नक्सल चुनौती के बावजूद बस्तर में विकास की बयार
एक दशक में तेजी से बदली तस्वीर
विकास प्राधिकरण, मेडिकल कॉलेज और विश्वविद्यालय की स्थापना
कोसारटेडा सिंचाई योजना के निर्माण से पूरा हुआ 28 साल पुराना सपना
रायपुर 25 अक्टूबर 2010
नक्सल हिंसा की गंभीर चुनौती के बावजूद छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल बस्तर संभाग के जन-जीवन की बेहतरी के लिए विकास की बयार लगातार बह रही है। राज्य सरकार द्वारा वहां अपनी फौलादी इच्छा शक्ति से आम जनता की भलाई और अंचल के विकास के लिए विभिन्न योजनाओं के साथ अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। इसके फलस्वरूप वहां आम जनता में विश्वास की भावना बलवती होती गयी है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के शब्दों में बस्तर जैसे पिछड़े और आदिवासी बहुल इलाकों का विकास प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। पिछले एक दशक में यहां आम जनता के जीवन से जुड़ी विभिन्न बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए कई जरूरी काम हुए। खास तौर पर पिछले सात वर्ष में तो आदिवासी विकास प्राधिकरण, मेडिकल कॉलेज और बस्तर विश्वविद्यालय की स्थापना और दो नये जिलों - नारायणपुर और बीजापुर के गठन से इस पूरे इलाके में सामाजिक आर्थिक विकास की रफ्तार और भी तेज हो गयी है। कोसारटेडा जैसी वर्ष 1980 से लम्बित सिंचाई परियोजना को डॉ. रमन सिंह की सरकार ने नया जीवन देकर वर्ष 2008 में पूर्ण करवाया और इसके माध्यम से किसानों के 27 हजार एकड़ ज्यादा रकबे में फसलों के लिए पानी की व्यवस्था सुनिश्चित कर दी। इस प्रकार वहां के किसानों का करीब अटठाईस साल पुराना एक सपना साकार हुआ।
स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, परिवहन, आवागमन, सिंचाई और उद्याेग तथा अनुसूचित वर्गों के कल्याण की दिशा में बस्तर संभाग में 10 बरसों में जो तरक्की हुई है, वह अपने आप में एक मिसाल के तौर पर दिखने लगा है। आज से 10 बरस पहले बस्तर जैसे पिछड़े इलाके के लिए इन क्षेत्रों में विकास एक सपने के जैसा था। आज वही सपना लोगों के आंखों के सामने एक सच की तरह सामने है, जो आईने की तरह बिलकुल साफ-सुथरा है। स्वास्थ्य और चिकित्सा सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण और विस्तार के लिए जहां शासकीय मेडिकल कॉलेज वर्ष 2006 में खोला गया और चिकित्सा और स्वास्थ्य सुविधा की विस्तार को अमलीजामा पहनाया गया, वहीं अनेकानेक शैक्षण्0श्निाक संस्थाएं भी खोली गयी। शिक्षा और स्वास्थ्य को मिली खासी तरजीह की बदौलत यहां के लोगों को इन दोनों क्षेत्रों में कल्पनातीत सच्चाई साफ दिखने लगी। शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील मसलों पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ.रमनसिंह ने बस्तर को जो सुविधाएं और सहूलियतें उपलब्ध करायी, उसमें गरीब, बेसहारा और कमजोर तबकों के लोगों का कल्याण दिखता है। राज्य के और संभवत: देश के किसी आदिवासी बहुल क्षेत्र में मेडिकल कॉलेज का खुलना और चिकित्सा और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार करना एक मिसाल के रूप में मौजुद है। जिसके लिए मुख्यमंत्री ने दक्षिण क्षेत्र बस्तर आदिवासी प्राधिकरण की बैठक में एक अहम फैसला लिया था कि यहां मेडिकल कॉलेज खोला जाए और वह खुला। शिक्षा के क्षेत्र. में एक क्रांतिकारी फैसला लेते हुए वर्ष 2009 में बस्तर के लिए बस्तर विश्वविद्यालय की स्थापना की गयी। इन 10 बरसों में मुख्यमंत्री डॉ.रमनसिंह ने शिक्षा के क्षेत्र. में बस्तर के लोगों को प्राथमिक, माध्यमिक, हाईस्कूल, हायर सेकेण्डरी स्कूल के बाद उच्च शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए बस्तर विश्वविद्यालय स्थापना का कदम उठाया, जो मील का पत्थर भी साबित हुआ। अब यह सुनिश्चित हो गया है कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बस्तर राज्य के किसी भी जिले से कमतर नहीं है और न ही रहेगा।
लोगों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार ने जिस तरह प्रत्येक क्षेत्रों में गांव, गरीब, किसानों को प्राथमिकता दी, वहीं खेती किसानी के कामकाज से जुड़े हुए ग्रामीणों को हर तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए कहीं कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी गयी। मुख्यमंत्री डॉ. रमनसिंह ने इसे ध्यान में रखकर बस्तर के वर्ष 1980 से निर्माणाधीन बस्तर की कोसारटेडा मध्यम सिंचाई परियोजना जो अविभाजित मध्यप्रदेश की सबसे पुरानी निर्माणाधीन और बस्तर क्षेत्र की सबसे बड़ी परियोजना के लम्बित रूप में विद्यमान थी, उसे पूरा किया। 133.63 करोड़ रूपए की लागत की कोसारटेडा मध्यम सिंचाई परियोजना के पूरा होने पर विकासखंड बस्तर के 25 गांवों के 27 हजार 446 एकड़ याने 11 हजार 120 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचित करने का भी सपना पूरा हो गया। आदिवासी क्षेत्र में स्थित इस परियोजना से प्रथम पांच वर्ष में सिंचाई हेतु नि:शुल्क जल प्रदाय करने की व्यवस्था की गयी है। वहीं डूब प्रभावित परिवारों को इस परियोजना के माध्यम से खरीफ सिंचायी के पश्चात रिक्त होने वाली डूब क्षेत्र की भूमि पट्टे पर रबी फसल हेतु देने की व्यवस्था की गयी। इसके साथ ही साथ जलाशय क्षेत्र को मछली पालन हेतु मछुआरा परिवारों को दिया जाना सुनिश्चित किया गया। कोसारटेडा मध्यम सिंचायी परियोजना जो कि आज एक महत्वाकांक्षी परियोजना के रूप में आज मौजुद है। इसके जरिए 9 हजार 174 अनुसूचित जनजाति के परिवार, 5 हजार 838 अनुसूचित जाति के परिवार और एक हजार 668 अन्य जाति के परिवारों को लाभान्वित किया जाना सुनिश्चित किया गया है। इस प्रकार इस परियोजना के जरिए 90 प्रतिशत अनुसूचित जाति और जनजाति के परिवारों के परिवारों को लाभ दिलाया जाना सुनिश्चित किया जा सका है।
बस्तर में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के अलावा अधोसंरचना विकास के कामों को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी गयी है। इन 10 बरसों में राज्य के सर्वागीण विकास की मंशा को फलीभूत करने के लिए वन बहुल बस्तर क्षेत्र में औद्योगिक क्रांति का भी सूत्रपात किया गया है। राज्य के विभिन्न जिलों में जिस तरह सामाजिक, आर्थिक और औद्योगिक विकास के लिए जो प्रयास किए गए हैं, उसी श्रृंखला में बस्तर में भी औद्योगिक विकास करने के संकल्प को यथार्थ तौर पर परिणत करने के लिए काम शुरू किया गया। सार्वजनिक और निजी क्षेत्र में औद्योगिक विकास की पक्षधर बस्तर के नागरिकों ने भी इसका पुरजोर समर्थन किया। नतीजतन आज राज्य के विकास के साथ बस्तर में औद्योगिक विकास की गति को तेजी मिली। इस दिशा में मुख्यमंत्री डॉ.रमनसिंह की विशेष पहल पर भारत की नवरत्न कही जाने वाली नेशनल मिनरल डेव्हलपमेंट कारपोरेशन के जरिए बस्तर के नगरनार में तीन मिलियन टन वार्षिक उत्पदन क्षमता का वृहद इस्पात संयंत्र स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त हुआ। बस्तर के नगरनार में स्थापित होने जा रहे एनएमडीसी के वृहद इस्पात संयंत्र से हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से रोजगार और स्वरोजगार मिलना संभव हो सका है, वहीं ''बस्तर के लोहे से बस्तर में ही इस्पात'' बनने का बरसों का सपना भी साकार हो रहा है। इसके साथ साथ अनेक सहायक उद्योगों की स्थापना का भी मार्ग प्रशस्त हो रहा है। बस्तर की बदल रही फिजा में औद्योगिक विकास की करवट ने जो रूख अख्तियार किया है, उससे यह प्रतीत होता है कि बस्तर किसी भी दृष्टि से पीछे नहीं है।
छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल बस्तर संभाग के अन्तर्गत आने वाले पांचों जिलों में कई बरसों से रिक्त पड़े शासकीय नौकरियों के पदों को भरने की भी कामयाब जुम्बिश की गयी है। यह सार्थक पहल मुख्यमंत्री डॉ.रमनसिंह की अध्यक्षता में अभी हाल ही में संभागीय मुख्यालय जगदलपुर में सम्पन्न हुयी ''बस्तर डेव्हलपमेंट ग्रुप'' की बैठक में की गयी। लगभग 12 हजार रिक्त पदों पर सीधी भर्ती करने के लिए स्थानीय युवाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गयी है। आज संभाग के इन पांचों जिलों में इन 12 हजार पदों पर सीधी भर्ती के लिए स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देकर भर्ती करने की कार्यवाही की जा रही है। रोजगार उपलब्ध कराने के क्षेत्र में बस्तर के लिए यह काम जो किया गया है, वह कभी किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था। बस्तर में ही बस्तर के ही लोगों को रोजगार मिल सके, यह पहले संभव नहीं था, अब न केवल संभव हुआ है बल्कि इसमें भर्ती की कार्यवाही भी चल रही है। शासन के विभिन्न विभागों में की जाने वाली और की जा रही इस भर्ती की प्रक्रिया को लेकर बस्तर के युवाओं उत्साह का संचार हुआ है। युवा बेहद खुश है कि उन्हें शासन की नौकरी के जरिए लोगों की सेवा करने का अवसर मिल रहा है।
राज्य निर्माण के 10 बरसों में बस्तर में यूं तो बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धताएं सुनिश्चित करने की दिशा में अनेक स्वर्णिम काम हुए हैं, वहीं अधोसंरचना विकास के लिए भी शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अनेकानेक काम हुए हैं और लगातार हो रहे हैं। इसी श्रृंखला में बस्तर में सड़कों का जाल बिछाने के लिए बहुत काम हुए हैं। लोगों को आवागमन की सहूलियतें उपलब्ध कराने के लिए बिछाये गये सड़कों के जाल से आवागमन की रफ्तार तो बढ़ी ही है, शहरी और ग्रामीण बसाहटों के नागरिकों को विकास की मुख्यधारा से प्रत्यक्ष तौर पर जुड़ने का सुअवसर मुनासिब हो सका है। बस्तर जो कभी दुर्गम और पहुंचविहीन माना जाता था अब ऐसी स्थिति नहीं रही है। अब बस्तर के लोगों की आशाएं उम्मीद और गहरे विश्वास में बदल रही है कि बस्तर में अमन, चैन, शांति और सुरक्षा के साथ हुए और हो रहे निर्दोष सर्वागीण विकास की बदौलत उनकी जिंदगी संवर जाएगी।
स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, परिवहन, आवागमन, सिंचाई और उद्याेग तथा अनुसूचित वर्गों के कल्याण की दिशा में बस्तर संभाग में 10 बरसों में जो तरक्की हुई है, वह अपने आप में एक मिसाल के तौर पर दिखने लगा है। आज से 10 बरस पहले बस्तर जैसे पिछड़े इलाके के लिए इन क्षेत्रों में विकास एक सपने के जैसा था। आज वही सपना लोगों के आंखों के सामने एक सच की तरह सामने है, जो आईने की तरह बिलकुल साफ-सुथरा है। स्वास्थ्य और चिकित्सा सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण और विस्तार के लिए जहां शासकीय मेडिकल कॉलेज वर्ष 2006 में खोला गया और चिकित्सा और स्वास्थ्य सुविधा की विस्तार को अमलीजामा पहनाया गया, वहीं अनेकानेक शैक्षण्0श्निाक संस्थाएं भी खोली गयी। शिक्षा और स्वास्थ्य को मिली खासी तरजीह की बदौलत यहां के लोगों को इन दोनों क्षेत्रों में कल्पनातीत सच्चाई साफ दिखने लगी। शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील मसलों पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ.रमनसिंह ने बस्तर को जो सुविधाएं और सहूलियतें उपलब्ध करायी, उसमें गरीब, बेसहारा और कमजोर तबकों के लोगों का कल्याण दिखता है। राज्य के और संभवत: देश के किसी आदिवासी बहुल क्षेत्र में मेडिकल कॉलेज का खुलना और चिकित्सा और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार करना एक मिसाल के रूप में मौजुद है। जिसके लिए मुख्यमंत्री ने दक्षिण क्षेत्र बस्तर आदिवासी प्राधिकरण की बैठक में एक अहम फैसला लिया था कि यहां मेडिकल कॉलेज खोला जाए और वह खुला। शिक्षा के क्षेत्र. में एक क्रांतिकारी फैसला लेते हुए वर्ष 2009 में बस्तर के लिए बस्तर विश्वविद्यालय की स्थापना की गयी। इन 10 बरसों में मुख्यमंत्री डॉ.रमनसिंह ने शिक्षा के क्षेत्र. में बस्तर के लोगों को प्राथमिक, माध्यमिक, हाईस्कूल, हायर सेकेण्डरी स्कूल के बाद उच्च शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए बस्तर विश्वविद्यालय स्थापना का कदम उठाया, जो मील का पत्थर भी साबित हुआ। अब यह सुनिश्चित हो गया है कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बस्तर राज्य के किसी भी जिले से कमतर नहीं है और न ही रहेगा।
लोगों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार ने जिस तरह प्रत्येक क्षेत्रों में गांव, गरीब, किसानों को प्राथमिकता दी, वहीं खेती किसानी के कामकाज से जुड़े हुए ग्रामीणों को हर तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए कहीं कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी गयी। मुख्यमंत्री डॉ. रमनसिंह ने इसे ध्यान में रखकर बस्तर के वर्ष 1980 से निर्माणाधीन बस्तर की कोसारटेडा मध्यम सिंचाई परियोजना जो अविभाजित मध्यप्रदेश की सबसे पुरानी निर्माणाधीन और बस्तर क्षेत्र की सबसे बड़ी परियोजना के लम्बित रूप में विद्यमान थी, उसे पूरा किया। 133.63 करोड़ रूपए की लागत की कोसारटेडा मध्यम सिंचाई परियोजना के पूरा होने पर विकासखंड बस्तर के 25 गांवों के 27 हजार 446 एकड़ याने 11 हजार 120 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचित करने का भी सपना पूरा हो गया। आदिवासी क्षेत्र में स्थित इस परियोजना से प्रथम पांच वर्ष में सिंचाई हेतु नि:शुल्क जल प्रदाय करने की व्यवस्था की गयी है। वहीं डूब प्रभावित परिवारों को इस परियोजना के माध्यम से खरीफ सिंचायी के पश्चात रिक्त होने वाली डूब क्षेत्र की भूमि पट्टे पर रबी फसल हेतु देने की व्यवस्था की गयी। इसके साथ ही साथ जलाशय क्षेत्र को मछली पालन हेतु मछुआरा परिवारों को दिया जाना सुनिश्चित किया गया। कोसारटेडा मध्यम सिंचायी परियोजना जो कि आज एक महत्वाकांक्षी परियोजना के रूप में आज मौजुद है। इसके जरिए 9 हजार 174 अनुसूचित जनजाति के परिवार, 5 हजार 838 अनुसूचित जाति के परिवार और एक हजार 668 अन्य जाति के परिवारों को लाभान्वित किया जाना सुनिश्चित किया गया है। इस प्रकार इस परियोजना के जरिए 90 प्रतिशत अनुसूचित जाति और जनजाति के परिवारों के परिवारों को लाभ दिलाया जाना सुनिश्चित किया जा सका है।
बस्तर में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के अलावा अधोसंरचना विकास के कामों को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी गयी है। इन 10 बरसों में राज्य के सर्वागीण विकास की मंशा को फलीभूत करने के लिए वन बहुल बस्तर क्षेत्र में औद्योगिक क्रांति का भी सूत्रपात किया गया है। राज्य के विभिन्न जिलों में जिस तरह सामाजिक, आर्थिक और औद्योगिक विकास के लिए जो प्रयास किए गए हैं, उसी श्रृंखला में बस्तर में भी औद्योगिक विकास करने के संकल्प को यथार्थ तौर पर परिणत करने के लिए काम शुरू किया गया। सार्वजनिक और निजी क्षेत्र में औद्योगिक विकास की पक्षधर बस्तर के नागरिकों ने भी इसका पुरजोर समर्थन किया। नतीजतन आज राज्य के विकास के साथ बस्तर में औद्योगिक विकास की गति को तेजी मिली। इस दिशा में मुख्यमंत्री डॉ.रमनसिंह की विशेष पहल पर भारत की नवरत्न कही जाने वाली नेशनल मिनरल डेव्हलपमेंट कारपोरेशन के जरिए बस्तर के नगरनार में तीन मिलियन टन वार्षिक उत्पदन क्षमता का वृहद इस्पात संयंत्र स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त हुआ। बस्तर के नगरनार में स्थापित होने जा रहे एनएमडीसी के वृहद इस्पात संयंत्र से हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से रोजगार और स्वरोजगार मिलना संभव हो सका है, वहीं ''बस्तर के लोहे से बस्तर में ही इस्पात'' बनने का बरसों का सपना भी साकार हो रहा है। इसके साथ साथ अनेक सहायक उद्योगों की स्थापना का भी मार्ग प्रशस्त हो रहा है। बस्तर की बदल रही फिजा में औद्योगिक विकास की करवट ने जो रूख अख्तियार किया है, उससे यह प्रतीत होता है कि बस्तर किसी भी दृष्टि से पीछे नहीं है।
छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल बस्तर संभाग के अन्तर्गत आने वाले पांचों जिलों में कई बरसों से रिक्त पड़े शासकीय नौकरियों के पदों को भरने की भी कामयाब जुम्बिश की गयी है। यह सार्थक पहल मुख्यमंत्री डॉ.रमनसिंह की अध्यक्षता में अभी हाल ही में संभागीय मुख्यालय जगदलपुर में सम्पन्न हुयी ''बस्तर डेव्हलपमेंट ग्रुप'' की बैठक में की गयी। लगभग 12 हजार रिक्त पदों पर सीधी भर्ती करने के लिए स्थानीय युवाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गयी है। आज संभाग के इन पांचों जिलों में इन 12 हजार पदों पर सीधी भर्ती के लिए स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देकर भर्ती करने की कार्यवाही की जा रही है। रोजगार उपलब्ध कराने के क्षेत्र में बस्तर के लिए यह काम जो किया गया है, वह कभी किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था। बस्तर में ही बस्तर के ही लोगों को रोजगार मिल सके, यह पहले संभव नहीं था, अब न केवल संभव हुआ है बल्कि इसमें भर्ती की कार्यवाही भी चल रही है। शासन के विभिन्न विभागों में की जाने वाली और की जा रही इस भर्ती की प्रक्रिया को लेकर बस्तर के युवाओं उत्साह का संचार हुआ है। युवा बेहद खुश है कि उन्हें शासन की नौकरी के जरिए लोगों की सेवा करने का अवसर मिल रहा है।
राज्य निर्माण के 10 बरसों में बस्तर में यूं तो बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धताएं सुनिश्चित करने की दिशा में अनेक स्वर्णिम काम हुए हैं, वहीं अधोसंरचना विकास के लिए भी शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अनेकानेक काम हुए हैं और लगातार हो रहे हैं। इसी श्रृंखला में बस्तर में सड़कों का जाल बिछाने के लिए बहुत काम हुए हैं। लोगों को आवागमन की सहूलियतें उपलब्ध कराने के लिए बिछाये गये सड़कों के जाल से आवागमन की रफ्तार तो बढ़ी ही है, शहरी और ग्रामीण बसाहटों के नागरिकों को विकास की मुख्यधारा से प्रत्यक्ष तौर पर जुड़ने का सुअवसर मुनासिब हो सका है। बस्तर जो कभी दुर्गम और पहुंचविहीन माना जाता था अब ऐसी स्थिति नहीं रही है। अब बस्तर के लोगों की आशाएं उम्मीद और गहरे विश्वास में बदल रही है कि बस्तर में अमन, चैन, शांति और सुरक्षा के साथ हुए और हो रहे निर्दोष सर्वागीण विकास की बदौलत उनकी जिंदगी संवर जाएगी।
क्रमांक-3452/जग.

