नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सीमेंट कांक्रीट सड़कें हो सकती हैं बेहतर विकल्प- श्री बृजमोहन अग्रवाल
'सीमेन्ट कांक्रीट सड़क और वाइट टापिंग' पर आयोजित कार्यशाला में लोक निर्माण मंत्री

लोक निर्माण मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा है कि राज्य के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सड़कों का निर्माण एक गंभीर चुनौती है। इन क्षेत्रों में सीमेन्ट कांक्रीट सड़कें बनाना उपयुक्त होगा, क्योंकि ये सड़कें डामर से बनी सड़कों से ज्यादा टिकाऊ होंगी। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों के साथ-साथ पूरे प्रदेश के लिए सीमेन्ट कांक्रीट सड़कें डामर की सड़कों का अच्छा विकल्प हो सकती है, परन्तु विशेषज्ञों के अनुसार सीमेन्ट कांक्रीट की सड़कें बनाने में समय और लागत अधिक आती है। सीमेंट कांक्रीट सड़कों की लागत कम करने का रास्ता निकाला जाना चाहिए। श्री अग्रवाल आज यहां नवीन विश्राम भवन में राज्य शासन के लोक निर्माण विभाग के सहयोग से सीमेन्ट मेनुफेक्चरिंग एसोसिएशन और लाफार्ज सीमेन्ट द्वारा संयुक्त रूप से 'सीमेन्ट कांक्रीट सड़क और वाइट टापिंग' पर चर्चा करने आयोजित कार्यशाला को सम्बोधित कर रहे थे। इस कार्यशाला में लोक निर्माण विभाग के अभियंता, सीमेन्ट उद्योगों के प्रतिनिधि और सीमेन्ट कांक्रीट सड़कों से जुड़े देश के अनेक विशेषज्ञ शामिल हुए।
श्री अग्रवाल ने कहा कि नये राज्य छत्तीसगढ़ में जनता को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में अधोसंरचना विकास के कार्य तेजी से हो रहे हैं। मूलभूत सुविधाओं के अन्तर्गत प्रदेश में सड़कों का विस्तार भी राज्य सरकार की प्राथमिकता में शामिल है, इसीलिए कम लागत में गुणवत्तापूर्ण सड़कें बनाना हमारे लिए जरूरी है। श्री अग्रवाल ने कहा कि सीमेंट कांक्रीट सड़कें बनाने में अधिक समय लगता है। इसे ध्यान में रखते हुए विशेषज्ञों, अभियंताओं और सीमेन्ट उद्योगों के प्रतिनिधियों को इस पर विचार करना चाहिए कि सीमेन्ट के ब्लाक से सीमेन्ट कांक्रीट सड़कें बनाना क्या ज्यादा लाभदायक होगा। उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सीमेन्ट के ब्लाक तैयार कर सड़कें बनाने की तकनीक विकसित होने से इन क्षेत्रों के लोगों को काफी सुविधा होगी। कार्यशाला में सीमेन्ट के ब्लाक से सड़क बनाने के उपायों पर चर्चा कर निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह भी चाहते हैं कि नक्सली क्षेत्रों में सीमेन्ट कांक्रीट सड़कें बनायी जाएं। श्री अग्रवाल ने कहा कि डामर सड़कों के निर्माण के बाद पेयजल पाईप लाईन, सिवर सिस्टम, नल कनेक्शन, वायरिंग आदि करने में बड़ी दिक्कतें आती हैं। सीमेन्ट कांक्रीट सड़कें बनाने से इन दिक्कतों को कैसे दूर किया जा सकता है। यह भी विचारणीय विषय है। श्री अग्रवाल ने कहा कि कम लागत में गुणवत्तापूर्ण सीमेंट कांक्रीट सड़कें बनाने के लिए तकनीक विकसित करने की जरूरत है। छत्तीसगढ़ के ताप विद्युत संयंत्रों से बड़ी मात्रा में फ्लाईऐश निकलता है। राज्य में लाइम स्टोन भी बहुतायत मात्रा में उपलब्ध है। क्या कम लागत पर मजबूत और टिकाऊ सीमेन्ट कांक्रीट सड़कें बनाने में फ्लाईऐश और लाईम स्टोन के चूरे का उपयोग किया जा सकता है। इस पर भी विशेषज्ञ विचार करें। उन्होंने कहा कि सीमेन्ट कम्पनियों को छत्तीसगढ़ में सीमेन्ट कांक्रीट सड़कें बनाने के लिए कम कीमत पर सीमेन्ट उपलब्ध कराने की पहल करनी चाहिए। इसके लिए राज्य शासन की ओर से सीमेन्ट कम्पनियों को भी यथासंभव सहयोग दिया जाएगा। इस अवसर पर लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता श्री पी.के. जनवदे ने कार्यशाला आयोजन के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला।

