छत्तीसगढ़ महिला कोष : महिला स्व-सहायता समूहों को 22 करोड़ रूपए का ऋण वितरित
कोष के लिए वित्तीय वर्ष 2011-12 में दो करोड़ रूपए का प्रावधान
रायपुर, 31 मार्च 2011
राज्य सरकार के महिला और बाल विकास विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ में संचालित छत्तीसगढ़ महिला कोष की ऋण योजना के तहत विगत सात वर्षों में 17 हजार से अधिक महिला स्व-सहायता समूहों को करीब 22 करोड़ रूपए का ऋण उपलब्घ कराया गया। इसमें चालू वित्तीय वर्ष 2010-11 में 18 सौ महिला स्व-सहायता समूहों को वितरित चार करोड़ रूपए की ऋण राशि भी शामिल है। छत्तीसगढ़ महिला कोष के लिए वित्तीय वर्ष 2011-12 में दो करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। उल्लेखनीय है कि महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से प्रदेश की महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता और उनके सशक्तिकरण के लिए राज्य सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ महिला कोष संचालित की जा रही है। इस महिला कोष द्वारा ऋण उपलब्ध कराने के साथ-साथ अनेक महिला समूहों को आय उर्पाजन गतिविधियों के लिए प्र्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
महिला और बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि विगत सात वर्षों में प्रदेश की करीब 17 हजार 300 महिला स्व-सहायता समूहों को विभिन्न व्यवसायों के लिए 21 करोड़ 70 लाख रूपए से अधिक की ऋण राशि स्वीकृत की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ महिला कोष से ऋण प्राप्त कर महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से प्रदेश की महिलाएं वर्मी कम्पोस्ट खाद, मिठाई के डिब्बे, पूरक-पोषण आहार निर्माण्ा, पशुपालन, डेयरी, मशरूम उत्पादन, राशन दुकानों का संचालन, हस्तशिल्प और सिलाई-बुनाई जैसे आय उर्पाजन गतिविधियों से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत वर्ष 2004-05 में 1802 महिला स्व-सहायता समूहों को 94 लाख 54 हजार रूपए की ऋण राशि वितरित की गयी है। इसी प्रकार वर्ष 2005-06 में 2105 समूहों को एक करोड़ 40 लाख सात हजार, 2006-07 में दो हजार 684 समूहों को दो करोड़ 53 लाख 53 हजार रूपए, 2007-08 में दो हजार 859 समूहों को तीन करोड़ 11 लाख 84 हजार रूपए और 2008-09 में तीन हजार 250 समूहों को तीन करोड़ 70 लाख पच्चीस हजार रूपए की ऋण राशि स्वीकृत की गयी।
विभागीय अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2009-10 में करीब दो हजार 800 समूहों को छह करोड़ रूपए से अधिक की ऋण राशि उपलब्ध करायी गयी, जबकि 2010-11 में फरवरी की स्थिति में लगभग 18 सौ समूहों को चार करोड़ रूपए के ऋण उपलब्घ करा दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि योजना के तहत विगत वर्ष 2009-10 से 50 हजार रुपए तक के ऋण स्वीकृत किए जा रहे हैं जबकि पूर्व में ऋण राशि 20 हजार रुपए तक ही स्वीकृत करने का प्रावधान था। योजना में प्रथम बार में 25 हजार रुपए तक का ऋण प्रदान किया जा रहा है तथा पहली बार दिए गए ऋण की राशि वापस करने पर दूसरी बार 50 हजार रुपए तक ऋण स्वीकृत किया जा रहा है। इस योजना के तहत महिला स्व सहायता समूहों को साढ़े छह प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है।
महिला और बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि विगत सात वर्षों में प्रदेश की करीब 17 हजार 300 महिला स्व-सहायता समूहों को विभिन्न व्यवसायों के लिए 21 करोड़ 70 लाख रूपए से अधिक की ऋण राशि स्वीकृत की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ महिला कोष से ऋण प्राप्त कर महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से प्रदेश की महिलाएं वर्मी कम्पोस्ट खाद, मिठाई के डिब्बे, पूरक-पोषण आहार निर्माण्ा, पशुपालन, डेयरी, मशरूम उत्पादन, राशन दुकानों का संचालन, हस्तशिल्प और सिलाई-बुनाई जैसे आय उर्पाजन गतिविधियों से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत वर्ष 2004-05 में 1802 महिला स्व-सहायता समूहों को 94 लाख 54 हजार रूपए की ऋण राशि वितरित की गयी है। इसी प्रकार वर्ष 2005-06 में 2105 समूहों को एक करोड़ 40 लाख सात हजार, 2006-07 में दो हजार 684 समूहों को दो करोड़ 53 लाख 53 हजार रूपए, 2007-08 में दो हजार 859 समूहों को तीन करोड़ 11 लाख 84 हजार रूपए और 2008-09 में तीन हजार 250 समूहों को तीन करोड़ 70 लाख पच्चीस हजार रूपए की ऋण राशि स्वीकृत की गयी।
विभागीय अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2009-10 में करीब दो हजार 800 समूहों को छह करोड़ रूपए से अधिक की ऋण राशि उपलब्ध करायी गयी, जबकि 2010-11 में फरवरी की स्थिति में लगभग 18 सौ समूहों को चार करोड़ रूपए के ऋण उपलब्घ करा दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि योजना के तहत विगत वर्ष 2009-10 से 50 हजार रुपए तक के ऋण स्वीकृत किए जा रहे हैं जबकि पूर्व में ऋण राशि 20 हजार रुपए तक ही स्वीकृत करने का प्रावधान था। योजना में प्रथम बार में 25 हजार रुपए तक का ऋण प्रदान किया जा रहा है तथा पहली बार दिए गए ऋण की राशि वापस करने पर दूसरी बार 50 हजार रुपए तक ऋण स्वीकृत किया जा रहा है। इस योजना के तहत महिला स्व सहायता समूहों को साढ़े छह प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है।
क्रमांक-6788/सुनीता

