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हिन्दुस्तान का हस्तशिल्प हमारी अमूल्य धरोहर : श्री अग्रवाल

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When Dec 10, 2010
from 02:55 PM to 02:55 PM
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ग्रामीण अर्थ व्यवस्था की बेहतरी में हाथ करघा

उद्योग की महत्वपूर्ण भूमिका - श्री मोहले

नेशनल हेण्डलूम एक्स-पो 2010 का समापन

लगभग ढाई करोड़ रूपए की बिक्री

    रायपुर, 10 दिसम्बर 2010

5047-1-101210

छत्तीसगढ़ के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा है कि हिन्दुस्तान की हस्तशिल्प हमारी अमूल्य धरोहर है। इसे बनाये रखना हम सब की जिम्मेदारी है। श्री अग्रवाल कल रात यहाँ छत्तीसगढ़ राज्य हाथ करघा विकास एवं विपणन संघ और केन्द्रीय कपड़ा मंत्रालय के हाथ करघा प्रभाग द्वारा संयुक्त रूप से राजधानी रायपुर के शंकर नगर स्थित बी.टी.आई मैदान में आयोजित राष्ट्रीय हाथ करघा वस्त्रों की प्रदर्शनी नेशनल हेण्डलूम एक्स-पो 2010 के समारोह को संबोधित कर रहे थे। ग्रामोद्योग 5047-2-101210मंत्री श्री पुन्नूलाल मोहले की अध्यक्षता में आयोजित समापन समारोह में संसदीय सचिव डॉ. सियाराम साहू, विधायक श्री नंदकुमार साहू, नगर निगम रायपुर की महापौर श्रीमती किरणमयी नायक, छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ (मार्कफेड) के अध्यक्ष श्री राधाकृष्ण गुप्ता, छत्तीसगढ़ राज्य हाथ करघा विकास एवं विपणन सहकारी संघ के अध्यक्ष श्री कमल लाल देवांगन और संचालक मंडल के सदस्य सहित नगर निगम रायपुर के सभापति श्री संजय श्रीवास्तव और राज्य सहकारी केन्द्रीय बैंक (अपैक्स बैंक) के संचालक मंडल के सदस्य श्री अशोक बजाज उपस्थित थे।
    श्री अग्रवाल ने कहा कि हिन्दुस्तानी शिल्पकारों द्वारा निर्मित वस्तुओं की मांग देश और दुनिया में लगातार बढ़ रही है । देश की शिल्पकला हमारी अमूल्य धरोहर है। श्री अग्रवाल ने कहा कि यहां के शिल्पकारों द्वारा निर्मित वस्तुओं को देखने, समझने और खरीदने के लिए विदेशों से लोग आते रहते है, इससे हम गौरवान्वित होते है। उन्होंने कहा कि बुनकरों द्वारा हाथ करघा से निर्मित परम्परागत हस्तशिल्प काफी समृध्द है और दुनिया भर में मशहूर है। कारीगरों का यह कौशल अपने पूर्वजों से विरासत में मिला है, जिन्हें वे आज भी पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाते जा रहे हैं, इसे हमें सहेजने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हाथ करघा से जुड़े बुनकरों के आर्थिक बेहतरी के लिए उन्हें और अधिक पहचान और व्यापक बाजार मिलना बहुत जरूरी हो गया है। उन्होंने उम्मीद जतायी कि इस महत्वपूर्ण नेशनल हेण्डलूम एक्स पो 2010 के माध्यम से न सिर्फ छत्तीसगढ़ बल्कि अन्य राज्यों के बुनकर अपनी कलाकृतियों का बेहतर प्रदर्शन कर देश और अपने-अपने राज्यों का नाम रोशन करेंगे।
    नेशनल हेण्डलूम एक्स-पो 2010 के समारोह की अध्यक्षता करते हुए छत्तीसगढ़ के ग्रामोद्योग मंत्री श्री पुन्नूलाल मोहले ने कहा कि भारत की ग्रामीण अर्थ व्यवस्था को  बेहतर बनाने में हाथ करघा उद्योग की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकता है। इसके लिए उन्हें अच्छे से अच्छे बाजार दिलाने की आवश्यकता है। इसी कड़ी में नेशनल हेण्डलूम एक्स- पो 2010 का आयोजन किया गया , जहां एक ही छत के नीचे विभिन्न राज्यों के हाथ करघा से निर्मित वस्त्रों का प्रदर्शन एवं विक्रय किया गया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह द्वारा हाथ करघा से जुड़े बुनकरों के उत्थान के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य शासन द्वारा प्रदेश की 140 बुनकर सहकारी समितियों का ऋण माफ किया गया है। इससे लगभग 11 हजार बुनकर लाभान्वित हुए है। उन्होंने कहा कि राजधानी रायपुर में आयोजित नेशनल हेण्डलूम एक्स-पो 2010 को अच्छा प्रतिसाद मिला है। यहां विभिन्न स्टालों के माध्यम से लगभग ढ़ाई करोड़ रूपये के कपड़े ड्रेस मटेरियल, कोसे की साड़िया, शाल, गलीचे आदि की बिक्री की गई है। एक्स-पो 2010 के माध्यम से छत्तीसगढ़ के लोगों को विभिन्न राज्यों के कपड़ों की डिजाइनों को समझने और जानने का मौका मिला है। इसके पूर्व श्री मोहले ने विभिन्न स्टालों का अवलोकन किया और शिल्पकारों तथा खरीददारों से जानकारी प्राप्त किया। समारोह को छत्तीसगढ़ राज्य हाथ करघा विकास एवं विपणन सहकारी संघ के अध्यक्ष श्री कमल लाल देवांगन ने भी सम्बोधित किया। भारत सरकार हाथ करघा प्रभाग बुनकर सेवा केन्द्र रायगढ़ के उप निर्देशक श्री एच. सूर्यवंशी ने एक्स- पो 2010 में शामिल होने वाले विभिन्न राज्यों के हाथ करघा बुनकरों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर मंडप सजावट और ज्यादा बिक्री करने वाले शिल्पकारों को सम्मानित किया गया।
    उल्लेखनीय है कि नेशनल हेण्डलूम एक्स-पो में देश के 15 राज्यों के हाथ करघा विभागों द्वारा 83 स्टाल लगाए गए थे। इन स्टालों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की प्रसिध्द कोसा साड़ियों के साथ ड्रेस मटेरियल,मध्यप्रदेश की चंदेरी और महेश्वरी साड़िया, महाराष्ट्रकी पैठनी साड़िया, गुजरात में निर्मित लहंगे, उत्तर प्रदेश की बनारसी साड़ियां, बिहार की भागलपुरी और खादी सिल्क, आसाम की प्रसिध्द मूंगा सिल्क, हरियाणा के फर्निशिंग वस्त्र और गलीचे, जम्मू कश्मीर के प्रसिध्द पशमीना शाल, राजस्थान की जयपुरी रजाई, पश्चिम बंगाल की कांथा और तांत साड़िया, पंजाब की कशीदाकारी पर आधारित कपड़े, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली के प्रसिध्द हाथ करघा निर्मित वस्त्रों की बिकी की गई।

क्रमांक-5047/लहरे




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