पोषण पुनर्वास केन्द्रों में सुधर रही है बच्चों की सेहत
छत्तीसगढ़ में बीस पोषण पुनर्वास केन्द्र संचालित
रायपुर 24 अगस्त 2011
राज्य सरकार द्वारा कुपोषण से पीड़ित बच्चों की देखभाल के लिए शुरू की गई पोषण पुनर्वास केन्द्रों में कुपोषित बच्चों की सेहत में सुधार आने लगा है। इन केन्द्रों में कुपोषित बच्चों को ना केवल पौष्टिक आहार दिया जा रहा है बल्कि उनका नि:शुल्क उपचार भी किया जा रहा है। जांजगीर-चांपा जिला अस्पताल के पोषण पुनर्वास केन्द्र में कुपोषित छह बच्चों को जून 2011 में भर्ती किया गया था। भर्ती के दौरान चार वर्षीय सुप्रिया लदेर का वजन 11 किलोग्राम, चार वर्षीय सुषमा लदेर का वजन 12 किलोग्राम, ढाई वर्ष की सृष्टि लदेर का वजन 8 किलोग्राम, पांच वर्षीय किशन ताम्रकर का वजन 12 किलोग्राम, तीन वर्ष के अनुज ताम्रकर का वजन 11 किलो तथा चार वर्षीय सुमन टंडन का वजन केवल 10 किलोग्राम था। ये सभी बच्चे जांजगीर के वार्ड क्रमांक एक में स्थित आंगनबाड़ी केन्द्र के थे। इन बच्चों को आंगनबाड़ी में पोषण आहार देने बाद भी उनकी सेहत में सुधार नहीं हो पा रहा था।
आंगनबाड़ी केन्द्र की कार्यकर्ता ने बच्चों को 21 जून 2011 को जिला चिकित्सालय जांजगीर पोषण पुर्नवास केन्द्र में भर्ती कराया। पोषण पुनर्वास केन्द्र में इन बच्चों को लगातार पन्द्रह दिन रखकर उन्हें पौष्टिक आहार देने के साथ ही जरूरी दवाईयां भी दी गई। इसके बाद उनके स्वास्थ्य में आशातीत सुधार हुआ और उनका वजन भी आधा से एक किलोग्राम तक बढ़ा। पन्द्रह दिनों में ही सुप्रिया का वजन 700 ग्राम, सुषमा का वजन 600 ग्राम, सृष्टि का वजन एक किलोग्राम, किशन का वजन 900 ग्राम, अनुज का वजन एक किलो ग्राम तथा सुमन का वजन 500 ग्राम बढ़ गया। पोषण पुनर्वास केन्द्र में बच्चों के साथ उनकी माताओं को घर में ही संतुलित पोषण आहार बनाने की जानकारी दी गई। अब ये सभी बच्चे स्वस्थ हैं और उन्हें घर भेज दिया गया है।
ज्ञातव्य है कि जांजगीर-चांपा के अलावा रायपुर, धमतरी, कोरबा अम्बिकापुर, बिलासपुर, दंतेवाड़ा, दुर्ग, जशपुर, कांकेर, कवर्धा, कोरिया, महासमुंद, रायगढ़ और जिला अस्पताल राजनांदगांव में पोषण पुनर्वास केन्द्र की स्थापना की गई है। इसके अलावा पांच सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पेण्ड्रारोड, बीजापुर, नारायणपुर, कोण्डागांव और गरियाबंद में भी पोषण पुनर्वास केन्द्र खोले गए हैं। उपस्वास्थ्य केन्द्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र और आंगनवाड़ी केन्द्रों में बच्चों के वजन, कुपोषण के लक्षण और परीक्षण के आधार पर कुपोषित बच्चों को चिन्हांकित किया जाता है। आंगनबाड़ी केन्द्र में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता द्वारा कुपोषित बच्चों का चिन्हांकन किए जाने पर उन्हें प्रति प्रकरण पचास रूपए की प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है। बच्चों के चिन्हांकन के बाद उन्हें उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र और जिला अस्पताल के पोषण पुनर्वास केन्द्र भेजा जाता है। योजना के तहत कुपोषित बच्चों को प्रथम संदर्भन इकाई याने सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र भेजे जाने पर बच्चे के अभिभावक को आने-जाने के लिए दो सौ रूपए, कुपोषित बच्चों को द्वितीय संदर्भन इकाई याने जिला अस्पताल भेजे जाने पर 750 रूपए आने-जाने का खर्चा दिये जाने का प्रावधान है।

