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बाल विवाह सामाजिक बुराई और कानूनन अपराध है

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When Apr 29, 2011
from 02:10 PM to 02:10 PM
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बाल विवाह की रोकथाम के लिए निर्देश जारी

रोकथाम और उन्मूलन के लिए कार्ययोजना तैयार कर कार्रवाई करने के निर्देश

    रायपुर 29 अप्रैल, 2011

बाल विवाह एक सामाजिक बुराई होने के साथ ही कानूनन अपराध भी है। जिसकी रोकथाम और उन्मूलन के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयासरत है। इसी कड़ी में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा राज्य के सभी जिलों के कलेक्टरों, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों अथवा पुलिस अधीक्षकों, जिला पंचायतों के मुख्य कार्य पालन अधिकारियों, जिला कार्यक्रम अधिकारियों (महिला एवं बाल विकास विभाग), जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों और बाल विकास परियोजना अधिकारियों को प्रदेश में बाल विवाह के पूर्णत: रोकथाम के लिए स्थाई निर्देशों के अनुसार कार्ययोजना तैयार कर कार्रवाई करने के विषय में परिपत्र जारी किये गये हैं।
    परिपत्र में कहा गया है कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के अंतर्गत बाल विवाह करने वाले वर और वधु में माता-पिता, सगे-संबंधी, बाराती यहां तक के विवाह कराने वाले पुरोहित पर भी कानूनी कार्यवाही की जा सकती है। इसके अलावा यदि वर या कन्या बाल विवाह के बाद विवाह को स्वीकार नहीं करती है तो बालिग होने के बाद विवाह को शून्य घोषित करने के लिए आवेदन कर सकती है। बाल विवाह के कारण बच्चों में कुपोषण्, शिशु मृत्यु दर और मातृ मृत्यु दर के साथ घरेलू हिंसा में भी वृध्दि होती है। परिपत्र के अनुसार समाज में व्याप्त इस बुराई के पूर्णत: उन्मूलन के लिए जन प्रतिनिधियों, नगरीय निकायों, पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों, स्वयं सेवक संगठनों और आम जनों से सहयोग प्राप्त कर बाल विवाह प्रथा के उन्मूलन के लिए संबंधितों को कारगर कार्रवाई करने हेतु निर्देशित किया गया है।
    परिपत्र में  बाल विवाह की रोकथाम के लिए कार्य योजना बनाने हेतु सुझाव भी दिये गये हैं। परिपत्र में कहा गया है कि प्रदेश में कुछ विशिष्ट जातियों में बाल विवाह के प्रकरण पूर्व वर्षों में प्राप्त होते रहे हैं। अतएव सर्वप्रथम जिलों में ऐसे क्षेत्रों और जातियों को चिन्हित किया जाए। परिपत्र में प्रत्येक गांव और ग्राम पंचायतों में विवाह पंजी संधारित करने और उन क्षेत्रों में होने वाले सभी विवाहों को विवाह पूर्व पंजीबध्द करने हेतु निर्देशित किया गया है। ताकि बाल विवाह की जानकारी समय से पहले प्राप्त हो सके। प्रत्येक ग्राम पंचायत में गांव के कोटवारों द्वारा बाल विवाह के कानूनन अपराध होने के संबंध में मुनादी कराई जाए। ताकि ग्रामीण जनों को पता चले कि बाल विवाह करना अपराध है। जिले के सभी सरपंचों से बाल विवाह के रोकथाम हेतु अपील की जाए। जिले में आयोजित होने वाली सभी ग्राम सभाओें में बाल विवाह की रोकथाम के उपाय, बाल विवाह के कारण महिलाओं के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव, शिशुओं में कुपोषण, मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में वृध्दि के संबंध में परिचर्चा कराई जाए और सभी जानकारी दी जाए।
    परिपत्र के अनुसार प्रत्येक ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत और जिला स्तर पर बाल विवाह की रोकथाम के लिए समिति गठित करने कहा गया है, जिसमें पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधि, जन प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता, शासकीय अधिकारी-कर्मचारी और जाति विशेष के मुखिया सदस्य होंगे। समिति में संबंधित क्षेत्र के थाना प्रभारी और पटवारी को आवश्यक रूप से शामिल करने कहा गया है। बाल विवाह की रोकथाम के लिए व्यापक प्रचार प्रसार के तहत दिवारों पर नारा लेखन पॉम्प्लेट्स वितरण, स्कूल और आंगनबाड़ी केन्द्रों के बच्चों द्वारा बाल विवाह रोकथाम रैली और बाल विवाह तथा कुपोषण  जैसे विषयों पर स्कूलों में वाद-विवाद एवं निबंध प्रतियोगिता आयोजित कराने के निर्देश भी दिये गए है। परिपत्र में यह भी कहा गया है कि पुलिस दल गांव का दौरा कर ग्रामीणों को बाल विवाह नहीं करने की समझाईश देंगे और किसी भी माध्यम से बात विवाह होने की मौखिक या लिखित सूचना मिलते ही रोकथाम के लिए तत्काल कार्यवाही करेंगे।  बाल विवाह की रोकथाम के लिए किशोरी बालिकाओं और महिला स्वयं सहायता समूहों से भी सहयोग लेने को कहा गया है।

क्रमांक-495/सुनीता

 

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