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विशेष लेख : महिलाओं और बच्चों की उन्नति है समाज के विकास का आधार

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When May 15, 2011
from 08:30 PM to 08:30 PM
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· सुनीता केशरवानी

     महिलाओं और बच्चों का सामाजिक-आर्थिक, शैक्षणिक और स्वास्थ्य स्तर किसी देश या समाज के विकास का पैमाना होता है। समाज को सही दिशा में आगे बढ़ाने के लिए महिलाओं और बच्चों का समग्र विकास सबसे जरूरी है। जहां महिलाएं पूरे परिवार को गढ़ने का काम करती हैं वहीं बच्चे lekh1-150511देश-प्रदेश के भविष्य होते है। यही कारण है कि छत्तीसगढ़ सरकार महिलाओं और बच्चों के कल्याण की दिशा में निरन्तर कार्य कर रही है। इसके लिए महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। 
    राज्य सरकार ने महिलाओं और बच्चों के बेहतरी के लिए पिछले वर्ष के बजट की तुलना में 25 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी करते हुए इस वित्तीय वर्ष 2011-12 में महिला एवं बाल विकास विभाग के लिए 876 करोड़ 12 लाख 59 हजार रूपए का प्रावधान किया है, जो वित्तीय वर्ष 2010-11 के पुनरीक्षित बजट 696 करोड़ 40 लाख की तुलना में 80 करोड़ अधिक है। शासन द्वारा प्रदेश में संचालित पूरक पोषण आहार कार्यक्रम के तहत प्रदेश के छह माह से छह वर्ष तक आयु के बच्चों, गर्भवती और शिशुवती माताओं को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया जा रहा है। कार्यक्रम के अन्तर्गत आंगनबाड़ी केन्द्रों में आने वाले तीन से छह वर्ष आयु के बच्चों को गरम पक्के हुए भोजन के साथ-साथ पौष्टिक नाश्ता भी दिया जा रहा है। बच्चों को सप्ताह के अलग-अलग दिनों में अलग-अलग प्रकार का नाश्ता मिलने से बच्चों में आंगनबाड़ी केन्द्रों में आने की रूचि में वृध्दि हुई है। साथ ही उन्हें पौष्टिक आहार भी उपलब्ध हो रहा है। आंगनबाड़ी केन्द्रों के लिए मेन्यू भी तैयार किया गया है। नाश्ते में बच्चों को चना, मुरमुरा, मुंगफली, उबला भीगा चना, गुड़ और रेडी-टू-ईंट फूड दिया जा रहा है, जबकि गरम पके हुए भोजन में चावल, दाल और सब्जी दिया जा रहा है। आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से प्रदेश के 24 लाख से अधिक महिलाओं और बच्चों को पूरक पोषण आहार प्रदान किया जा रहा है।  इस कार्यक्रम के लिए चालू वित्तीय वर्ष में 372 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है।
    राज्य सरकार द्वारा एकीकृत बाल विकास सेवाओं के माध्यम से प्रदेश में सुदृढ़ भविष्य की नींव रखने के लिए सतत प्रयास किया जा रहा है। इस दिशा में आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से बच्चों के मनोवैज्ञानिक, शारीरिक और सामाजिक विकास, छह वर्ष तक आयु के बच्चों के पोषण तथा विकास संबंधी आवश्यकताओं की देखभाल के लिए माताओं की क्षमता बढ़ाने और बच्चों के स्कूल छोड़ने की प्रवृत्ति में कमी लाने की दिशा में निरन्तर कार्य किया जा रहा है। प्रदेश में बच्चों के समन्वित विकास के lekh2-150511लिए समेकित बाल विकास सेवा योजना के तहत आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से विभिन्न सेवाओं के संचालन के लिए वित्तीय वर्ष 2011-12 के बजट में 247 करोड़ 26 लाख का प्रावधान किया गया है, जबकि प्रशिक्षण मद के लिए आठ करोड़ छह लाख रूपए का प्रावधान किया गया है। यह राशि प्रदेश में बच्चों के लिए प्री स्कूल किट, मेडिसिन किट, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय, साड़ी एवं बैजेस पर खर्च किया जाएगा। आंगनबाड़ी केन्द्रों की सेवाओं की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए छत्तीसगढ़ 50 हजार 311 आंगनबाड़ी और मिनी आंगनबाड़ी केन्द्र स्वीकृत किए गए हैं, जिनके माध्यम से बाल विकास सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित हो सकेगी। राज्य सरकार के निरन्तर प्रयासों की बदौलत ही प्रदेश के बच्चों में व्याप्त कुपोषण में उल्लेखनीय कमी आयी है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे के आंकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ में वर्ष 1998-99 में कुपोषण 61 प्रतिशत था, जबकि वर्ष 2005-06 में इसी सर्वे रिपोर्ट के अनुसार कुपोषण 52 प्रतिशत रह गया है। प्रदेश में कुपोषण के चिन्हांकन के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के नये मापदण्डों को लागू किया गया है, जिसके अनुसार प्रदेश में कुपोषण दर 47 प्रतिशत है। इसी प्रकार शिशु मृत्यु दर जो वर्ष 2000 में 79 प्रति हजार थी, वर्ष 2007 में 57 रह गयी। सहस्त्राब्दि विकास लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए वर्ष 2015 तक प्रदेश में कुपोषण का दर 30 प्रतिशत, शिशु मृत्यु दर 30 प्रति हजार और मातृ मृत्यु दर 100 प्रति लाख तक सीमित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा निरन्तर प्रयास किए जा रहे हैं।
    बच्चों के समन्वित विकास के साथ-साथ महिलाओं के कल्याण और उनके सशक्तिकरण के लिए महिला स्व-सहायता समूह के माध्यम से महिलाओं को संगठित कर उन्हें आत्म निर्भर बनाया जा रहा है। राज्य सरकार महिलाओं के कल्याण के लिए आयुष्मति योजना, शक्ति स्वरूपा योजना, इंदिरा गांधी मातृत्व सहयोग योजना, सक्षम और स्वावलम्बन योजना संचालित कर रही है। प्रदेश की महिलाएं जीवन के हर क्षेत्र चाहे सामाजिक क्षेत्र हो या शैक्षणिक, विकास के पथ पर आगे बढ़ रही है। महिलाओं को सशक्त बनाने के उददेश्य से छत्तीसगढ़ महिला कोष के माध्यम से स्वरोजगार के कार्यो के लिए समूहों को मात्र साढे छह प्रतिशत साधारण ब्याज पर सुलभ ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। इस कोष के माध्यम से महिला स्व-सहायता समूहों को 18 करोड़ रूपए से अधिक का ऋण उपलब्ध कराया जा चुका है। प्रदेश में लगभग 73 हजार महिला स्व-सहायता समूह गठित है। समूहों की बचत राशि लगभग 60 करोड़ रूपए हैं। महिला समूहों को दिए गए ऋण की वापसी का दर भी करीब 80 प्रतिशत है, जो कार्य के प्रति प्रदेश की महिलाओं की संवेदनशीलता, सजगता, कर्तव्यनिष्ठा और ईमानदारी का प्रतीक है।     प्रदेश में गरीब परिवार की बेटियों का विवाह सम्मानजनक तरीके से कराने के लिए राज्य में मुख्यमंत्री कन्यादान योजना संचालित है। योजना के तहत प्रति कन्या वैवाहिक व्यय को पांच हजार रूपए से बढ़ाकर दस हजार रूपए कर दिया गया है। योजना के तहत अब तक लगभग 30 हजार बेटियों का विवाह कराया जा चुका है। मुख्यमंत्री कन्यादान योजना में सामूहिक विवाह होने के कारण विवाह पर होने वाले अनावश्यक व्यय कम हो रहे हैं। इससे बाल विवाह की कुप्रथा में भी कमी आई है। इसी प्रकार किशोरी बालिकाओं के सर्वांगीण्ा विकास के लिए प्रदेश के पांच जिलों रायपुर, रायगढ़, राजनांदगांव, सरगुजा और बस्तर में 11 से 18 वर्ष आयु की किशोरी बालिकाओं के लिए सबला योजना संचालित की जा रही है। योजना में किशोरी बालिकाओं को प्रति हितग्राही प्रतिदिन पांच रूपए के मान से पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए 26 करोड़ 62 लाख का बजट प्रावधान किया गया है। इस योजना से जहां शाला त्यागी किशोरी बालिकाओं को पौष्टिक आहार उपलब्ध होगा, वहीं प्रतिदिन आंगनबाड़ी केन्द्र आने से उनमें उत्तरदायित्व की भावना का विकास होगा। इन बालिकाओं के सशक्तिकरण और व्यावसायिक एवं गृह कौशल उन्नयन के लिए विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
    बच्चों के संरक्षण और सुरक्षा के लिए छत्तीसगढ़ में नवीन एकीकृत बाल संरक्षण कार्यक्रम भी संचालित की जा रही है। इस कार्यक्रम के तहत 18 वर्ष तक के बच्चों के लिए मानक स्तर की सुविधाएं उपलब्ध कराने की कार्रवाई की जा रही है। चाइल्ड लाईन फाउंडेशन के सहयोग से रायपुर और बिलासपुर में चाइल्ड लाईन सेवा शुरू की जा चुकी है, जबकि दुर्ग में भी शीघ्र ही शुरू कर दी जाएगी।   lekh3-150511बच्चों के दत्तक ग्रहण कार्यक्रम के लिए राज्य स्तर पर राज्य दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण स्थापित की गयी है। राज्य स्तर पर बाल संरक्षण समिति का भी गठन किया गया है, जिसके अधीन सभी जिलों में जिला बाल संरक्षण समितियां कार्य करेंगी। एकीकृत बाल संरक्षण कार्यक्रम के लिए वर्ष 2011-12 के बजट में 20 करोड़ 42 लाख रूपए का प्रावधान किया गया है। महिलाएं गर्भावस्था में और प्रसव के छह महीने तक मजदूरी और अन्य आय उपार्जन की गतिविधियों में शामिल नहीं हो पाती। फलस्वरूप उन्हें मजदूरी नहीं मिल पाती, जबकि इस अवधि में महिलाओं को अधिक पौष्टिक आहार और आर्थिक मदद की जरूरत होती है, इसे ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने धमतरी और बस्तर जिले में इंदिरा गांधी मातृत्व सहयोग योजना प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया है। योजना में गर्भावस्था और प्रसव के छह महीने की अवधि में हितग्राही महिला को चार हजार रूपए की राशि तीन चरणों में दी जाएगी, ताकि ग्रामीण महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान होने वाली मजदूरी की हानि की प्रतिपूर्ति में मदद मिल सके।
    प्रदेश की गरीबी रेखा श्रेणी की निराश्रित और भूमिहीन महिलाओं को स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने के लिए आयुष्मति योजना भी संचालित की जा रही है, जिसके तहत भूमिहीन परिवार तथा गरीबी रेखा श्रेणी वाले परिवार की बीमारी से पीड़ित महिलाओं को मेडिकल कॉलेज, जिला स्तरीय चिकित्सालयों, खंड स्तरीय चिकित्सालयों और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में उपचार के लिए स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध करायी जाती है। बीमार महिला को एक सप्ताह तक उपचार के लिए भर्ती रहने पर चार सौ रूपए तक और एक सप्ताह से अधिक भर्ती रहने पर एक हजार रूपए की चिकित्सा सुविधा के अंतर्गत दवाईयां और पौष्टिक आहार उपलब्ध करायी जाती है। इसी प्रकार प्रदेश में व्याप्त सामाजिक कुरूतियों में टोनही एक प्रमुख समस्या रही है। इसकी रोकथाम और कारगर कार्रवाई के लिए छत्तीसगढ़ टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम 2005 लागू किया गया है। घरेलू हिंसा अधिनियम के क्रियान्वयन के लिए भी विकासखंड स्तर तक संरक्षण अधिकारी नियुक्त किए गए हैं, जो महिलाओं के संरक्षण के प्रति सजग है। दहेज प्रतिषेध अधिनियम और महिलाओं के संरक्षण के लिए बनाए गए अन्य सभी प्रकार के कानूनों का समुचित पालन और क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया है।
    राज्य में महिलाओं से संबंधित सभी प्रकार की योजनाओं के क्रियान्वयन और समीक्षा के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में उच्चाधिकार समिति गठित है। इससे स्पष्ट है कि महिलाओं से संबंधित सभी योजनाओं का क्रियान्वयन राज्य के मुख्यमंत्री की प्राथमिकता में है। प्रदेश में महिलाओं को सशक्त बनाने उनकी हितों की देखभाल और संरक्षण तथा उनकी गरिमा और सम्मान सुनिश्चित करने के साथ ही महिलाओं पर होने वाले अत्याचार पर त्वरित कार्रवाई के लिए प्रदेश में राज्य महिला आयोग का गठन किया गया है। महिलाओं को जागरूक करने के लिए विभाग द्वारा ग्राम स्तर से लेकर राज्य स्तर तक महिला जागृति शिविर लगाया जाता है। इन शिविरों में महिलाओं से संबंधित कानून, अधिनियम, योजनाओं, कार्यक्रमों सहित अन्य सभी प्रकार की जरूरी जानकारियां दी जाती है। राज्य शासन द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के परिणाम स्वरूप ही प्रदेश की महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति में निरंतर सुधार देखा जा सकता है। यहां की महिलाएं अब हर क्षेत्र में आगे आ रही है। महिलाओं के साथ ही बच्चों के पोषण स्तर में भी सुधार हो रहा है।

 

समा. क्र.-726/ 15/05/2011
  • सुनीता केशरवानी
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