स्वरोजगार से जुड़कर दूसरों को भी रोजगार दे रही है देवकी
रायपुर, 7 दिसम्बर 2011
छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले के विकासखंड मुख्यालय फिंगेश्वर की निवासी श्रीमती देवकी साहू आज अपनी मेहनत से आत्मनिर्भरता की सीढ़ी चढ़ चुकी हैं। स्वरोजगार से जुड़कर अब श्रीमती देवकी दूसरी महिलाओं का भी सहारा बन गई हैं। वे अब अपनी सिलाई मशीन की दुकान में दूसरी महिलाओं को भी रोजगार प्रदान कर रही हैं। श्रीमती देवकी ने बताया कि वर्ष 2003 में उनके पति की मृत्यु के बाद उनके पास आय का कोई स्रोत नहीं था। उनके तीन पुत्र है, जिनकी पढ़ाई और परवरिश की जिम्मेदारी उनके उपर आ गई थी। श्रीमती देवकी ने बताया कि ससुराल पक्ष द्वारा उन्हें गरियाबंद के निकट हरदी गांव में रहने के लिए कहा गया, लेकिन उन्होंने बच्चों के भविष्य को देखते हुए फिंगेश्वर में ही रहकर अपने पैर पर खड़े होने की ठान ली।
श्रीमती देवकी ने बताया कि शुरूआती दौर में उनके साथ बहुत सी परेशानियां आई लेकिन वे कभी हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने आत्मनिर्भरता के लिए एक सिलाई मशीन से ही सिलाई का काम शुरू किया। इस कार्य से किसी तरह उनका गुजारा चल रहा था, लेकिन इतनी कमाई से वे अपने बच्चों के अच्छे
भविष्य का निर्माण नहीं कर सकती थी। इसलिए वे अपनी आर्थिक स्थिति को और बेहतर बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास करती रही। इसी दौरान उन्हें आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के माध्यम से महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित सक्षम योजना के बारे में पता चला । योजना के तहत उन्होंने सिलाई मशीनों के लिए ऋण हेतु आवेदन किया। श्रीमती देवकी ने बताया कि सक्षम योजना के तहत बड़ी आसानी से उन्हें मार्च 2011 में सिलाई मशीन खरीदने के लिए एक लाख रूपए के ऋण की स्वीकृति मिल गयी। इस ऋण राशि से उन्होंने तीन और सिलाई मशीन खरीद लीं । साथ ही अपनी छोटी सी दुकान में कोल्ड्रिक सेंटर और दैनिक उपभोग की अन्य सामाग्रियां भी विक्रय के लिए रखने लगीं।
श्रीमती देवकी ने बताया कि सक्षम योजना के अंतर्गत ऐसी महिलाएं जिनके पति की मृत्यु हो चुकी है, अथवा 35 से 45 आयु वर्ष की अविवाहित महिलाओं अथवा कानूनी तौर पर तलाकशुदा महिलाओं को स्वयं का व्यवसाय आरंभ करने के लिए आसान शर्तो पर एक लाख रूपए तक का ऋण प्रदान किया जाता है। श्रीमती देवकी ने बताया कि सिलाई मशीन और कोल्ड्रिंक की दुकान से हर माह उन्हें औसतन आठ-नौ हजार रूपए की मासिक आए हो जाती है। उनके पास चार सिलाई मशीनें हैं जिसमें काम के लिए अब वे दूसरी जरूरतमंद महिलाओं को भी रोजगार दे रही हैं। श्रीमती देवकी ने बताया कि अब सिलाई दुकान और कोल्ड्रिंग की दुकान से इतनी आमदनी हो जाती है कि वे अपने बच्चों की आगे की पढ़ाई जारी रख सके और उनकी परवरिश भी बेहतर तरीके से कर सके। उन्होंने बताया कि उनका बड़ा बेटा बारहवीं कक्षा में, मंझला बेटा कक्षा दसवीं में और छोटा बेटा आठवीं कक्षा में अध्ययनरत है।
श्रीमती देवकी ने बताया कि शुरूआती दौर में उनके साथ बहुत सी परेशानियां आई लेकिन वे कभी हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने आत्मनिर्भरता के लिए एक सिलाई मशीन से ही सिलाई का काम शुरू किया। इस कार्य से किसी तरह उनका गुजारा चल रहा था, लेकिन इतनी कमाई से वे अपने बच्चों के अच्छे
भविष्य का निर्माण नहीं कर सकती थी। इसलिए वे अपनी आर्थिक स्थिति को और बेहतर बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास करती रही। इसी दौरान उन्हें आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के माध्यम से महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित सक्षम योजना के बारे में पता चला । योजना के तहत उन्होंने सिलाई मशीनों के लिए ऋण हेतु आवेदन किया। श्रीमती देवकी ने बताया कि सक्षम योजना के तहत बड़ी आसानी से उन्हें मार्च 2011 में सिलाई मशीन खरीदने के लिए एक लाख रूपए के ऋण की स्वीकृति मिल गयी। इस ऋण राशि से उन्होंने तीन और सिलाई मशीन खरीद लीं । साथ ही अपनी छोटी सी दुकान में कोल्ड्रिक सेंटर और दैनिक उपभोग की अन्य सामाग्रियां भी विक्रय के लिए रखने लगीं। श्रीमती देवकी ने बताया कि सक्षम योजना के अंतर्गत ऐसी महिलाएं जिनके पति की मृत्यु हो चुकी है, अथवा 35 से 45 आयु वर्ष की अविवाहित महिलाओं अथवा कानूनी तौर पर तलाकशुदा महिलाओं को स्वयं का व्यवसाय आरंभ करने के लिए आसान शर्तो पर एक लाख रूपए तक का ऋण प्रदान किया जाता है। श्रीमती देवकी ने बताया कि सिलाई मशीन और कोल्ड्रिंक की दुकान से हर माह उन्हें औसतन आठ-नौ हजार रूपए की मासिक आए हो जाती है। उनके पास चार सिलाई मशीनें हैं जिसमें काम के लिए अब वे दूसरी जरूरतमंद महिलाओं को भी रोजगार दे रही हैं। श्रीमती देवकी ने बताया कि अब सिलाई दुकान और कोल्ड्रिंग की दुकान से इतनी आमदनी हो जाती है कि वे अपने बच्चों की आगे की पढ़ाई जारी रख सके और उनकी परवरिश भी बेहतर तरीके से कर सके। उन्होंने बताया कि उनका बड़ा बेटा बारहवीं कक्षा में, मंझला बेटा कक्षा दसवीं में और छोटा बेटा आठवीं कक्षा में अध्ययनरत है।
क्रमांक- 4014/सुनीता

