बच्चों को अनिवार्य शिक्षा सभी की नैतिक जिम्मेदारी-जिला सत्र न्यायाधीश श्री बक्शी
बाल दिवस के अवसर पर 'किशोर न्याय और बच्चों के अधिकार' विषय पर जागरूकता कार्यक्रम
रायपुर 14 नवम्बर 2010

बाल दिवस के अवसर पर आज माना स्थित बाल सम्प्रेक्षण गृह में किशोर न्याय बोर्ड द्वारा 'किशोर न्याय और बच्चों के अधिकार' विषय पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं जिला सत्र न्यायाधीश रायपुर श्री संदीप बक्शी ने कार्यक्रम में कहा कि छह से 14 साल तक के बच्चों को अनिवार्य शिक्षा दिलाना सभी की नैतिक जिम्मेदारी है।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने किशोर न्याय बोर्ड में जागरूकता कार्यक्रम में कहा कि भारतीय संविधान में छह साल से 14 साल तक के बच्चों को शिक्षा का अधिकार प्रदान किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक माता-पिता, संरक्षक, शिक्षा अधिकारी, ग्राम पंचायत के पदाधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ताओं कि यह नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वे बच्चों को अनिवार्य रूप से शिक्षित करें। बच्चों को शिक्षा का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित करें। श्री बक्शी ने कहा कि आजाद भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने कल्पना कि थी कि बच्चे देश का भविष्य है। अच्छा नागरिक बनाने के लिए बच्चों को उच्च संस्कार दिए जाने चाहिए।
कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव श्रीमती मीनाक्षी गोण्डाले,किशोर न्याय बोर्ड की सभापति श्रीमती मधु तिवारी, जिला विधिक सहायता अधिकारी सुश्री वीणा देसाई, अधिवक्ता सुश्री उर्वशी अग्रवाल, श्री अमर गुरूबक्षाणी, श्री पी.एल.नायक सहित बाल सम्प्रेषण गृह माना और किशोर न्याय बोर्ड के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे। अतिथियों द्वारा कार्यक्रम का शुभारम्भ पंडित जवाहर लाल नेहरू के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्जवलित कर किया गया। विचाराधीन आपचारिक बालकों के द्वारा देश भक्ति गीत की प्रस्तुति दी गई। इस अवसर पर बाल सम्प्रेषण गृह के बच्चों को फल, मिठाई के साथ भारत के नागरिकों के मूल कर्तव्य, राष्ट्रीय ध्वज एवं राष्ट्रगान की महत्ता नामक पुस्तक का वितरण किया गया।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने किशोर न्याय बोर्ड में जागरूकता कार्यक्रम में कहा कि भारतीय संविधान में छह साल से 14 साल तक के बच्चों को शिक्षा का अधिकार प्रदान किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक माता-पिता, संरक्षक, शिक्षा अधिकारी, ग्राम पंचायत के पदाधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ताओं कि यह नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वे बच्चों को अनिवार्य रूप से शिक्षित करें। बच्चों को शिक्षा का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित करें। श्री बक्शी ने कहा कि आजाद भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने कल्पना कि थी कि बच्चे देश का भविष्य है। अच्छा नागरिक बनाने के लिए बच्चों को उच्च संस्कार दिए जाने चाहिए। कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव श्रीमती मीनाक्षी गोण्डाले,किशोर न्याय बोर्ड की सभापति श्रीमती मधु तिवारी, जिला विधिक सहायता अधिकारी सुश्री वीणा देसाई, अधिवक्ता सुश्री उर्वशी अग्रवाल, श्री अमर गुरूबक्षाणी, श्री पी.एल.नायक सहित बाल सम्प्रेषण गृह माना और किशोर न्याय बोर्ड के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे। अतिथियों द्वारा कार्यक्रम का शुभारम्भ पंडित जवाहर लाल नेहरू के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्जवलित कर किया गया। विचाराधीन आपचारिक बालकों के द्वारा देश भक्ति गीत की प्रस्तुति दी गई। इस अवसर पर बाल सम्प्रेषण गृह के बच्चों को फल, मिठाई के साथ भारत के नागरिकों के मूल कर्तव्य, राष्ट्रीय ध्वज एवं राष्ट्रगान की महत्ता नामक पुस्तक का वितरण किया गया।
क्रमांक-3734/चतुर्वेदी

