बाढ़ और राहत कार्यों के लिए कार्ययोजना बनाने कलेक्टरों को निर्देश जारी
पहुंचविहीन क्षेत्रों में मानसून से पहले खाद्यान और
जीवनरक्षक दवाईयों की व्यवस्था करने के निर्देश
रायपुर एक मई 2010
राज्य शासन द्वारा आगामी मानसून सत्र में संभावित भारी वर्षा और बाढ़ की स्थिति में बचाव और राहत कार्यों के लिए विस्तृत कार्ययोजना बनाने की तैयारी की जा रही है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव और राहत आयुक्त श्री सुनील कुजूर ने यहां मंत्रालय से जारी एक महत्वपूर्ण परिपत्र में जिला कलेक्टरों को इस संबंध में जरूरी निर्देश जारी कर दिए हैं। उन्होंने सभी जिला कलेक्टरों से कहा है कि मानसून के आगमन से पहले संबंधित विभागों के जिला अधिकारियों की बैठक बुलाकर आपदा राहत कार्यों की विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर ली जाए। उन्होंने कहा है कि ऐसे पहुंचविहीन क्षेत्रों की भी पहचान कर ली जाए, जहां बाढ़ की स्थिति में पहुंचना संभव नहीं होगा। ऐसे क्षेत्रों में मानसून से पहले पर्याप्त मात्रा में खाद्य सामग्री, जीवन रक्षक दवाईयां उपलब्ध कराने के साथ ही पेयजल की शुध्दता और स्वच्छता की दृष्टि से कुओं और हैण्डपम्पों में ब्लीचिंग पाऊडर डलवाने की व्यवस्था की जाए।
राजस्व सचिव ने जिला कलेक्टरों से कहा है कि ऐसे क्षेत्रों की पहचान कर ली जाए, जहां प्रतिवर्ष बाढ़ आती है। इन क्षेत्रों की सत्त निगरानी की व्यवस्था की जाए। ऐसे क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति निर्मित होने पर नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और उनके ठहरने के लिए कैम्प आदि की व्यवस्था भी कार्ययोजना में शामिल किया जाए। उन्होंने कहा है कि जिलों में बाढ़ से बचाव के लिए जो भी उपकरण उपलब्ध हैं, उनकी दुरूस्ती कराकर उपयोग के लिए तैयार रखें। जिन जिलों में मोटर बोट्स उपलब्ध है, उसकी जानकारी राहत आयुक्त कार्यालय को दी जाए। जिन जिलों में बड़ी नदी बहती है, उन जिलों में नदी के जल स्तर पर बराबर नजर रखी जाए और जल स्तर खतरे के निशान पर पहुंचने की संभावना होने पर इसकी पूर्व सूचना राज्य स्तरीय नियंत्रण कक्ष और निचले जिलों को भी दी जाए। बाढ़ की स्थिति में यदि सेना की मदद की आवश्यकता महसूस होती है, तो इसकी सूचना राहत आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से दूरभाष पर दी जाए। उन्होंने कहा कि वर्षाकाल में जलाशयों से जल छोड़ने पर विशेष ध्यान रखा जाए। बांधों का जल स्तर बढ़ने पर निचले जिलों और समीवर्ती राज्यों को भी बारह घंटे पहले सूचना दी जाए।
उन्होंने कहा है कि नगरीय क्षेत्रों में बाढ़ की र्स्थिति प्राय: नाले और नालियों के अवरूध्द होने के कारण होती है। इसलिए नगरीय निकायों के माध्यम से मानसून से पहले नाले और नालियों की साफ-सफाई कराना सुनिश्चित किया जाए। कलेक्टरों को बाढ़ राहत और बचाव कार्यों की सूचना आदान-प्रदान करने के लिए जिला स्तर पर नियंत्रण कक्ष की स्थापना करने के निर्देश दिए गए हैं। यह नियंत्रण कक्ष चौबीसों घंटे कार्य करेगा। समस्त वर्षा मापक केन्द्रों पर वर्षा मापक यंत्रों की स्थापना करने और वर्षा के आंकड़े संकलित करने के लिए कर्मचारियों की डयूटी लगाने के निर्देश दिए गए हैं। बाढ़ की स्थिति और नुकसान की जानकारी नियमित रूप से राहत आयुक्त कार्यालय के दूरभाष क्रमांक 0771-4080593, 2221242 फैक्स 4034823 और ई-मेल आईडी relief_cg@rediffmail.com पर देने के निर्देश दिए गए हैं।

