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ज्ञान की रोशनी के साथ सौर ऊर्जा से भी आलोकित हुए अबूझमाड़ के आवासीय स्कूल

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सूर्य देवता की नि:शुल्क बिजली से रौशन हो रहे अस्पताल, छात्रावास, राशन दुकान और शिक्षक आवास

 रायपुर 03 दिसम्बर 09

छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ इलाके में सघन वनों के बीच स्थित पांच गांवों के आवासीय स्कूल इन दिनों ज्ञान की रोशनी के साथ-साथ सौर ऊर्जा के प्रकाश से भी आलोकित हो रहे हैं। इतना ही नहीं बल्कि नक्सल हिंसा पीड़ित जिले के इन गांवों में राज्य सरकार के उपक्रम 'छत्तीसगढ़ अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण' की मदद से अस्पताल, राशन दुकान, बच्चों के छात्रावास और शिक्षक आवास गृहों में भी सूर्य की रोशनी से बिजली बना कर रात्रिकालीन प्रकाश व्यवस्था सहित हर वह बुनियादी सुविधा मुहैया करा दी गई है, जिसके लिए आम तौर पर परम्परागत बिजली की जरूरत होती है। इनमें विशेष पिछड़ी अबूझमाड़िया जनजाति जनजाति ग्राम आकाबेड़ा, कोतुल, कच्चापाल, एरकभट्टी और कुंदला नामक गांव शामिल हैं।

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उल्लेखनीय है कि इन गांवों में जिला मुख्यालय नारायणपुर स्थित प्रसिध्द समाज सेवी संस्था 'रामकृष्ण मिशन आश्रम' द्वारा अबूझमाड़िया जनजाति के सामाजिक-आर्थिक और शैक्षणिक विकास के लिए राज्य शासन के सहयोग से विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। संस्था द्वारा अस्पतालों और उचित मूल्य दुकानों का भी संचालन किया जा रहा है। भौगोलिक दृष्टि से काफी दुर्गम क्षेत्र में होने के कारण इन गांवों तक परम्परागत बिजली पहुंचाने में काफी दिक्कतें आ रही थीं। इन कठिनाईयों की जानकारी मिलने पर मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने प्रदेश सरकार के उपक्रम छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण को वहां सौर ऊर्जा प्रणाली से बिजली पहुंचाने के निर्देश दिए। अभिकरण द्वारा इनमें से प्रत्येक गांव में फोटो वोल्टाईक पैनल लगाकर 2.9 किलो वाट के सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए गए हैं।

इन संयंत्रों के माध्यम से इन सभी पांच आवासीय स्कूलों सहित वहां के अस्पताल, उचित मूल्य की दुकान, बालक-बालिकाओं के छात्रावास और शिक्षकों के आवास गृहों में बिजली की आपूर्ति होने लगी है, इससे वहां पंखे और टेलीविजन भी चलने लगे हैं। नलकूप से पानी निकालने के लिए सौर ऊर्जा आधारित पम्प का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रत्येक आवासीय स्कूल में 25 सी.एफ.एल. बल्ब, 25 टयूब लाईट और पांच स्ट्रीट लाईट सहित एक टेलीविजन डिश एंटीना भी संचालित है। स्कूली बच्चे अब वहां सौर ऊर्जा की बिजली से कम्प्यूटर भी सीख रहे हैं। इन सभी पांच आवासीय शिक्षा केन्द्रों में मिडिल स्कूल तक की पढ़ाई की सुविधा दी जा रही है। इनमें 665 बच्चे निवास करते हैं। इनमें 175 बालिकाएं भी शामिल हैं। अधिकांशत: लगभग 85 प्रतिशत बच्चे विशेष पिछड़ी अबूझमाड़िया जनजाति के हैं। रामकृष्ण मिशन आश्रम नारायणपुर के स्वामी ब्रम्ह योगानंद इन संस्थाओं के प्रभारी हैं। उन्होंने बताया कि सौर ऊर्जा से की गई विद्युत व्यवस्था के फलस्वरूप अब इन दूर-दराज के शिक्षा केन्द्रों में बिजली की समस्या बिल्कुल भी नहीं है। स्वामी ब्रम्ह योगानंद ने इसके लिए मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को और छत्तीसगढ़ अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण्ा को धन्यवाद देते हुए कहा कि सौर ऊर्जा से मिल रही नि:शुल्क बिजली के चलते अब यह जरा भी महसूस नहीं होता कि ये गांव अबूझमाड़ जैसे अत्यधिक दुर्गम और पिछड़े इलाकों में हैं। उन्होंने बताया कि सौर ऊर्जा संयंत्र लगने के पहले इन आवासीय स्कूलों में संस्था द्वारा जनरेटर से बिजली की व्यवस्था की जा रही थी, जिसमें डीजल खरीदने और उसके परिवहन में काफी पैसा खर्च हो जाता था। इसके अलावा धुंआ भी काफी फैलता था। अब ऐसी कोई समस्या नहीं रह गई है। सूर्य देवता की कृपा से सौर ऊर्जा प्रणाली के जरिए हमें नि:शुल्क बिजली मिल रही है। इस बिजली के लिए कोई बिल नहीं आता।

स्वामीजी ने बताया कि इन पांचों शिक्षा केन्द्रों में पहले पेय जल के लिए हैंड पम्पों से पानी निकाला जाता था, जिसमें जमीन के भीतर नलकूप से सिर्फ 20 से 25 फीट गहराई का पानी आता था। यह पानी पर्याप्त साफ-सुथरा नहीं होने के कारण स्कूली बच्चों को अक्सर पानी से संबंधित सामान्य बीमारियां होती रहती थीं, लेकिन अब इन केन्द्रों में सबमर्सिबल पम्प लगा कर दो सौ से ढाई सौ फीट गहराई का पानी निकाला जाता है, जो काफी स्वच्छ होता है। इसके फलस्वरूप पिछले एक वर्ष में इन आवासीय स्कूलों के बच्चों में जल-जनित कोई बीमारी नहीं हुई है। स्वामी ब्रम्ह योगानंद ने यह भी बताया कि सौर ऊर्जा संयंत्रों से की गई बिजली की व्यवस्था स्कूली बच्चों की पढ़ाई में भी मददगार साबित हो रही है। पिछले साल आठवीं की बोर्ड परीक्षा में यहां के सभी बच्चों का रिजल्ट 90 प्रतिशत से अधिक रहा। अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण के अधिकारियों ने बताया कि जिस दिन सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना की गई, वह इन आवासीय स्कूलों के बच्चों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं था। सभी बच्चों ने पूरी रात बिजली जला कर रोशनी की और उत्सव मनाया।

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