आंगनबाड़ी के बच्चों के शाला प्रवेश के लिए पांच जून से शुरू होगा अभियान
छह वर्ष आयु के सौ फीसदी बच्चे करेंगे शाला प्रवेश
बालिकाओं के शाला प्रवेश के लिए होगा विशेष प्रयास
बच्चों के स्वागत में बालभोज आयोजित होंगे
रायपरु 06 मई 2011
छत्तीसगढ़ के आंगनबाडी केन्द्रों में दर्ज ऐसे बच्चों को जो छह वर्ष की आयु पूरी कर रहे हो, उन्हें अनिवार्य रूप से प्राथमिक शालाओं में प्रवेश दिलाया जाएगा। इसके लिए महिला और बाल विकास विभाग द्वारा प्रदेष में आगामी 5 जून से 5 जुलाई तक 'विद्यारंभ अभियान' चलाया जाएगा। महिला एवं बाल विकास संचालनालय द्वारा राज्य के सभी जिला कार्यक्रम अधिकारियों, जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारियों और सभी बाल विकास परियोजना अधिकारियों को परिपत्र में इस आशय के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। विद्यारंभ अभियान का उद्देश्य आंगनबाडी केन्द्रों में दर्ज 6 वर्ष की आयु के शत-प्रतिशत बच्चों को प्राथमिक शाला में प्रवेश दिलाना, बालिकाओं के शाला प्रवेश के लिए विशेष प्रयास करना और आंगनबाडी केन्द्रों की सेवाओं तथा प्राथमिक शिक्षा के बीच एक सीधा समन्वय स्थापित करना है।
परिपत्र में कहा गया है कि आंगनबाडी केन्द्रों में दर्ज छह वर्ष की आयु पूर्ण कर रहे बच्चों को विद्यारंभ अभियान के तहत शिक्षा सत्र वर्ष 2010-11 के लिए स्कूलों में प्रवेश कराने हेतु 5 जून से 05 जुलाई तक विद्यारंभ अभियान चलाया जाएगा। अभियान के तहत आंगनबाडी कार्यकर्ताओं द्वारा केन्द्र में दर्ज बच्चों में से छह वर्ष की आयु पूर्ण कर रहे सभी बालक-बालिकाओं की सूची 31 मई 2011 तक पूरी कर ली जाएगी। आंगनबाडी कार्यकर्ताओं द्वारा तीन प्रतियों में सूची तैयार कर एक प्रति संबंधित पर्यवेक्षक तथा एक प्रति स्थानीय प्राथमिक शाला के प्राध्यापक को उपलब्ध कराई जाएगी। इसी प्रकार आंगनबाडी कार्यकर्ता द्वारा सूचीबध्द बच्चों को स्थानीय प्राथमिक शाला में दर्ज कराया जाएगा और सौ फीसदी बच्चों, विशेष रूप से बालिकाओं को शाला प्रवेश के लिए स्थानीय शिक्षकों तथा पर्यवेक्षकों के सहयोग से पालकों को समझाईश दी जाएगी। बच्चों के शाला पंजीयन का कार्य 5 जुलाई तक पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं। शत प्रतिशत बच्चों का शाला पंजीयन संबंधित पर्यवेक्षक तथा बाल विकास परियोजना अधिकारी द्वारा अनुश्रवण कर सुनिश्चित किया जाएगा। इसी प्रकार यदि माता-पिता बालिका को शिक्षा दिलाने में आर्थिक रूप से सक्षम नहीं है, तो सामुदायिक सहयोग से 'दत्ताक पुत्री शिक्षा योजना' के तहत बालिका को लाभ दिलाने के निर्देश दिए गए हैं।
निर्देषों में स्पष्ट किया गया है कि किसी गांव में एक से अधिक आंगनबाडी केन्द्र होने पर सभी आंगनबाडी कार्यकर्ताओं द्वारा सम्मिलित रूप से बच्चों के शाला प्रवेश के लिए कार्य किया जाएगा। बच्चों को शाला प्रवेश के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से 5 जुलाई से पहले किसी एक दिन बच्चों के स्वागत में ग्राम पंचायत, महिला स्व-सहायता समूह और समुदाय के सहयोग से बाल भोज कराने अथवा विभागीय समन्वय और स्थानीय समुदाय के सहयोग से अन्य रचनात्मक गतिविधियां-रैली, प्रतियोगिता आदि आयोजित कराने के भी निर्देश दिए गए हैं। परिपत्र के अनुसार शाला में प्रवेश लेने वाले बच्चों की उपस्थिति के संबंध में नियमित अंतराल पर आंगनबाडी कार्यकर्ता द्वारा स्थानीय शाला से जानकारी प्राप्त करने और शाला न आने वाले बच्चों के पालकों से संपर्क कर शाला में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

