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मुख्यमंत्री कन्यादान योजना- अब तक 25 हजार बेटियों ने किया गृहस्थ जीवन में प्रवेश

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When Jul 20, 2010
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    रायपुर 20 जुलाई 2010

 छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा संचालित मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत अब तक लगभग 25 हजार बेटियों ने सामूहिक विवाह समारोहों के माध्यम से गृहस्थ जीवन में प्रवेश किया है। उल्लेखनीय है कि गरीब परिवार की  विवाह योग्य कन्याओं के विवाह में होने वाली आर्थिक कठिनाईयों को दूर करने और दहेज के लेन-देन को रोकने के लिए राज्य शासन द्वारा वित्तीय वर्ष 2005-06 में कन्यादान योजना शुरू की गई।
    महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि गरीब परिवार की बेटियों के विवाह में होने वाली आर्थिक समस्याओं के निराकरण, विवाह के अवसर पर होने वाली फिजूल खर्ची को रोकने, सादगीपूर्ण विवाहों को बढ़ावा देने, सामूहिक विवाहों के आयोजनों के माध्यम से निर्धनों के आत्मसम्मान में वृद्धि और विवाहों में दहेज के लेन-देन को रोकने के लिए यह योजना संचालित की जा रही है। उन्होंने बताया कि    योजना में गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवार की 18 वर्ष की अधिकतम दो कन्याओं को चार-चार हजार रूपए तक की आर्थिक सहायता सामग्री के रूप में दी जाती है, जो कन्या की आवश्यकता के अनुसार निर्धारित की जाती है, जबकि सामूहिक विवाह के आयोजन में एक कन्या के लिए 1000 रूपए तक खर्च की जा सकती हैं, इस प्रकार योजना में एक कन्या के विवाह के लिए 5000 रूपए तक की आर्थिक सहायता देने का प्रावधान है। उन्होंने बताया कि योजना के तहत अब तक 25000 से अधिक विवाह योग्य कन्याओं का विवाह किया जा चुका है।
    विभागीय अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री कन्या दान योजना के तहत वर्ष 2005-06 में 4535 कन्याओं का विवाह किया गया। इसी प्रकार वर्ष 2006-07 में 4595 कन्याओं, 2007-08 में 5430 कन्याओं, वर्ष 2008-09 में 4468 कन्याओं और वर्ष 2009-10 में 5 हजार से अधिक कन्याओं का विवाह किया गया। उन्होंने बताया कि योजना के तहत सामुहिक विवाह समारोह के आयोजन में समाज सेवी संस्था, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय जनता का भी पूरा सहयोग मिलता है। उल्लेखनीय है कि योजना के तहत नक्सल हिंसा और आतंक से पीड़ित आदिवासी बहुल दक्षिण बस्तर (दंतेवाड़ा) जिले में पिछले साल गरीब घरों की 874 बेटियों का विधिवत विवाह सम्पन्न हुआ था और विगत 28 मार्च को भी यहां की 543 बेटियों के हाथ पीले हुए हैं।

क्रमांक-1847/सुनीता



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