राज्य में 24 लाख माताओं और बच्चों को मिल रहा है पौष्टिक आहार
बच्चों को नाश्ते में मिलता है चना, मुरमुरा, गुड, मूंगफली
राज्य शासन के महिला और बाल विकास विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ में 38 हजार 500 से अधिक आंगनबाड़ी केन्द्रों और मिनी आंगनबाड़ी केन्द्रों में पूरक पोषण आहार कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इस कार्यक्रम के तहत राज्य के करीब 24 लाख बच्चों, गर्भवती और शिशुवती महिलाओं को पूरक पोषण आहार प्रदान किया जा रहा है। इनमें छह माह से छह वर्ष के लगभग साढ़े 19 लाख बच्चे और साढ़े चार लाख गर्भवती और शिशुवती माताएं शामिल हैं। राज्य में वर्तमान में 35 हजार 790 आंगनबाड़ी केन्द्र और दो हजार 750 मिनी आंगनबाड़ी केन्द्र संचालित हैं। पूरक पोषण आहार कार्यक्रम के लिए वित्तीय वर्ष 2011-12 में 372 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है।
उल्लेखनीय है कि पोषण स्तर में सुधार के लिए आंगनबाड़ी केन्द्रों में आने वाले तीन से छह वर्ष आयु के सामान्य और गंभीर कुपोषित बच्चों को गर्म पके भोजन के साथ-साथ नाश्ता भी दिया जा रहा है। नाश्ते में चना, मुरमुरा, गुड़, रेडी-टू-ईट फुड (तैयार भोजन), मूगफली एवं गुड़, उबले और भीगे चने जैसे स्वादिष्ट और पौष्टिक आहार दिया जा रहा है। इसी तरह आगंनबाड़ी केन्द्रों में 6 माह से 3 वर्ष के सामान्य और गंभीर कुपोषित बच्चों सहित गर्भवती और शिशुवती माताओं को टेक होम राशन के तहत गेहूं आधारित रेडी-टू-ईट दिया जा रहा है। आंगनबाड़ी केन्द्रों में टेक होम राशन के अन्तर्गत 6 माह से 3 वर्ष आयु के सामान्य बच्चों को 125 ग्राम, 6 माह से 3 वर्ष आयु के गंभीर कुपोषित बच्चों को 200 ग्राम तथा गर्भवती और शिशुवती महिलाओं को 160 ग्राम रेडी-टू-ईट प्रदान किया जाता है।

