महिलाएं बना रही हैं शिशुओं और माताओं के लिए पूरक पौष्टिक आहार
घर-घर पहुंच रहे हैं 'मुख्यमंत्री शिशु शक्ति' और 'महतारी शक्ति' के पैकेट
रायपुर 24 अप्रैल 2010
आंगनबाड़ी केन्द्रों के पोषण आहार तैयार करने के कार्य में छत्तीसगढ़ के विकासखंड मुख्यालय लोरमी स्थित मां काली महिला स्व-सहायता समूह ने शानदार सफलता हासिल की है। इस महिला समूह के द्वारा हर महीने 60 क्विंटल से भी अधिक पूरक पौष्टिक आहार 'रेडी-टू-ईट' के पैकेट मुख्यमंत्री शिशु शक्ति और महतारी शक्ति के नाम से तैयार किया जा रहा है, जो आंगनबाड़ियों के जरिए घर-घर पहुंच रहे हैं। प्रदेश भर में लगभग 35 हजार आंगनबाड़ी केन्द्रों के लिए इस पौष्टिक आहार के उत्पादन का दायित्व करीब एक हजार 400 महिला स्व-सहायता समूहों को सौंपा गया है। यह पूरक पौष्टिक आहार छह माह से तीन वर्ष तक आयु वर्ग के शिशुओं समेत गर्भवती और शिशुवती माताओं के लिए पैकेटों में दिया जा रहा है।
इसी कड़ी में लोरमी विकासखंड के विभिन्न गांवों में पच्चीस आंगनबाड़ी केन्द्रों के लिए मां काली महिला स्व-सहायता समूह द्वारा 'रेडी-टू-ईट' पूरक आहार बनाकर इसकी आपूर्ति की जा रही है। इस महिला स्व-सहायता समूह में दस महिलाएं सदस्य के रूप में शामिल हैं। उन्होंने अच्छी क्वालिटी का पूरक पोषण आहार तैयार कने के लिए स्वयं होकर कार्य विभाजन भी किया है। अलग-अलग जिम्मेदारियां ली है। उनके द्वारा यह पूरक पौष्टिक आहार बनाने के लिए गेहूं, चना, सोयाबीन, शक्कर, तेल और मूंगफली लोरमी के बाजार से थोक में खरीदा जाता है, जिन्हें साफ करने, भूनने, तलने और पैकेट तैयार करने का दायित्व समूह की महिलाओं ने बखूबी संभाला है। उन्हें इस बात की खुशी है कि उनको अपने गांव और आस-पास से गांवों के नन्हें बच्चों और वहां की गर्भवती माताओं के लिए पौष्टिक आहार तैयार करने का मौका मिला है। प्रदेश व्यापी ग्राम सुराज अभियान के दौरान कलेक्टर बिलासपुर श्री सोनमणि वोरा ने लोरमी में इस महिला स्व-सहायता समूह द्वारा संचालित पूरक पोषण आहार उत्पादन केन्द्र का भी अवलोकन किया। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की घोषणा के अनुरूप छत्तीसगढ़ को कुपोषण मुक्त राज्य बनाने के लिए महिला और बाल विकास विभाग द्वारा राज्य के महिला स्व-सहायता समूहों को पूरक पौष्टिक आहार उत्पादन की गतिविधियों से भी जोड़ा जा रहा है। यह पूरक पौष्टिक आहार छह माह से तीन वर्ष तक आयु समूह के नन्हें बच्चों सहित गर्भवती और शिशुवती माताओं को भी दिया जा रहा है। विभाग द्वारा 'रेडी-टू-ईट' पौष्टिक आहार के उत्पादन और वितरण पर लगभग दो सौ करोड़ रूपए की धनराशि खर्च की जा रही है और प्रदेश भर में आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से इसका वितरण हो रहा है। अकेले बिलासपुर जिले में दो हजार 896 आंगनबाड़ी केन्द्रों में जिले के 118 महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा इस पूरक पौष्टिक आहार का वितरण किया जा रहा है। इन केन्द्रों में लगभग दो लाख 63 हजार गर्भवती और शिशुवती माताओं सहित छह माह से तीन वर्ष तक आयु के बच्चों को इसका लाभ मिल रहा है। हर सप्ताह सामान्य शिशुओं के लिए 750 ग्राम, कुपोषित बच्चों के लिए बारह सौ ग्राम और गर्भवती तथा शिशुवती माताओं के लिए 960 ग्राम के पूरक पौष्टिक आहार वितरित किए जा रहे हैं।
इसी कड़ी में लोरमी विकासखंड के विभिन्न गांवों में पच्चीस आंगनबाड़ी केन्द्रों के लिए मां काली महिला स्व-सहायता समूह द्वारा 'रेडी-टू-ईट' पूरक आहार बनाकर इसकी आपूर्ति की जा रही है। इस महिला स्व-सहायता समूह में दस महिलाएं सदस्य के रूप में शामिल हैं। उन्होंने अच्छी क्वालिटी का पूरक पोषण आहार तैयार कने के लिए स्वयं होकर कार्य विभाजन भी किया है। अलग-अलग जिम्मेदारियां ली है। उनके द्वारा यह पूरक पौष्टिक आहार बनाने के लिए गेहूं, चना, सोयाबीन, शक्कर, तेल और मूंगफली लोरमी के बाजार से थोक में खरीदा जाता है, जिन्हें साफ करने, भूनने, तलने और पैकेट तैयार करने का दायित्व समूह की महिलाओं ने बखूबी संभाला है। उन्हें इस बात की खुशी है कि उनको अपने गांव और आस-पास से गांवों के नन्हें बच्चों और वहां की गर्भवती माताओं के लिए पौष्टिक आहार तैयार करने का मौका मिला है। प्रदेश व्यापी ग्राम सुराज अभियान के दौरान कलेक्टर बिलासपुर श्री सोनमणि वोरा ने लोरमी में इस महिला स्व-सहायता समूह द्वारा संचालित पूरक पोषण आहार उत्पादन केन्द्र का भी अवलोकन किया। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की घोषणा के अनुरूप छत्तीसगढ़ को कुपोषण मुक्त राज्य बनाने के लिए महिला और बाल विकास विभाग द्वारा राज्य के महिला स्व-सहायता समूहों को पूरक पौष्टिक आहार उत्पादन की गतिविधियों से भी जोड़ा जा रहा है। यह पूरक पौष्टिक आहार छह माह से तीन वर्ष तक आयु समूह के नन्हें बच्चों सहित गर्भवती और शिशुवती माताओं को भी दिया जा रहा है। विभाग द्वारा 'रेडी-टू-ईट' पौष्टिक आहार के उत्पादन और वितरण पर लगभग दो सौ करोड़ रूपए की धनराशि खर्च की जा रही है और प्रदेश भर में आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से इसका वितरण हो रहा है। अकेले बिलासपुर जिले में दो हजार 896 आंगनबाड़ी केन्द्रों में जिले के 118 महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा इस पूरक पौष्टिक आहार का वितरण किया जा रहा है। इन केन्द्रों में लगभग दो लाख 63 हजार गर्भवती और शिशुवती माताओं सहित छह माह से तीन वर्ष तक आयु के बच्चों को इसका लाभ मिल रहा है। हर सप्ताह सामान्य शिशुओं के लिए 750 ग्राम, कुपोषित बच्चों के लिए बारह सौ ग्राम और गर्भवती तथा शिशुवती माताओं के लिए 960 ग्राम के पूरक पौष्टिक आहार वितरित किए जा रहे हैं।
क्रमांक-456/स्वराज्य

