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संस्कृत सप्ताह: 'संस्कृत भाषा की महत्ता' पर विचार गोष्ठी आयोजित

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When Aug 23, 2010
from 08:15 PM to 08:15 PM
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    रायपुर, 23 अगस्त 2010/

छत्तीसगढ़ संस्कृत विद्यामण्डलम् द्वारा मनाए जा रहे संस्कृत सप्ताह में विविध कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। सप्ताह के प्रथम दिन पर यहां विद्यामण्डलम् कार्यालय में 'संस्कृत भाषा की महत्ता' विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। छत्तीसगढ़ संस्कृत विद्यामण्डलम् और संस्कृत संस्कार भारती छत्तीसगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस गोष्ठी में संस्कृत के अनेक विद्वानों ने अपने विचार प्रकट किए।
    छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग के सदस्य डॉ.रमेन्द्रनाथ मिश्र, संस्कृत भारती छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष संत काशीनाथ चतुर्वेदी, संस्कृत भारती के संगठन मंत्री श्री देवेन्द्र वर्मा, छत्तीसगढ़, डॉ. चितरंजन कर एवं डॉ. मनीषा  पाठक ने मां सरस्वती तथा भगवान नटराज के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर विचार गोष्ठी का शुभारंभ किया। छत्तीसगढ़ संस्कृत विद्यामण्डलम् के सचिव डॉ. सुरेश कुमार शर्मा ने सभी विद्वानों का स्वागत किया और प्रदेश में संस्कृत शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए किए जा रहे उपायों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि स्कूल शिक्षा मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल के मार्गदर्शन में संस्कृत भाषा और उनकी विभिन्न विधाएं स्कूली पाठयक्रमों में शामिल कर ली गयी है।
    राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद के व्याख्याता एवं प्राच्य संस्कृत पाठयक्रम के समन्वयक श्री बी.आर. साहू ने कहा कि संस्कृत भाषा के अध्ययन से अब रोजगार के सपने पूरे होंगे। संस्कृत के व्यावसायिक पाठयक्रम के अध्ययन से स्वावलंबन आएगा । संस्कृत का महत्व न केवल एक वैज्ञानिक भाषा के रूप में है बल्कि इसके विशद ज्ञान से लोकमंगल की भावना का सूत्रपात होता है।  उन्होंने कहा कि राज्य शासन द्वारा प्राच्य संस्कृत विद्यालयों के विकास के लिए अनेक निर्णय लिए गए हैं। राज्य शासन के प्रयासों से छत्तीसगढ़ में संस्कृत भाषा की शिक्षा को नयी पहचान मिली है।
    श्री धनंजय शास्त्री आर्य प्रतिनिधि सभा दुर्ग ने कहा कि छत्तीसगढ़ में संस्कृत भाषा प्रगति की ओर अग्रसर है। छात्र-छात्राओं को संस्कृत वाड्:मयों के सारभूत तत्वों की शिक्षा देने से शिक्षा की प्रतिष्ठा बढ़ेगी। डॉ. तोयनिधि वैष्णव सहायक प्राध्यापक शासकीय संस्कृत महाविद्यालय रायपुर ने कहा कि संस्कृत के माध्यम से संस्कृति और संस्कार सुरक्षित रहेंगे। डॉ. चितरंजन कर ने कहा कि संस्कृत का संबंध हमारी चेतना से है। शुध्द हिन्दी में संस्कृत भाषा का आभास मिलता है। भाषा प्रयोग में उच्चारण का बड़ा ही महत्व है। स्कूलों में भाषा के स्तर में सुधार के लिए शिक्षकों का उन्मुखीकरण होना चाहिए। उन्होंने कहा कि संस्कृत के बिना सभी भारतीय भाषाएं पंगु हो जाती हैं। डॉ. मनीषा पाठक ने कहा कि व्याकरण और साहित्य के ज्ञान से ही संस्कृत भाषा का सही उपयोग किया जा सकता है, क्योंकि केवल उच्चारण दोष से ही अर्थ परिवर्तन अवश्यंभावी है। श्री अमरनाथ त्यागी ने संस्कृत भाषा को संजीवनी भाषा बताया। उन्होंने कहा कि सूर्य की किरणें संस्कृत वर्णमाला को व्यक्त करती है। यह अन्तर्ब्रह्माण्डीय भाषा है। संस्कृत की वर्णमाला में अद्भुत शक्ति होती है। संस्कृत पढ़ने वालों का मस्तिष्क 100 प्रतिशत क्रियाशील होता है और मस्तिष्क ऊर्जावान रहता है। डॉ. रमेन्द्र नाथ मिश्र ने बताया कि छत्तीसगढ़ संस्कृत भाषा का गढ़ है। यहां के शिलालेखों एवं पाडुलिपियों से ज्ञात होता है कि यहां संस्कृत जानने वाले बहुत विद्वान रहे हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ संस्कृत विद्यामण्डलम् के माध्यम से पाडुलिपियों का संग्रहण किया जाना चाहिए और संस्कृत भाषा में विशेष पत्रिका प्रकाशित की जानी चाहिए। संस्कृत संस्कार भारती छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष श्री काशीनाथ चतुर्वेदी ने बताया कि वेद्ों में हमारा सर्वस्व सन्निहित है। हमारे आचार-विचार, सदाचार और हमारी संस्कृति वेदों में परिलक्षित होती है। वेदों में विज्ञान का स्वरूप समुन्नत है। उन्होंने कहा कि शिक्षा में संस्कृत का अध्ययन-अध्यापन सबके लिए अनिवार्य होना चाहिए। महर्षि विश्वामित्र, महर्षि वशिष्ठ एवं कणार जैसे ऋषिगण महान वैज्ञानिक ऋषि भी रहे हैं। आचार्य महेशचंद्र शर्मा ने कहा कि संस्कृत के विद्वानों को सृजन के क्षेत्र में आगे आना चाहिए ताकि छत्तीसगढ़ में संस्कृत जन-जन तक पहुंचे।
    डॉ. सुरेश शर्मा ने सभी विद्वानों का गोष्ठी में उपस्थिति के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इसी तरह के आयोजनों से छत्तीसगढ़ में संस्कृत के विकास के लिए मार्गदर्शन मिलेगा। कार्यक्रम का संचालन डॉ. श्रीमती कल्पना द्विवेदी, सहायक संचालक छत्तीसगढ़ संस्कृत विद्यामण्डलम् द्वारा किया गया। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा विभाग के उप संचालक श्री जी.आर.होता, सहायक संचालक छत्तीसगढ़ संस्कृत विद्यामण्डलम श्री पी.डी.मिश्रा, सहायक संचालक छत्तीसगढ़ संस्कृत विद्यामण्डलम श्री नर्मदा प्रसाद विश्वकर्मा, डॉ. संतोष तिवारी सहित विद्यामण्डलम् के अन्य कर्मचारी उपस्थित थे।
क्रमांक.2444/राजेश/प्रतिभा


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