महिलाओं और बच्चों की तस्करी रोकने के लिए समाज में जागरूकता लाना जरूरी : सुश्री उसेन्डी
रायपुर 18 अगस्त 2010

महिला और बाल विकास मंत्री सुश्री लता उसेंडी ने कहा कि भारत में महिलाओं और बच्चो को मानव तस्करी जैसी घृणित और शर्मनाक गतिविधियों से बचाने के लिए समाज में जागरूकता लाने की जरूरत है। उन्होंने इसके लिए विभागीय अमले की संवेदनशीलता की जरूरत पर बल दिया। सुश्री उसेंडी आज निकटवर्ती ग्राम निमोरा स्थित राज्य ग्रामीण विकास संस्थान में 'मानव तस्करी की रोकथाम 'विषय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण्ा कार्यशाला के प्रथम दिवस के कार्यक्रम को सम्बोधित कर रही थीं। महिला और बाल विकास विभाग के सभी कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास अधिकारी और परियोजना अधिकारी कार्यशाला में प्रशिक्षण ले रहे हैं।

सुश्री उसेंडी ने कहा कि प्रदेश के जशपुर, सरगुजा और रायगढ़ जिले में महिलाओं और बच्चों की तस्करी रोकने के लिए और अधिक मेहनत करने की जरूरत होगी। इसके लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और किशोरी बालिकाओं को भी प्रशिक्षित कर इस काम से जोडें। इस अवसर पर सुश्री उसेंडी ने प्रदेश के कुपोषित बच्चों को सामान्य श्रेणी में लाने के लिए गंभीरतापूर्वक प्रयास करने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिए। उल्लेखनीय है कि मानव तस्करी की समस्या की गंभीरता को देखते हुए इस विषय पर राष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में महिला और बाल विकास विभाग द्वारा विभागीय अधिकारियों को आज से प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रदेश में ट्रेफिकिंग के लिए नोडल अधिकारी श्री राजकुमार देवांगन, रायपुर के जिला सत्र न्यायाधीश श्री संदीप बख्शी, नई दिल्ली की श्रीमती सुलोचना वासुदेवन, प्रेरणा संस्थान मुम्बई के श्री प्रवीण पाटकर और श्रीमती प्रीति पाटकर ने आज प्रशिक्षण प्रदान किया।

