मुख्यमंत्री कन्यादान योजना :छत्तीसगढ़ की तीस हजार से अधिक बेटियों के हाथ पीले हुए
रायपुर 08 जून 2011
राज्य सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ में संचालित 'मुख्यमंत्री कन्यादान योजना' के तहत अब तक 30 हजार से अधिक विवाह योग्य बेटियों ने दाम्पत्य जीवन की शुरूआत की है। उल्लेखनीय है कि गरीब परिवारों की विवाह योग्य कन्याओं के विवाह में होने वाली आर्थिक कठिनाईयों को दूर करने और दहेज के लेन-देन को रोकने के लिए राज्य शासन द्वारा वित्तीय वर्ष 2005-06 में कन्यादान योजना शुरू की गई। योजना के तहत राज्य के सभी जिलों में महिला और बाल विकास विभाग द्वारा स्थानीय समाज सेवी संस्थाओं और दान दाताओं की सहायता से सामूहिक विवाह समारोहों का आयोजन किया जाता है। इन समारोह में कन्याओं का विवाह उनके धार्मिक और पारंपरिक रीति-रिवाजों से सम्पन्न कराया जाता है।
मुख्यमंत्री कन्यादान योजना में अब तक का सबसे बड़ा सामूहिक विवाह समारोह जशपुर जिले के कुनकुरी में पिछले महीने की 15 तारीख को आयोजित किया गया, जिसमें एक हजार 532 जोड़ों ने गृहस्थ जीवन में प्रवेश किया। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने स्वयं समारोह में उपस्थित होकर इन सभी वर-वधुओं को आशीर्वाद प्रदान किया। इसी प्रकार विगत एक अप्रैल को रायगढ़ जिले के तमनार विकास खण्ड के ग्राम तराईमाल में योजना के तहत 892 जोड़ों का विवाह हुआ। यहां भी मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने वैवाहिक जोड़ों को आशीर्वाद प्रदान किया। महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के प्रथम वर्ष 2005-06 में 4535 कन्याओं ने गृहस्थ जीवन में प्रवेश किया। इसी प्रकार वर्ष 2006-07 में 4595 कन्याओं, 2007-08 में 5430 कन्याओं, वर्ष 2008-09 में 4468 कन्याओं, वर्ष 2009-10 चार हजार 619 और 2010-11 में चार हजार 660 कन्याओं का विवाह किया गया, जबकि चालू वित्तीय वर्ष 2011-12 में अब तक ढाई हजार से अधिक बेटियों ने वैवाहिक जीवन में प्रवेश किया है। उन्होंने बताया कि योजना के तहत सामूहिक विवाह समारोहों के आयोजन में समाज सेवी संस्था, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय जनता का भी पूरा सहयोग मिलता है। उन्होंने बताया कि गरीब परिवार की बेटियों के विवाह में होने वाली आर्थिक समस्याओं के निराकरण, विवाह के अवसर पर होने वाली फिजूल खर्ची को रोकने, सादगीपूर्ण विवाहों को बढ़ावा देने, सामूहिक विवाहों के आयोजनों के माध्यम से निर्धनों के आत्मसम्मान में वृध्दि और विवाहों में दहेज के लेन-देन को रोकने के लिए यह योजना संचालित की जा रही है।
विभागीय अधिकारियों ने बताया कि योजना में गरीबी रेखा से नीचे जीवन बसर करने वाले परिवार की 18 वर्ष की अधिकतम दो कन्याओं को दस-दस हजार रूपए तक की आर्थिक सहायता दी जाती है। जिसमें से साढ़े सात हजार रूपए की आर्थिक सहायता सामाग्री के रूप में दी जाती है, जो कन्या की आवश्यकता के अनुसार निर्धारित की जाती है। इसके अलावा हर वैवाहिक जोड़े को पांच-पांच सौ रूपए का ड्रॉफ्ट या चेक प्रदान किया जाता है। जबकि सामूहिक विवाह के आयोजन और व्यवस्था में एक कन्या के लिए 2000 रूपए तक खर्च की जा सकती हैं, इस प्रकार योजना में एक कन्या के विवाह के लिए दस रूपए तक की आर्थिक सहायता देने का प्रावधान है। उन्होंने बताया कि इस योजना में एक कन्या के विवाह के लिए पूर्व में शासन द्वारा दी जाने वाली पांच हजार रूपए की सहायता राशि को नये वित्तीय वर्ष 2011-12 में बढ़ाकर दस हजार रूपए कर दी गयी। योजना के तहत अब तक तीस हजार से अधिक बेटियों का विवाह किया जा चुका है।

