कुपोषण मुक्त राज्य बनाने और भी मेहनत की जरूरत : सुश्री लता उसेंडी
महिला और बाल विकास अधिकारियों की पहली संभागीय बैठक
रायपुर 08 फरवरी 2010
महिला और बाल विकास मंत्री सुश्री लता उसेंडी ने कहा है कि छत्तीसगढ़ को कुपोषण मुक्त राज्य के रूप में देश भर में एक नई पहचान दिलाने के लिए विभाग के राजधानी
से लेकर मैदानी स्तर तक सभी अधिकारियों, कर्मचारियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को और भी ज्यादा मेहनत करने की जरूरत है। यदि सब मिलकर ऐसा करें तो इस लक्ष्य को आसानी से हासिल कर लिया जाएगा। सुश्री उसेंडी ने कहा कि विभागीय प्रयासों के फलस्वरूप राज्य में कुपोषण की दर में निश्चित रूप से कमी आई है लेकिन इस दिशा में हमें और भी बेहतर परिणाम देने होंगे। सुश्री लता उसेंडी ने आज यहां कलेक्टोरेट के सभा कक्ष में महिला और बाल विकास विभाग के रायपुर संभाग के जिलों से संबंधित अधिकारियों की पहली समीक्षा बैठक में इस आशय के विचार व्यक्त किए।
सुश्री उसेंडी ने कहा कि आज की स्थिति में छत्तीसगढ़ देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जहां कुपोषण मुक्ति अभियान के अंतर्गत कुपोषित बच्चों की जानकारी वेबसाईट में उपलब्ध है, जिसे इंटरनेट पर कोई भी देख सकता है। इन कुपोषित बच्चों को कुपोषण से मुक्त करने के लिए हर संभव प्रयास जारी रहने चाहिए। उन्होंने कहा कि यह अभियान इसलिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है कि इसके तहत प्रदेश के लगभग 13 हजार कुपोषित बच्चों को सुपोषित करने के लिए समाज ने गोद लिया है, जो पूरे देश में एक मिशाल हैं। प्रदेश में छह जून 2009 से चल रहे इस कुपोषण मुक्ति अभियान में सफलता मिलती है, तो आने वाले समय में छत्तीसगढ़ एक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत होगा, इसलिए सभी जिला और परियोजना स्तर के अधिकारी इस विषय को गंभीरता से लें।
बैठक में सुश्री उसेंडी ने सभी उपस्थित अधिकारियों से कुपोषित बच्चों के स्वास्थ्य स्तर में सुधार के लिए परियोजना स्तर पर फालोअप कैंप कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिला कार्यक्रम अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि कैंप में ज्यादा से ज्यादा बच्चे उपस्थित हों, कैंप में इन बच्चों का वजन कराएं तथा उनके स्वास्थ्य स्तर में हुए सुधार की स्थिति वेबसाईट में अद्यतन कराने के लिए समय पर जानकारी भेजें। सुपोषण मेला भी नियमित रूप से आयोजित करें और उन अभिभावकों से मिले, जिन्होंने इन बच्चों को गोद लिया है। उन्होंने कहा हालांकि कुपोषण मुक्ति अभियान के तहत कुपोषित बच्चों की स्थिति में सुधार आया है, लेकिन इस दिशा में और अधिक मेहनत करने की जरूरत है। प्रदेश में कुपोषण कम करने के लिए यह जरूरी है कि विभागीय अमला स्वास्थ्य विभाग से समन्वय स्थापित कर कार्य करें। बैठक में रेडी-टू-ईट के निर्माण और प्रदाय से संबंधित स्व-सहायता समूहों के चयन, प्रशिक्षण और उनके द्वारा किए जा रहे उत्पादन के संबंध में भी निर्देश दिए गए।
सुश्री लता उसेंडी ने महासमुंद जिले में रेडी-टू-ईट की स्थिति संतोषजनक नहीं होने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि इस कार्य में संलग्न महिला स्व-सहायता समूहों को समय पर भुगतान करने के साथ ही इस कार्य की समय-समय पर समीक्षा भी करें। उन्होंने अन्य जिलों को भी रेडी-टू-ईट के कार्य में सुधार लाने के निर्देश दिए। इसके अलावा मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना पूरक पोषण आहार हेतु आबंटन एवं व्यय, न्यूट्रीशन सर्विलेन्स कार्यक्रम, आंगनबाड़ी केन्द्रों के संचालन की स्थिति, मुख्यमंत्री कन्यादान योजना, आयुष्मति योजना, महिला जागृति शिविर सहित विभाग द्वारा संचालित योजनाओं की समीक्षा की गई। बैठक में विभाग के सचिव श्री एस.के.बेहार सहित महिला एवं बाल विकास संचालनालय के अधिकारी तथा रायपुर, राजनांदगांव, कवर्धा, महासमुंद, धमतरी और दुर्ग के जिला कार्यक्रम अधिकारी और परियोजना अधिकारी उपस्थित थे।
से लेकर मैदानी स्तर तक सभी अधिकारियों, कर्मचारियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को और भी ज्यादा मेहनत करने की जरूरत है। यदि सब मिलकर ऐसा करें तो इस लक्ष्य को आसानी से हासिल कर लिया जाएगा। सुश्री उसेंडी ने कहा कि विभागीय प्रयासों के फलस्वरूप राज्य में कुपोषण की दर में निश्चित रूप से कमी आई है लेकिन इस दिशा में हमें और भी बेहतर परिणाम देने होंगे। सुश्री लता उसेंडी ने आज यहां कलेक्टोरेट के सभा कक्ष में महिला और बाल विकास विभाग के रायपुर संभाग के जिलों से संबंधित अधिकारियों की पहली समीक्षा बैठक में इस आशय के विचार व्यक्त किए। सुश्री उसेंडी ने कहा कि आज की स्थिति में छत्तीसगढ़ देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जहां कुपोषण मुक्ति अभियान के अंतर्गत कुपोषित बच्चों की जानकारी वेबसाईट में उपलब्ध है, जिसे इंटरनेट पर कोई भी देख सकता है। इन कुपोषित बच्चों को कुपोषण से मुक्त करने के लिए हर संभव प्रयास जारी रहने चाहिए। उन्होंने कहा कि यह अभियान इसलिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है कि इसके तहत प्रदेश के लगभग 13 हजार कुपोषित बच्चों को सुपोषित करने के लिए समाज ने गोद लिया है, जो पूरे देश में एक मिशाल हैं। प्रदेश में छह जून 2009 से चल रहे इस कुपोषण मुक्ति अभियान में सफलता मिलती है, तो आने वाले समय में छत्तीसगढ़ एक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत होगा, इसलिए सभी जिला और परियोजना स्तर के अधिकारी इस विषय को गंभीरता से लें।
बैठक में सुश्री उसेंडी ने सभी उपस्थित अधिकारियों से कुपोषित बच्चों के स्वास्थ्य स्तर में सुधार के लिए परियोजना स्तर पर फालोअप कैंप कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिला कार्यक्रम अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि कैंप में ज्यादा से ज्यादा बच्चे उपस्थित हों, कैंप में इन बच्चों का वजन कराएं तथा उनके स्वास्थ्य स्तर में हुए सुधार की स्थिति वेबसाईट में अद्यतन कराने के लिए समय पर जानकारी भेजें। सुपोषण मेला भी नियमित रूप से आयोजित करें और उन अभिभावकों से मिले, जिन्होंने इन बच्चों को गोद लिया है। उन्होंने कहा हालांकि कुपोषण मुक्ति अभियान के तहत कुपोषित बच्चों की स्थिति में सुधार आया है, लेकिन इस दिशा में और अधिक मेहनत करने की जरूरत है। प्रदेश में कुपोषण कम करने के लिए यह जरूरी है कि विभागीय अमला स्वास्थ्य विभाग से समन्वय स्थापित कर कार्य करें। बैठक में रेडी-टू-ईट के निर्माण और प्रदाय से संबंधित स्व-सहायता समूहों के चयन, प्रशिक्षण और उनके द्वारा किए जा रहे उत्पादन के संबंध में भी निर्देश दिए गए।
सुश्री लता उसेंडी ने महासमुंद जिले में रेडी-टू-ईट की स्थिति संतोषजनक नहीं होने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि इस कार्य में संलग्न महिला स्व-सहायता समूहों को समय पर भुगतान करने के साथ ही इस कार्य की समय-समय पर समीक्षा भी करें। उन्होंने अन्य जिलों को भी रेडी-टू-ईट के कार्य में सुधार लाने के निर्देश दिए। इसके अलावा मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना पूरक पोषण आहार हेतु आबंटन एवं व्यय, न्यूट्रीशन सर्विलेन्स कार्यक्रम, आंगनबाड़ी केन्द्रों के संचालन की स्थिति, मुख्यमंत्री कन्यादान योजना, आयुष्मति योजना, महिला जागृति शिविर सहित विभाग द्वारा संचालित योजनाओं की समीक्षा की गई। बैठक में विभाग के सचिव श्री एस.के.बेहार सहित महिला एवं बाल विकास संचालनालय के अधिकारी तथा रायपुर, राजनांदगांव, कवर्धा, महासमुंद, धमतरी और दुर्ग के जिला कार्यक्रम अधिकारी और परियोजना अधिकारी उपस्थित थे।
क्रमांक-3944/सुनीता

