छत्तीसगढ़ के तीन आदिवासी शिल्पकारों को केरल में मिलेगा पुरस्कार
केरल ललित कला अकादमी ने किया चयन
छत्तीसगढ़ की प्रसिध्द रजवार चित्रकार स्वर्गीय सोनाबाई के नाम पर भी केरल ललित कला अकादमी ने की पुरस्कार की स्थापना
रायपुर, 08 फरवरी 2011
छत्तीसगढ़ के तीन प्रसिध्द आदिवासी लोक-शिल्पकारों को केरल ललित कला अकादमी द्वारा देश के तीन सुप्रसिध्द शिल्पियों के नाम पर दिए जाने वाले प्रतिष्ठित पुरस्कारों के लिए चुना गया है। अकादमी द्वारा आदिवासी बहुल नारायणपुर जिले के ग्राम गढ़बेंगाल निवासी मुरिया जनजाति के शिल्पकार श्री पंडीराम मंडावी को जे. स्वामीनाथन पुरस्कार, रायगढ़ जिले के ग्राम एकताल निवासी बेलमेटल मूर्तिकार श्री शंकर लाल झारा को जनगढ़ सिंह श्याम पुरस्कार और सरगुजा जिले के ग्राम पुहपुटरा निवासी सुंदरी बाई रजवार को भित्ती चित्रकला के लिए सोना बाई रजवार पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की गयी है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने इन प्रतिष्ठित पुरस्कारों के लिए राज्य के तीनों प्रमुख शिल्पकारों के चयन पर उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दी है।
पुरस्कार वितरण समारोह इस महीने की 13 तरीख को एर्नाकुलम स्थित केरल ललित कला अकादमी के कला केन्द्र भवन में आयोजित किया जाएगा, जहां केरल सरकार के शिक्षा और संस्कृति मंत्री उन्हें इन प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित करेंगे। छत्तीसगढ़ के शिल्पकारों के चयन की यह जानकारी छत्तीसगढ़ सरकार के मुख्य सचिव श्री पी. जॉय उम्मेन को केरल ललित कला अकादमी के सचिव श्री सत्यपाल ने पत्र के जरिए दी है। उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार को सूचित किया है कि चयनित शिल्पकारों को एक लाख रूपए की सम्मान राशि के साथ प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह भेंट किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि केरल ललित कला अकादमी द्वारा छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले की प्रसिध्द भित्ती चित्रकार स्वर्गीय श्रीमती सोना बाई रजवार के नाम पर और मध्यप्रदेश के नर्मदाघाटी क्षेत्र के गोंड समुदाय के भित्ती चित्रकार स्वर्गीय श्री जनगढ़ सिंह श्याम के नाम पर पहली बार इन पुरस्कारों की स्थापना की गयी है। छत्तीसगढ़ की स्वर्गीय श्रीमती सोना बाई को रजवार समुदाय में प्रचलित भित्ती चित्रकला के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार भी प्राप्त हो चुका है, वहीं स्वर्गीय श्री जनगढ़ सिंह श्याम मध्यप्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 1986 में शिखर सम्मान से विभूषित किए जा चुके हैं। इसी तरह स्वर्गीय श्री जे. स्वामीनाथन देश के ख्याति प्राप्त चित्रकार और लोककला विशेष थे, जो कई पुरस्कारों से सम्मानित होकर भारत भवन भोपाल में निदेशक भी रह चुके थे।

