुए विभिन्न विद्युत कम्पनियों की कार्यशैली को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। इस व्यवस्था से इनकी कार्य प्रणाली में स्थायित्व आएगा। कर्मियों के बंटवारे संबंधी प्राप्त अभ्यावेदनों को निराकरण के लिए उच्च स्तरीय शिकायत निवारण समिति बनाई गयी है और इस समिति द्वारा पारित निर्णय पर अपील का निराकरण राज्य शासन स्तर पर किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि 19 दिसम्बर 2008 को अधिसूचित छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल अंतरण योजना (ट्रांसफर स्कीम) नियम 2008 के तहत एक जनवरी 2008 से राज्य में विभिन्न पांच कम्पनियां कार्यरत थी। वर्ष 2008 में अधिसूचित अंतरण योजना में कर्मियों का बंटवारा जो जहां हैं, जैसी स्थिति में रखा गया था।
क्रमांक-4630/हर्षा

