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महिला एवं बाल विकास, खेल एवं युवा कल्याण और समाज कल्याण की अनुदान मांगे पारित

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When Mar 25, 2011
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मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत एक कन्या के विवाह के लिए अब दस हजार रूपए का प्रावधान   

राष्ट्रीय नि:शक्तजन पुनर्वास कार्यक्रम अब बस्तर और सरगुजा में भी

    रायपुर, 25 मार्च 2011
     महिला और बाल विकास, खेल एवं युवा कल्याण तथा समाज कल्याण मंत्री सुश्री लता उसेण्डी द्वारा छत्तीसगढ़ विधानसभा में अपने विभागों के लिए प्रस्तुत 637 करोड़ 80 लाख 56 हजार रूपए की अनुदान मांगों को सदन में ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। इनमें महिला और बाल विकास विभाग के लिए 570 करोड़ 26 लाख 63 हजार रूपए, समाज कल्याण विभाग के लिए 36 करोड़ 26 लाख 83 हजार रूपए और खेल एवं युवा कल्याण्ा विभाग के लिए 31 करोड़ 27 लाख 10 हजार रूपए की अनुदान मांगे शामिल हैं।

     सुश्री लता उसेण्डी ने अपने विभाग के संबंध में सदन में हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार महिलाओं एवं बच्चों के विकास और कल्याण के लिए दृढ़ संकल्पित हैं। इसी संकल्प को पूरा करने के उद्देश्य से वर्ष 2001-02 में बजट प्रावधान की राशि 128.77 करोड़ रूपए की तुलना में लगभग पांच गुना वृध्दि करते हुए कुल 570 करोड़ 26 लाख 63 हजार रूपए का प्रावधान वर्ष 2011-12 के लिए किया गया है। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से बच्चों के मनोवैज्ञानिक, शारीरिक और सामाजिक विकास की नींव रखने, छह वर्ष तक आयु के बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य स्तर में सुधार लाने, कुपोषण, शिशु मृत्यु दर तथा मातृ मृत्यु दर में कमी लाने और बच्चों के स्कूल छोड़ने की प्रवृत्ति में कमी लाने की दिशा में निरन्तर कार्य कर रहे हैं। इन प्रयासों की बदौलत ही प्रदेश के बच्चें में व्याप्त कुपोषण में उल्लेखनीय कमी आयी है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय परिवार सर्वे के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 1998-99 में कुपोषण 61 प्रतिशत था, जबकि वर्ष 2005 के इसी सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार कुपोषण की दर घटकर 52 प्रतिशत रहा गया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में कुपोषण की चिन्हांकन के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के नये मापदण्डों को लागू किया गया है। जिसके अनुसार प्रदेश में कुपोषण दर 47 प्रतिशत है। इसी प्रकार शिशु मृत्यु दर जो वर्ष 2000 में 79 प्रति हजार थी, घटकर 2007 में 57 प्रति हजार रह गयी थी। उन्होंने बताया कि 11 से 18 वर्ष आयु की किशोरी बालिकाओं के सर्वांगीण विकास के लिए प्रदेश के पांच जिलों रायपुर, रायगढ़, राजनांदगांव, सरगुजा और बस्तर में सबला योजना प्रारंभ की जा रही है। इन किशोरी बालिकाओं को आंगनबाड़ी केन्द्रों में पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के साथ ही उनके सशक्तिकरण और कौशल उन्नयन के लिए विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण भी आयोजित किए जाएंगे।

     सुश्री उसेण्डी ने बताया कि गर्भवती और प्रसूति महिलाओं की आर्थिक सहायता के उद्देश्य से धमतरी तथा बस्तर जिले में पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में इंदिरा गांधी मातृत्व सहयोग योजना प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया है। इस योजना के तहत गर्भावस्था और प्रसव के छह महीने की अवधि में हितग्राही महिला को चार हजार रूपए की राशि तीन चरणों में दी जाएगी। इसके लिए बजट में 577 लाख रूपए का प्रावधान रखा गया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत प्रदेश में गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन करने वाले परिवार की बेटियों का सम्मानजनक तरीके से विवाह कराया जा रहा है। इस योजना के तहत एक बेटी के विवाह के लिए पांच हजार रूपए की राशि को बढ़ाकर दस हजार रूपए कर दिया गया है। इस योजना के तहत बजट में पांच करोड़ रूपए का प्रावधान रखा गया है। उन्होंने कहा कि एकीकृत बाल विकास सेवाओं को और बेहतर बनाने की दिशा में पिछले वर्ष लगभग 500 पर्यवेक्षकों की भर्ती की गयी। उन्होंने कहा कि एक पर्यवेक्षक पर करीब 15 से 20 आंगनबाड़ी केन्द्रों के निरीक्षण का दायित्व रहता है, इसलिए पर्यवेक्षकों की सेक्टर में रहने की व्यवस्था के लिए 62 मकान बनाने के लिए बजट में प्रावधान किया गया है।

     समाज कल्याण विभाग के द्वारा संचालित योजनाओं के संबंध में सदन में हुई चर्चा का जवाब देते हुए सुश्री उसेण्डी ने कहा कि विभिन्न पेंशन योजनाओं के तहत प्रदेश के 12 लाख से अधिक हितग्राही लाभान्वित हो रहे हैं। इन पेंशन योजनाओं का लाभ लेने के लिए संबंधित पंचायत में आवेदन करना होता है तथा इसकी स्वीकृति जनपद से होती है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा नि:शक्त कल्याण के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ नि:शक्तजन वित्त एवं विकास निगम द्वारा नि:शक्तजनों को स्वरोजगार सहित विभिन्न प्रयोजनों के लिए ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गरीबी रेखा से जीवन यापन करने वाले सेरेब्रेल पालिसी और गंभीर रूप से नि:शक्तजनों को जीवन पर्यन्त आवास प्रदान करने के लिए घरौंदा योजना की स्वीकृति दी गयी है। इसके लिए बजट में तीन करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। नि:शक्तजनों के लिए राजनांदगांव, बिलासपुर और कोरिया में चलाए जा रहे राष्ट्रीय नि:शक्तजन पुनर्वास कार्यक्रम का विस्तार करते हुए यह कार्यक्रम बस्तर और सरगुजा में भी कराने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए एक करोड़ रूपए का बजट प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 15 नि:शुल्क शासकीय आवासीय विद्यालय तथा शैक्षिक संस्थाओं को अनुदान प्रदान कर 32 विद्यालयों का संचालन किया जा रहा है, जिसमें प्रदेश के  तीन हजार से अधिक विभिन्न नि:शक्तताओं के बच्चे शिक्षा और प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।

     सुश्री उसेण्डी ने कहा कि नि:शक्त व्यक्तियों के सामाजिक पुनर्वास के लिए विवाह प्रोत्साहन योजना के तहत वैवाहिक जोड़े को 21 हजार रूपए की राशि प्रदान की जाती है। विगत वर्ष इस योजना में 228 दम्पतियों को लाभान्वित किया गया। राज्य सरकार भिक्षुओं और विक्षिप्त महिलाओं के पुनर्वास और सुरक्षा के लिए भी कार्य कर रही है। इस दिशा में प्रदेश में भिक्षुओं के पुनर्वास केन्द्र के लिए 35 लाख और विक्षित महिलाओं के आवास गृह निर्माण के लिए 20 लाख का बजट प्रावधान किया गया है। इसी प्रकार नि:शक्त व्यक्तियों को कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण प्रदान करने के लिए एक करोड़ 65 लाख रूपए का बजट का प्रावधान किया गया है। खेल एवं युवा कल्याण विभाग के लिए अनुदान मांगों के संबंध में चर्चा के दौरान सुश्री उसेण्डी ने कहा कि राज्य के खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर उम्दा प्रदर्शन करते हुए कई पदक जीते हैं। राज्य सरकार द्वारा खेलों के विकास के लिए अनेक योजनाएं और गतिविधियां संचालित की जा रही है। जिसके फलस्वरूप प्रदेश में खेल का माहौल बना हुआ है और यहां खेल गतिविधियां भी बढ़ी है। छत्तीसगढ़ की खेल आयोजन क्षमता पूरे देश में स्थापित हुई है यही कारण है कि छत्तीसगढ़ को 37 वें राष्ट्रीय खेलों के आयोजन की मेजबानी मिली है। उन्होंने कहा कि राज्य निर्माण के दस वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में विकासखण्ड से लेकर राज्य स्तर तक खेल महोत्सव का आयोजन किया गया। जिसमें लगभग साढ़े चार हजार खिलाड़ियों ने भाग लिया। राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के 70 खिलाड़ियों को उत्कृष्ट खिलाड़ी घोषित किया गया है और उन्हें शासकीय सेवा देने का निर्णय लिया गया है। इनमें से दो खिलाड़ियों को नौकरी भी दे दी गयी है। राज्य सरकार द्वारा खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही है।
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