महंगाई पर नियंत्रण के लिए अनाज और दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर कर की दरें करे कम : श्री अमर अग्रवाल
जी.एस.टी. पर वित्त एवं राजस्व मंत्रियों की सशक्त समिति की बैठक में छत्तीसगढ़ के राजस्व मंत्री की मांग
रायपुर 11 फरवरी 2011
छत्तीसगढ़ के राजस्व मंत्री श्री अमर अग्रवाल ने बढ़ती महंगाई पर नियंत्रण के लिए अनाज और दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर कर की दरें कम करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पूर्व में आयोजित सशक्त समिति की बैठक में भी केन्द्रीय वित्त मंत्री श्री प्रणव मुखर्जी को इस संबंध में प्रस्ताव दिया गया था लेकिन इस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि महंगाई पर नियंत्रण के लिए यह आवश्यक है अन्यथा जी.एस.टी. लागू करने का आम जनता की ओर से कड़ा विरोध होगा। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के प्रतिनिधि के रूप में श्री अमर अग्रवाल ने यह मांग आज नई दिल्ली में जी.एस.टी. पर राज्यों के वित्त एवं राजस्व मंत्रियों की सशक्त समिति की बैठक में की। बैठक की अध्यक्षता वित्त मंत्री श्री प्रणव मुखर्जी ने की। बैठक में अन्य राज्यों के वित्त मंत्री भी उपस्थित थे।
श्री अमर अग्रवाल ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा राज्यों को भेजे गये संशोधित संवैधानिक संशोधन के प्रारूप में अंतर्राज्यीय संव्यवहारों पर आरोपित जी.एस.टी. का केन्द्र एवं राज्यों के मध्य बंटवारे को स्पष्ट नहीं किया है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में सशक्त समिति द्वारा पूर्व में दिए सुझाव को भी शामिल नहीं किया गया है। श्री अग्रवाल ने इसे सम्मिलित करने की मांग की। उन्होने मांग कि की छत्तीसगढ़ द्वारा सुझाया गया था कि, प्राकृतिक आपदा अथवा आदिवासी एवं खनन क्षेत्र के विकास के लिए आम जनता के हित में राज्यों को सेस तथा सरचार्ज लगाने का अधिकार दिया जाना चाहिए। प्रस्तावित प्रारूप में इसका ध्यान नहीं रखा गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्यों को सेस और सरचार्ज लगाने का अधिकार दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि राज्य द्वारा पेट्रोलियम उत्पादों के समान कोयले को भी जी.एस.टी. की परिधि से बाहर रखने की मांग की थी। इस पर सशक्त समिति द्वारा अपनी सहमति भी दी थी, लेकिन प्रारूप में इसका उल्लेख नहीं है। उन्होंने पुन: कोयलों को जी.एस.टी. से मुक्त वस्तुओं की सूची में शामिल करने की मांग की है। बैठक में उन्होंने प्रारूप में पंचायतों तथा नगरपालिकाओं को स्थानीय क्षेत्र में माल के प्रवेश पर कर लगाने एवं वसूल करने के प्रावधान के बारे में उल्लेख करते हुए कहा कि इससे राज्य सरकार द्वारा पूर्व में आक्ट्राय के रूप में प्रवेशकर वसूलने और स्थानीय निकायों को समान वितरण करने की प्रक्रिया समाप्त हो जायेगी। उन्होंने कहा कि नयी व्यवस्था में सभी स्थानीय निकाय अपनी सुविधा के अनुसार अलग-अलग कर की दरें लागू करेंगी। यह जी.एस.टी. की अवधारणा के विपरीत है, क्योंकि राज्य में अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग कर की दरों में एकरूपता लाया जाना संभव नहीं हो सकेगा। बैठक में वाणिज्यकर आयुक्त श्री गणेष शंकर मिश्रा भी उपस्थित थे।

