शिशु मृत्यु दर और कुपोषण दर में आयी कमी
महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से प्रदेश की महिलाएं हुई सशक्त
रायपुर, 20 दिसम्बर 2010
छत्तीसगढ़ में महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक विकास और बच्चों को कुपोषण मुक्त करने के लिए राज्य सरकार द्वारा विगत दो वर्षों में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों और संचालित योजनाओं से एक ओर शिशु मृत्यु दर तथा कुपोषण दर में कमी आयी है, वहीं महिला स्वसहायता समूहों के माध्यम से प्रदेश की महिलाएं सशक्त हुई है। उल्लेखनीय है कि जहां राज्य गठन के समय शिशु मृत्यु दर 79 प्रति हजार थी, घटकर 57 प्रति हजार हो गयी है। इसी प्रकार कुपोषण दर वर्ष 2000 में लगभग 62 प्रतिशत थी, जो घटकर 51 प्रतिशत हो गयी है।
कुपोषण मुक्ति की दिशा में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अगुवाई और महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री लता उसेंडी के विशेष पहल पर विगत छह जून 2009 को प्रदेश भर में कुपोषण मुक्ति रैलियों का आयोजन किया गया। इसी दिन आंगनबाड़ी केन्द्रों में दर्ज अत्यधिक कुपोषित बच्चों को अतिरिक्त स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना भी प्रारंभ की गयी। इस योजना में राज्य के लगभग 21 हजार बच्चे लाभान्वित हुए हैं जबकि साढ़े छह हजार बच्चे गंभीर कुपोषण से मुक्त हो गए है। छत्तीसगढ़ में चलाए जा रहे कुपोषण मुक्ति अभियान के तहत लोगों को कुपोषण के प्रति जागरूक करने के साथ ही जन सहयोग से कुपोषित बच्चाें को गोद लेकर उनकी विशेष देखभाल की जा रही है। इसी प्रकार महिला एवं बाल विकास के अन्तर्गत एकीकृत बाल विकास सेवा के तहत दिए जाने वाले पूरक पोषण आहार की पौष्टिकता और गुणवत्ता को और बेहतर बनाने के लिए प्रदेश के लगभग 35 हजार आंगनबाड़ी केन्द्रों में रेडी-टू-ईट कार्यक्रम का संचालन किया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि गत जून 2009 में गोद लिए गए तेरह हजार 620 बच्चों में से 25 प्रतिशत बच्चे सामान्य श्रेणी में आ गए हैं और 70.86 प्रतिशत बच्चों के पोषण स्तर में सुधार हुआ है। राज्य सरकार के प्रयासों से ही प्रदेश में कुपोषण दर और शिशु मृत्यु दर में निरंतर गिरावट आ रही है।एकीकृत बाल विकास सेवा योजना के सर्वव्यापीकरण के लिए छत्तीसगढ़ में आठ हजार 826 नवीन आंगनबाड़ी केन्द्र और चार हजार 229 मिनी आंगनबाड़ी केन्द्र स्वीकृत किए गए है। इन्हें मिलाकर प्रदेश में स्वीकृत इन केन्द्रों की संख्या 50 हजार 311 हो गयी है। इसी प्रकार विभागीय कार्यों में और कसावट लाने के लिए गतवर्ष विभाग में 624 पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की गयी है। नए आंगनबाड़ी केन्द्रों और मिनी आंगनबाड़ी केन्द्रों के सुव्यवस्थित संचालन के लिए भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं की भर्ती की जा रही है। एकीकृत बाल विकास सेवा के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को नि:शुल्क सायकल प्रदान करने का भी निर्णय लिया गया है।
छत्तीसगढ़ में संचालित आंगनबाड़ी केन्द्रों की सेवाओं में गुणवत्ता उन्नयन के लिए विगत 16 नवम्बर
2009 को मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह द्वारा ''न्यूट्रिशन सर्वेलेंस कार्यक्रम'' का शुभारंभ किया गया है। इस कार्यक्रम के माध्यम से कुपोषण और पहुंचविहिन क्षेत्र का चिन्हांकन किया जा सकता है। इसके अलावा इसके माध्यम से ऐसे प्रमुख सूचकांकों को विकसित किया जा रहा है, जिनके माध्यम से विभाग की मैदानी गतिविधियां का अनुश्रवण सुगम और संभव हो सकेगा। छत्तीसगढ़ सरकार महिला सशक्तिकरण के लिए भी प्रतिबध्द है। राज्य सरकार ने प्रदेश की महिलाओं के आर्थिक स्वावलम्बन के लिए प्रदेश के लगभग 35 हजार आंगनबाड़ी केन्द्रों के लिए पूरक पोषण आहार निर्माण का महत्वपूर्ण कार्य शत-प्रतिशत महिला स्वसहायता समूहों को देने का निर्णय लिया है। इस कार्य में लगभग 14 सौ महिला स्वसहायता समूह कार्यरत हैं। इसी प्रकार छत्तीसगढ़ महिला कोष के माध्यम से महिला स्वसहायता समूहों को 20 हजार रूपए की जगह केवल साढ़े छह प्रतिशत ब्याज दर पर 50 हजार रूपए तक ऋण राशि देने का निर्णय लिया गया है।
छत्तीसगढ़ महिला कोष के अंतर्गत वर्ष 2009-10 में सक्षम योजना और स्वावलम्बन योजना शुरू की गयी है। सक्षम योजना के तहत विधवा, कानूनी तौर पर तलाकशुदा महिला और 35 से 45 वर्ष आयु वर्ग की अविवाहित महिलाएं स्वयं का व्यवसाय प्रारंभ करने के लिए आसान शर्तों पर एक लाख रूपए तक का ऋण प्राप्त कर सकती है, जबकि स्वावलम्बन योजना के तहत इन महिलाओं को व्यवसायिक दक्षता प्रदान कर उनके स्वावलम्बन के लिए प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। इसके लिए योजना के तहत प्रति हितग्राही पांच हजार रूपए तक की अधिकतम व्यय सीमा निर्धारित की गयी है। इसी प्रकार विधवा और तलाकशुदा महिलाओं के शिक्षण-प्रशिक्षण, व्यवसायिक दक्षता और उनके आर्थिक स्वावलम्बन के लिए वर्ष 2009-10 से छत्तीसगढ़ के चार आदिवासी बहुल बस्तर (जगदलपुर), दक्षिण बस्तर (दंतेवाड़ा), बीजापुर और नारायणपुर जिले में शक्तिस्वरूपा योजना भी संचालित की जा रही है। इन महत्वपूर्ण निर्णयों से जहां प्रदेश की महिलाएं आर्थिक गतिविधियों से जुड़ रही है, वहीं उनके सामाजिक स्तर में भी निरंतर सुधार देखा जा रहा है।
विभाग द्वारा कन्या भूण हत्या की रोकथाम और बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रदेश के बस्तर जिले के जगदलपुर विकासखंड और बीजापुर जिले के भोपालपट्नम विकासखंड में धनलक्ष्मी योजना भी संचालित की जा रही है। इस योजना में बालिका के परिवार को बालिका के जन्म पंजीकरण, सम्पूर्ण टीकाकरण, स्कूल में पंजीकरण तथा शिक्षा के लिए विभिन्न चरणों में सहायता राशि देने का प्रावधान है। इसके अलावा 18 वर्ष की आयु तक बालिका के अविवाहित रहने पर बीमा योजना से समन्वय कर एक लाख रूपए तक की राशि दिए जाने का भी प्रावधान है। बच्चों की रचनात्मक गतिविधियों के लिए वर्ष 2009-10 के बजट में बाल भवन के निर्माण के लिए एक करोड़ का प्रावधान भी किया गया है।
कुपोषण मुक्ति की दिशा में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अगुवाई और महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री लता उसेंडी के विशेष पहल पर विगत छह जून 2009 को प्रदेश भर में कुपोषण मुक्ति रैलियों का आयोजन किया गया। इसी दिन आंगनबाड़ी केन्द्रों में दर्ज अत्यधिक कुपोषित बच्चों को अतिरिक्त स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना भी प्रारंभ की गयी। इस योजना में राज्य के लगभग 21 हजार बच्चे लाभान्वित हुए हैं जबकि साढ़े छह हजार बच्चे गंभीर कुपोषण से मुक्त हो गए है। छत्तीसगढ़ में चलाए जा रहे कुपोषण मुक्ति अभियान के तहत लोगों को कुपोषण के प्रति जागरूक करने के साथ ही जन सहयोग से कुपोषित बच्चाें को गोद लेकर उनकी विशेष देखभाल की जा रही है। इसी प्रकार महिला एवं बाल विकास के अन्तर्गत एकीकृत बाल विकास सेवा के तहत दिए जाने वाले पूरक पोषण आहार की पौष्टिकता और गुणवत्ता को और बेहतर बनाने के लिए प्रदेश के लगभग 35 हजार आंगनबाड़ी केन्द्रों में रेडी-टू-ईट कार्यक्रम का संचालन किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि गत जून 2009 में गोद लिए गए तेरह हजार 620 बच्चों में से 25 प्रतिशत बच्चे सामान्य श्रेणी में आ गए हैं और 70.86 प्रतिशत बच्चों के पोषण स्तर में सुधार हुआ है। राज्य सरकार के प्रयासों से ही प्रदेश में कुपोषण दर और शिशु मृत्यु दर में निरंतर गिरावट आ रही है।एकीकृत बाल विकास सेवा योजना के सर्वव्यापीकरण के लिए छत्तीसगढ़ में आठ हजार 826 नवीन आंगनबाड़ी केन्द्र और चार हजार 229 मिनी आंगनबाड़ी केन्द्र स्वीकृत किए गए है। इन्हें मिलाकर प्रदेश में स्वीकृत इन केन्द्रों की संख्या 50 हजार 311 हो गयी है। इसी प्रकार विभागीय कार्यों में और कसावट लाने के लिए गतवर्ष विभाग में 624 पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की गयी है। नए आंगनबाड़ी केन्द्रों और मिनी आंगनबाड़ी केन्द्रों के सुव्यवस्थित संचालन के लिए भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं की भर्ती की जा रही है। एकीकृत बाल विकास सेवा के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को नि:शुल्क सायकल प्रदान करने का भी निर्णय लिया गया है।
छत्तीसगढ़ में संचालित आंगनबाड़ी केन्द्रों की सेवाओं में गुणवत्ता उन्नयन के लिए विगत 16 नवम्बर
2009 को मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह द्वारा ''न्यूट्रिशन सर्वेलेंस कार्यक्रम'' का शुभारंभ किया गया है। इस कार्यक्रम के माध्यम से कुपोषण और पहुंचविहिन क्षेत्र का चिन्हांकन किया जा सकता है। इसके अलावा इसके माध्यम से ऐसे प्रमुख सूचकांकों को विकसित किया जा रहा है, जिनके माध्यम से विभाग की मैदानी गतिविधियां का अनुश्रवण सुगम और संभव हो सकेगा। छत्तीसगढ़ सरकार महिला सशक्तिकरण के लिए भी प्रतिबध्द है। राज्य सरकार ने प्रदेश की महिलाओं के आर्थिक स्वावलम्बन के लिए प्रदेश के लगभग 35 हजार आंगनबाड़ी केन्द्रों के लिए पूरक पोषण आहार निर्माण का महत्वपूर्ण कार्य शत-प्रतिशत महिला स्वसहायता समूहों को देने का निर्णय लिया है। इस कार्य में लगभग 14 सौ महिला स्वसहायता समूह कार्यरत हैं। इसी प्रकार छत्तीसगढ़ महिला कोष के माध्यम से महिला स्वसहायता समूहों को 20 हजार रूपए की जगह केवल साढ़े छह प्रतिशत ब्याज दर पर 50 हजार रूपए तक ऋण राशि देने का निर्णय लिया गया है। छत्तीसगढ़ महिला कोष के अंतर्गत वर्ष 2009-10 में सक्षम योजना और स्वावलम्बन योजना शुरू की गयी है। सक्षम योजना के तहत विधवा, कानूनी तौर पर तलाकशुदा महिला और 35 से 45 वर्ष आयु वर्ग की अविवाहित महिलाएं स्वयं का व्यवसाय प्रारंभ करने के लिए आसान शर्तों पर एक लाख रूपए तक का ऋण प्राप्त कर सकती है, जबकि स्वावलम्बन योजना के तहत इन महिलाओं को व्यवसायिक दक्षता प्रदान कर उनके स्वावलम्बन के लिए प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। इसके लिए योजना के तहत प्रति हितग्राही पांच हजार रूपए तक की अधिकतम व्यय सीमा निर्धारित की गयी है। इसी प्रकार विधवा और तलाकशुदा महिलाओं के शिक्षण-प्रशिक्षण, व्यवसायिक दक्षता और उनके आर्थिक स्वावलम्बन के लिए वर्ष 2009-10 से छत्तीसगढ़ के चार आदिवासी बहुल बस्तर (जगदलपुर), दक्षिण बस्तर (दंतेवाड़ा), बीजापुर और नारायणपुर जिले में शक्तिस्वरूपा योजना भी संचालित की जा रही है। इन महत्वपूर्ण निर्णयों से जहां प्रदेश की महिलाएं आर्थिक गतिविधियों से जुड़ रही है, वहीं उनके सामाजिक स्तर में भी निरंतर सुधार देखा जा रहा है।
विभाग द्वारा कन्या भूण हत्या की रोकथाम और बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रदेश के बस्तर जिले के जगदलपुर विकासखंड और बीजापुर जिले के भोपालपट्नम विकासखंड में धनलक्ष्मी योजना भी संचालित की जा रही है। इस योजना में बालिका के परिवार को बालिका के जन्म पंजीकरण, सम्पूर्ण टीकाकरण, स्कूल में पंजीकरण तथा शिक्षा के लिए विभिन्न चरणों में सहायता राशि देने का प्रावधान है। इसके अलावा 18 वर्ष की आयु तक बालिका के अविवाहित रहने पर बीमा योजना से समन्वय कर एक लाख रूपए तक की राशि दिए जाने का भी प्रावधान है। बच्चों की रचनात्मक गतिविधियों के लिए वर्ष 2009-10 के बजट में बाल भवन के निर्माण के लिए एक करोड़ का प्रावधान भी किया गया है।
क्रमांक- 5236/सुनीता

