आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, स्वास्थ्य कार्यकर्ता और कोटवार जन्म-मृत्यु पंजीयन के सूचनादाता बनेंगे
राज्य स्तरीय अन्तर्विभागीय समिति की बैठक में निर्णय
रायपुर 12 अगस्त 2010
प्रदेश में जन्म-मृत्यु दर के शत्-प्रतिशत पंजीयन के लिए राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं तथा कोटवारों को विधिवत सूचनादाता नियुक्त करने का निर्णय लिया गया और विशेष तौर पर कोटवारों को जन्म मृत्यु पंजीकरण से प्राप्त राशि का 50 प्रतिशत या अधिकतम राशि 50 रूपए मानदेय देने पर सहमति बनी। इस आशय का निर्णय आज यहां मंत्रालय में जन्म मृत्यु पंजीयन हेतु गठित राज्य स्तरीय अन्तर्विभागीय समिति की बैठक में लिया गया। सचिव वित्त एवं योजना श्री आर.एस. विश्वकर्मा की अध्यक्षता में आज मंत्रालय में बैठक सम्पन्न हुई। इस बैठक में राज्य में जन्म और मृत्यु घटनाओं के कम पंजीयन एवं स्थानीय ग्रामीण एवं नगरीय इकाईयों से प्रतिवेदन निर्धारित समय पर प्राप्त नहीं होने के संबंध में चर्चा की गई। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से जनपद पंचायत एवं ग्राम पंचायत सचिवों/कर्मी को प्रतिवेदन यथा-समय प्रेषित करने हेतु निर्देश जारी कराने का निर्णय लिया गया।
जन्म मृत्यु के पंजीयन के सुदृढ़ीकरण हेतु संभाग के संभागायुक्त को संभागीय मुख्य रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) बनाए जाने तथा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को अतिरिक्त जिला रजिस्ट्रार का बनाए जाने का निर्णय लिया गया। साथ ही मुख्य रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) कार्यालय के संयुक्त संचालक (जीवनांक) को संयुक्त मुख्य रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) और सहायक संचालक (जीवनांक) को सहायक मुख्य रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) बनाए जाने का निर्णय लिया गया।
जन्म या मृत्यु की घटनाओं का पंजीयन सामान्यत: 21 दिन के भीतर नि:शुल्क है किन्तु इससे पश्चात् विलंबित शुल्क की राशि 21 दिन किन्तु 30 दिन के भीतर राशि 2 रूपए, 30 दिन के पश्चात किन्तु एक वर्ष के भीतर राशि 5 रूपए एवं एक वर्ष से अधिक के लिए राशि 10 रूपए है जिसे बढ़ाकर क्रमश: 10 रूपए, 50 रूपए एवं 100 रूपए करने की बैठक में अनुशंसा की गई। स्वास्थ्य विभाग के ब्लाक के मेडिकल ऑफिसर, जिला अस्पताल के प्रभारी अधिकारी, सिविल अस्पताल तथा बड़े शैक्षणिक अस्पतालों को जन्म और मृत्यु घटनाओं को उनके अस्पताल में हुई घटनाओं के लिए रजिस्ट्रार अधिसूचित करने के संबंध में निर्णय लिया गया। इसके अतिरिक्त नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों स्थित मुक्तिधाम एवं श्मशान गृह की सूची बनाने, जन्म-मृत्यु के पंजीयन इकाईयों के निरीक्षण करने पर बल दिया गया।

